• महिला दिवस – दिकु का सम्मान

    महिला दिवस – दिकु का सम्मान दिकु, तुम केवल नाम नहीं, एक पहचान हो,संघर्ष की राहों में जलती हुई एक मशाल हो।हर कठिनाई को हँसकर अपनाने वाली,त्याग और तप की सजीव मिसाल हो। हर दर्द सहकर भी मुस्कुराने वाली,सपनों को हकीकत में सजाने वाली।अपनी मेहनत से जो लिखे नई कहानी,नारीत्व की सच्ची और सुंदर निशानी।…

  • राह तेरी ओर

    राह तेरी ओर ढूंढ रहा हूँ अब भी वो रास्ता,जिससे तुम तक अपने शब्द पहुँचा सकूं।दिल में जो दर्द दबा रखा है,वो तुम्हारे सामने बता सकूं। कोई एक आशा की किरण मिल जाए,जिससे अपनी मोहब्बत तुम्हें जता सकूं।तेरी यादों के अंधेरे में जो खो गया हूँ,वहां से उजाले में फिर लौट आ सकूं। लौट आओ…

  • दादी की जादुई सीख

    दादी की जादुई सीख दादी ने पोती को गोद में बिठाया,चश्मे से झांककर प्यार से मुस्कुराया“सुनो बिटिया, तीन मंत्र मेरे,जीवन को बनाएंगे रंग-बिरंगे तेरे!”ज़िंदगी में तीन चीज़ें न छोड़ना,हर पल को सुंदरता से जोड़ना। पहला, पहनना सबसे सुंदर वस्त्र,हर दिन लगे जैसे कोई उत्सव मस्त।”चुनरी में तेरी चमकते सितारे हो बुनें,जूतों में बजें जिंगल-जंगल के…

  • होरी गीत (समूह गीत) विभिन्न छंदो में

    (प्रिल्युड)(पुरुष) गोरी तू चटक मटक, लटक मटक, चटक मटक, करती क्युं री? ओये होये क्युं री?(स्त्री) पीया तू समझ सनम, चटक मटक, लटक मटक, करती क्युं मैं? ओये होये क्युं मैं?(पुरुष) तेरा ये बदन अगन, जलन दहन, नयन अगन, लगते क्युं है? ओये होये क्युं है?(स्त्री) मेरे ये नयन बदन, सनम अगन, जलन दहन, जलती…

  • वैवाहिक वर्षगाँठ

    26वीं वैवाहिक वर्षगाँठ राजेन्द्र और स्वाति भाभीजीको खूब- खूब “प्रदीप”की बधाई ।पति पत्नी का बंधन प्रेम की फुलवारी है ।राजेन्द्र और स्वाति भाभीजी का रिश्ता अटूट है ।बारिश की कुछ बूँदें- बूंदे आसमान से उतर,आती हैं जब धरती पर, बारिश की कुछ बूंदे,एक आहट सी होने लगती हैं,इंतजार में खड़ा हो जैसे कोई,प्यार की लगती…

  • आशी प्रतिभा दुबे की कविताएं | Aashi Pratibha Dube Poetry

    मंज़िल है तो मुश्किल भी होगी मंज़िल है तो मुश्किल भी होगी !रास्ते है तो रूकावटे भी होंगी ,अब फर्क नहीं पड़ता कुछ भीहार है तो फिर जीत भी होगीजनाब जिंदगी इसी का नाम हैकभी आंधी है जज्बाती यहां ,तो नम निगाहों से बरसात भी होगी ।आम है ये किस्से मेरे तुम्हारे बहुतआज बिछड़े है…

  • मानव अधिकार

    मानव अधिकार स्वतंत्रता,समता अनेकों अधिकार मिला,मानव को न मानव अधिकार मिला,घर में मतभेद बच्चों -बूढो मेंरिश्ते नातों से बस घाव मिला,कौन लड़ें ,किससे कहें दिल कि बातेंअपनो से न अब वो भाव मिला,किस अधिकारों के लिए लड़ेंजब कहने, सुनने तक का न अधिकार मिला,घर से हो रही राजनीति देश तक जा मिला,हर परिवार को निगलने…

  • माता की सेवा से बड़ा कुछ नहीं

    साथीयों मुझे बहुत ही गहरा एहसास हुआ एक इंसान की मातृ भक्ति को देखकर की कैसे वो अपनी बूढ़ी माँ की सेवा करता है। दोस्तों कुछ करो कितने भी दयालू बनो , दान धर्म करो , परन्तु यदि वो इंसान अपने माता पिता की सेवा या उनका आदर नहीं करता तो वो कभी भी सुखी…

  • तू मेरा आसमान

    तू मेरा आसमान मैं वो चाँद, जिसका तेरे बिन ना कोई आसमां,तेरी बाहों के बिना हर रात लगे बेजुबां।सितारे भी बुझने लगे मेरी तन्हाइयों से,तेरी हँसी के बिना अधूरी है ये दास्तां। बादल भी अब मुझसे सवाल करते हैं,क्यों गुमसुम से रहते है, किसे याद करते हैं?मैं कहूँ क्या उनसे, कौन समझेगा दर्द मेरा,तेरी बिना…

  • पूर्वाग्रह

    मैं सलमान, एक 25 वर्षीय बॉलर हूँ। मेरे परिवार में मेरे माता-पिता और एक छोटा भाई है। मेरे पिता एक व्यवसायी हैं और मेरी माता एक घरेलू महिला है। मैंने अपनी शिक्षा एक स्थानीय कॉलेज से पूरी की और उसके बाद मैंने क्रिकेट में अपना करियर बनाने का फैसला किया। मैंने अपने करियर की शुरुआत…