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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Geet Yahi Haal Idhar Bhi Hai
    गीत

    यही हाल इधर भी है | Geet Yahi Haal Idhar Bhi Hai

    ByAdmin April 30, 2024

    यही हाल इधर भी है ( Yahi Haal Idhar Bhi Hai )   बेताबी बेचैनी होती, धड़कनों में धक-धक सी है। घबराहट सी होती दिल में, यही हाल इधर भी है। दिल में धक-धक सी है इंतजार की वो घड़ियां, गीतों की सजती है कड़ियां। मन का सागर ले हिलोरें, सावन की बरसे झड़िया। प्रीत…

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  • Pyar Neelam Hua
    ग़ज़ल

    प्यार नीलाम हुआ | Ghazal Pyar Neelam Hua

    ByAdmin April 30, 2024

    प्यार नीलाम हुआ ( Pyar Neelam Hua )   प्यार नीलाम हुआ अक्ल के दानाई में जीत का जश्न मनाता है वो हाराई में II चाल पे चाल चला शर्म निगाहों से गुम आज हम चौक गए सोच के तन्हाई में II यक-ब-यक तोड़ रहा आज मरासिम जो वो बेअसर वक्त भी होगा कभी भरपाई…

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  • yogesh
    कविताएँ

    योगेश की कविताएं | Yogesh Hindi Poetry

    ByAdmin April 30, 2024August 23, 2025

    इंसानियत मर रही कितना क्रूर होता जा रहा अब मानव,मानवता क्रूरता में बदलती जा रही,अपने स्वार्थ की हर सीमा लांघ रहा,बुद्धिमत्ता, समझदारी क्षीण होती जा रही,रिश्ते – नाते,अपने – पराए,सब भूल रहा,इंसानियत भी अब शर्मसार हुए जा रही,दोष इन सबका हालातों को दिया जा रहा,मगर झांककर देखो ये नशे की लत हर घर अपना आतंक…

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  • प्रकृति व स्त्री विमर्श
    पुस्तक समीक्षा

    “स्त्री व नारी विमर्श”: नारी सशक्तिकरण की प्रेरणादायी कहानियों का संग्रह

    ByAdmin April 30, 2024

    नारी प्रधान कहानियां डॉ सुमनधर्म वीर द्वारा लिखी गई किताब “स्त्री व नारी विमर्श” हमने पढ़ी । यह किताब बहुत ही अच्छी तरह से लिखी गई है। क्योंकि इस किताब में नारी प्रधान कहानियां हैं । किस तरह से हमारा समाज एक नारी को देखता है चाहे वह अपने मायके में रहे या ससुराल में…

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  • उन्हुका दीया से नूर लेके का होई
    भोजपुरी कविता

    उन्हुका दीया से नूर लेके का होई

    ByAdmin April 30, 2024

    उन्हुका दीया से नूर लेके का होई   जमाना के बात रोजाना होता दरद ओरात ना गोताना होता लिपल बतकही सोहात नइखे सफर उन्हुकर सोहाना होता पत्तल सीके जीअल जाता जहाँ गरीबी कागज में खोजाना होता परगट सिसकत बिया जिनगी नजर के मूँद के जोहाना होता हाय लागी कइसे लील गइलन गटके के घटना रोजाना…

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  • Kavita Aam ke Aam
    कविताएँ

    आम के आम गुठलियों के दाम | Kavita Aam ke Aam

    ByAdmin April 30, 2024

    आम के आम गुठलियों के दाम ( Aam ke Aam guthliyon ke daam )   आम के आम हो जाए, गुठलियों के दाम हो जाए। अंगुली टेड़ी करनी ना पड़े, अपना काम हो जाए। कविता में रस आ जाए, श्रोताओं के मन भा जाए। कलमकार रच कुछ ऐसा, दुनिया में नाम हो जाए। आम वही…

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  • जब इश्क का फूल खिलता है
    ग़ज़ल

    जब इश्क का फूल खिलता है

    ByAdmin April 30, 2024April 30, 2024

    जब इश्क का फूल खिलता है   दिल के गुलशन जब इश्क का फूल खिलता है, बदन का अंग-अंग, रोम-रोम हिलने लगता है ! भटकता जब मन बैचेन होकर इधर उधर तब, महबूब की बांहो में जन्नत का सुकून मिलता है ! मुहब्बत की दुनिया के जलवे ही होते है निराले, इसकी आग में दिन…

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  • प्रकृति व स्त्री विमर्श
    पुस्तक समीक्षा

    सामाजिक एवं धार्मिक विद्रूपताओं का प्रकटीकरण

    ByAdmin April 30, 2024

    पुस्तक समीक्षा पुस्तक: प्रकृति व स्त्री विमर्श लेखिका: डॉ सुमन धर्मवीर प्रकाशक: पुष्पांजलि दिल्ली 110053 मूल्य: 445 रुपए मात्र नाटक समीक्षक: डॉक्टर कश्मीरी बौद्ध (साहित्यकार एवं प्रोफेसर रोहतक) लेखिका परिचय: डॉ सुमन धर्मवीर का लेखन व सामाजिक क्षेत्र में जाना पहचाना नाम है ।उनके द्वारा रचित अनेक कहानियां, कविताएं नाटक एवं लेख भी विभिन्न पत्र…

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  • Kavita Padachinh
    कविताएँ

    पदचिन्ह | Kavita Padachinh

    ByAdmin April 30, 2024April 30, 2024

    पदचिन्ह ( Padachinh )   पदचिन्हों का जमाना अब कहां पदलुपतों का जमाना अब जहां परमसत्ता को शब्द-सत्ता से च्युत करने की साजिश है जहा तिनका-तिनका जलेगा मनुज अपने ही कर्मों को ढोते-ढोते शब्द-पराक्रम की महिमा वशिष्ट ने राम को समझायी अंश मात्र जो आज हम अपनाते क्लेश नामों-निशान मिट जाता शेखर कुमार श्रीवास्तव दरभंगा(…

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  • विपदाओं के चक्रव्यूह
    कविताएँ

    विपदाओं के चक्रव्यूह

    ByAdmin April 30, 2024

    विपदाओं के चक्रव्यूह   बाधाएं तो आतीं हैं, औ आगे भी आएंगी ! अविचल बढ़ो मार्ग पर अपने खुद ही मिट जाएंगी !! विकट समस्याओं के सम्मुख तुम तनिक नहीं घबराना ! बुद्धि,विवेक,धैर्य, कौशल से तुमको निजात है पाना !! विपदाओं के चक्रव्यूह से निकलोगे तुम कैसे ! आओ बतलाता हूं तुमको व्यूह रचो कुछ…

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