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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Baba Saheb Ambedkar par Kavita
    कविताएँ

    जो अम्बेडकर को पढ़ेगा

    ByAdmin April 14, 2024

    जो अम्बेडकर को पढ़ेगा   पूरी ईमानदारी से- जो गाँधी और मार्टिन को पढ़ेगा, वो सत्य-अहिंसा का मार्ग चुनेगा; जो भगत और चे को पढ़ेगा वह निश्चित ही क्रांति करेगा; जो लोहिया व लेनिन को पढ़ेगा वो समाजवाद की दुनिया रचेगा; जो सावित्रीबाई-टरेसा को पढ़ेगा वो शिक्षा-सेवा का पथ चुनेगा; जो सुकरात-पेरियार को पढ़ेगा, वह…

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  • Ghazal Aankhon se
    कहानियां

    आंखों से करती जादू है | Ghazal Aankhon se

    ByAdmin April 13, 2024

    आंखों से करती जादू है आंखों से करती जादू है दिल होता यूं बेकाबू है सांसें महके तुझमें हर पल उड़ती जो तेरी ख़ुशबू है देख रहा है दूर खड़ा वो आ के बैठा कब पहलू है कब फ़ूल दिया है उल्फ़त का मारा नफ़रत का चाकू है बात न की आज़म यूं तुझसे कड़वी…

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  • Kavita Bada hi Mahatva hai
    कविताएँ

    बड़ा ही महत्व है | Kavita Bada hi Mahatva hai

    ByAdmin April 13, 2024

    बड़ा ही महत्व है ( Bada hi Mahatva hai )   पढ़ने में किताब का जीतने में ख़िताब का दूकान में हिसाब का बड़ा ही महत्व है । खाने में खटाई का सोने में चटाई का कक्षा में पिटाई का बड़ा………. खेत में हल का रेत में ऊंट का डेंगने में बेंत का बड़ा………… रिश्तों…

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  • आओ करें बागवानी
    कविताएँ

    आओ करें बागवानी | Kavita Aao Kare Bagwani

    ByAdmin April 13, 2024

    आओ करें बागवानी ( Aao Kare Bagwani )   डाल-डाल चिड़िया चहके, ताल-तलइया पानी। कल-कल करके बहती नदिया, गाँव करे अगवानी, जग की रीति पुरानी, अमिट हो अपनी निशानी, जग की रीति पुरानी, अमिट हो अपनी निशानी। पेड़ न रोने पाएँ कहीं पे, इसपे नजर गड़ाना। छाँव न घटने पाए धरा पे, मिलकर इसे बचाना।…

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  • Kavita Baisakhi ka Parv
    कविताएँ

    वैसाखी का पर्व सुहाना | Kavita Baisakhi ka Parv

    ByAdmin April 13, 2024

    वैसाखी का पर्व सुहाना ( Baisakhi ka Parv Suhana )   खेतों में खड़ी फ़सलें पक गई हैं, सबके घरों में ख़ुशियाँ चहक रही हैं; आओ, मिलकर छेड़े कोई मधुर तराना देखो,आ गया वैसाखी का यह पर्व सुहाना । मेला घुमने जा रहे हैं सब सज-सँवरकर, सुंदर बालाएँ चलती ज़रा-सी इठलाकर; बच्चों की मुस्कान-सा, प्रकृति…

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  • Kavita Vasantik Navratri Pancham
    कविताएँ

    चैत्र माह शुक्ल पक्ष नवमी

    ByAdmin April 13, 2024April 17, 2024

    चैत्र माह शुक्ल पक्ष नवमी रामलला सूर्य अभिषेक,अद्भुत अनुपम विशेष हिंदू धर्म रामनवमी अनूप पर्व , सर्वत्र उमंग हर्ष उल्लास । परिवेश उत्सविक अनुपमा, रज रज राम राग रंग उजास । जनमानस भाव विभोर हर्षल, आध्यात्म ओज मनोरमा अधिशेष। रामलला सूर्य अभिषेक,अद्भुत अनुपम विशेष ।। चैत्र माह शुक्ल पक्ष नवमी, राघव दशरथ अवतरण पर्व ।…

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  • Sanjeevani Pays Tribute to Litterateur
    साहित्यिक गतिविधि

    संजीवनी संस्था द्वारा साहित्यकार जनकवि बजरंगलाल पारीक व भूतपूर्व विधायक श्रीराम बासोतिया को याद किया

    ByAdmin April 13, 2024

    कल सांय जांगिड अस्पताल परिसर में सामाजिक व साहित्यिक संस्था संजीवनी द्वारा साहित्य के द्रोणाचार्य व साहित्यकार जनकवि बजरंगलाल पारीक व नवलगढ के भूतपूर्व विधायक श्रीराम बासोतिया की पुण्यतिथि मनाई गई। स्थानीय कवियों द्वारा कविताएं प्रस्तुत कर उनको श्रदांजलि दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संजीवनी के अध्यक्ष डाॅ दयाशंकर जांगिड ने की। मंच पर संजीवनी…

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  • Katha Laut Aao na Papa
    कहानियां

    लौट आओ ना पापा | Katha Laut Aao na Papa

    ByAdmin April 13, 2024

    नेहा का कोई संसार में अपना सा लगता था तो वह थे – उसके पापा! उसके पापा भी उसे बहुत चाहते थे। जब उन्हें कोई जरूरत होती तो नेहा को ही बुलाया करते थे। वैसे नेहा की दो और बहने हैं एक बड़ी जिसकी शादी हो चुकी है उसके 1 वर्ष का है छोटा सा…

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  • Kavita Laawaris Deh
    कविताएँ

    लावारिस देह | Kavita Laawaris Deh

    ByAdmin April 13, 2024April 13, 2024

    उसकी बिंदिया ( Uski Bindiya )   उसकी बिंदिया दरवाजे पर झांकती अबोध किरण थी जो तुलसी को सांझ –ढ़ले हर्षा सकती थी कि वह दीपशिखा की तरह झिलमिला रही है . उसकी चूड़ियां दरवाजे पर उठती मासूम आहट थी जो रसोई में से भी साफ सुनी जा सकती थी कि वह चबूतरे पर खिलखिला…

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  • Kavita Yah Mujhko
    कविताएँ

    यह मुझको स्वीकार नहीं | Kavita Yah Mujhko

    ByAdmin April 13, 2024

    यह मुझको स्वीकार नहीं ( Yah mujhko swikar nahin )   निज पथ से विचलित हो जाऊं यह   मुझको   स्वीकार    नहीं पहन   बेड़ियां   पग  में  अपने झुकने     को     तैयार    नहीं। देख   नीर  बहती  आंखों  में क्रोध   शीर्ष   चढ़  जाता   है आंख  मूंद   कैसे  सह  जाऊं सहन   नहीं    हो   पाता  है। लुटे   अस्मिता   ठीक   सामने क्या  …

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