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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Navratri festival (Chaitra) ninth day
    कविताएँ

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र) नवम दिवस

    ByAdmin April 9, 2024

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र) नवम दिवस   भुवाल माता पर सदा विश्वास अक्षय कोष शक्ति का भीतर है । एक बार उसको जो पहचान जाता है वह शिव पथ गामी बन जाता है । कर्मों की गति से जीवन में बार – बार दुर्दिन देखा है बार – बार चोटे खाई है । असफलता ,…

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  • Kavita Duniya ka Mela
    कविताएँ

    दुनिया के मेले में हर शख्स अकेला | Kavita Duniya ka Mela

    ByAdmin April 9, 2024

    दुनिया के मेले में हर शख्स अकेला   अकेले ही चलना बंदे दुनिया का झमेला है। दुनिया के मेले में यहां हर शख्स अकेला है। आंधी और तूफानों से बाधाओं से लड़ना है। संघर्षों से लोहा लेकर बुलंदियों पर चढ़ता है। हिम्मत हौसला जुटा लो धीरज भी धरना है। रंग बदलती दुनिया में संभल कर…

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  • Aachary bhikshu
    कविताएँ

    265 वां भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस पर मेरे भाव

    ByAdmin April 9, 2024April 2, 2025

    265 वां भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस पर मेरे भाव ( 265 Bhikshu abhinishkraman divas ) भिक्षु स्वामी की शरण भारी जगत में कुछ भी सार नहीं है । करे हम क्यो इतनी नादानी । शिरोधार्य करे समता धर्म को । आत्मा हो जाती भव पार ।। भिक्षु स्वामी की शरण भारी । हम पढ़ते धर्म –…

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  • आई फिर जनता की बारी
    कविताएँ

    आई फिर जनता की बारी | Kavita Janta ki Bari

    ByAdmin April 9, 2024

    आई फिर जनता की बारी   आने लगे नेता पारापारी, कि आई फिर जनता की बारी। बढ़ी गइल कितनी बेकारी, महंग भइल दाल -तरकारी। बगुला भगत बनि-बनि जइसे आए, वोटवा की खातिर वो दामन बिछाए। घूमें जइसे कोई शिकारी, कि आई फिर जनता की बारी। आने लगे नेता पारापारी, कि आई फिर जनता की बारी।…

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  • Swarnjit Savi
    कविताएँ

    स्वर्णजीत सवी की सात मूल पंजाबी कविताओं का हिंदी अनुवाद | अनुवादक : डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक

    ByAdmin April 9, 2024April 10, 2024

    भरतीय साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता (2023) स्वर्णजीत सवी पंजाबी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी बहु चर्चित कविताओं की विशेषता यह है उनकी कविताओं में अहसास की धूप, उदासी की धुंध, जुदाई की तपिश और मिलन की बर्फ़ जैसी ठंडक भी है। वो अपनी कविता के माध्यम से ज़िन्दगी के दिल पे लगे हुए ज़ख़्मों…

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  • Ram Hey Ram
    कविताएँ

    राम का गलत वनवास हुआ | Kavita Ram ka Vanvas

    ByAdmin April 9, 2024

    राम का गलत वनवास हुआ ( Ram ka Galat Vanvas Hua )   हमें कुछ ऐसा एहसास हुआ राम का गलत वनवास हुआ। भरत तो थे नहीं अपने घर में और भी माँए थी उस नगर में। सबकी बनी भी सहमति होती नहीं किसी की कोई क्षति होती। विमाता का स्वार्थ खास हुआ राम का…

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  • Kavita Sutra
    कविताएँ

    सूत्र | Kavita Sutra

    ByAdmin April 9, 2024

    सूत्र ( Sutra )   प्रयास तो करना हि होगा सफल होने तक सौ से पहले गिनती पुरी नही होती बिना पूरा मूल्य चुकाये दुकानदार सामान नही देता अधूरा ज्ञान और अधूरा अनुभव उपहास का कारण बनते हैं अवसर की समझ और समय की कद्र किये बिना, आपका मूल्य कुछ नहीं वक्त और मौत बताकर…

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  • Kahani Ek Aas Ab Bhi
    कहानियां

    एक आस अब भी | Kahani Ek Aas Ab Bhi

    ByAdmin April 9, 2024

    सुदेश जी का अपना बसा बसाया कारोबार हो चुका है जिंदगी एक प्रकार से सेटल हो गई इसके लिए उन्होंने बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। जिंदगी के चार दशक कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। अपने व्यवसाय को ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उन्होंने दिन को दिन नहीं समझा और रात को रात।…

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  • Chaitra Navratri
    कविताएँ

    नवरात्रि पर्व (चैत्र) अष्टम दिवस | Chaitra Navratri

    ByAdmin April 9, 2024April 9, 2024

    नवरात्रि पर्व (चैत्र) अष्टम दिवस ( Chaitra Navratri ) भुवाल माता में आस्था सदा मोक्ष गामी है । यह ऐसी है अदभुत जिसका हर पल मूल्यवान है । जिसका हर क्षण आनन्ददायक है । जिसके समय का न प्रभाव है बल्कि समयनुसार आगे मजबूती से प्रवाहित होती रहती है । भुवाल माता में आस्था सदा…

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  • Hindu Nav Varsh
    कविताएँ

    हिंदू नव वर्ष | Kavita Hindu Nav Varsh

    ByAdmin April 9, 2024April 9, 2024

    हिंदू नव वर्ष ( Hindu Nav Varsh )   मोहक पल्लव सुगंधि, पिंगल के अभिनंदन में चैत्र मास शुक्ल प्रतिपदा, अद्भुत अनुपम विशेष । नव सत्संवर अनूप बेला, रज रज आनंद अधिशेष । धरा गगन पुनीत पावन, जनमानस रत साधना वंदन में । मोहक पल्लव सुगंधि, पिंगल के अभिनंदन में ।। प्रकृति अंतर यौवन उभार,…

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