महिला दिवस – दिकु का सम्मान

महिला दिवस – दिकु का सम्मान

दिकु, तुम केवल नाम नहीं, एक पहचान हो,
संघर्ष की राहों में जलती हुई एक मशाल हो।
हर कठिनाई को हँसकर अपनाने वाली,
त्याग और तप की सजीव मिसाल हो।

हर दर्द सहकर भी मुस्कुराने वाली,
सपनों को हकीकत में सजाने वाली।
अपनी मेहनत से जो लिखे नई कहानी,
नारीत्व की सच्ची और सुंदर निशानी।

आंधियाँ आएं तो पर्वत-सी अडिग रहती हो,
हर हाल में अपने कर्तव्य पर दृढ़ रहती हो।
अपने आत्मसम्मान से कभी न समझौता किया तुम ने,
हर बाधा को साहस से पार किया तुम ने।

दिकु, तुम प्रेम की भावना भी, और शक्ति का प्रमाण हो,
तुम हो वो नारी, जिससे चलता सारा जहान हो।
महिला दिवस पर नमन है तुम्हें,
जो हर दिन, हर पल प्रेरणा बनकर मेरे साथ हो!

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

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