• मैं नदी का शोर हूँ

    मैं नदी का शोर हूँ ( पूर्णिका ) मैं नदी का शोर हूँ मैं हूँ परिंदों का बयान, काट सकते हो अगर तो काट लो मेरी ज़ुबान। मैं अगर मिट्टी महज़ होता दफ़न आसान था।मैं हवा हूँ, रोशनी हूँ छेंक लूंगा आसमान । बिक रहे हैं ख़ुशनुमा नक़्शे खुले बाज़ार मेंखेत में उगता नहीँ हंसता…

  • सुमित मानधना ‘गौरव’ की कविताएं | Sumit Mandhana Poetry

    इस खत को कब से संभाल कर रखा था। आज आपका विश्व पत्र लेखन विषय मिलने के बाद यह खत आपके मंच पर साझा रहा हूँ .. हम सभी के चहेते, कवियों के प्रणेता और बहुत ही सुप्रसिद्ध कवि एवं एक्टर शैलेश लोढ़ा जी की बहुत ही फेमस कविता है, सच-सच बताओ ना यार मिस…

  • डाॅ. ममता सिंह की रचनाएँ | Dr. Mamta Singh Poetry

    भैया घर आई बहन ( दोहा ग़ज़ल ) भैया घर आई बहन, लेकर भाव अपार।राखी बांधी प्यार से, करना तुम स्वीकार।। बहना तुम सुसराल में, कहीं न जाना भूल,बचपन की अठखेलियां, आपस की तकरार।। रेशम का धागा बॅंधा, चमके तिलक ललाट।निर्मल पावन है बहुत, राखी का त्योहार।। भ्रात बहन के प्रेम की, अद्भुत बनी मिसाल।रेशम…

  • जीवन समय

    जीवन समय जीवन का पहिया चलता रहता है,समय का पहिया घूमता रहता है।यूं तो इंसान के पास भी पहिए होते हैं,कभी गाड़ियों में,कभी विचारों में,कभी भाग्य में भी। तुमसे भी तेज़ दौड़ते समय के पैर नहीं होते,पैरों का लेकिन समय होता है। तुमसे छीनते समय, समय के हाथ भी नहीं होते,हाथों का लेकिन… तो, क्यों…

  • दे मॉं सरस्वती ऐसा वरदान

    मेरे को वह हम सबको माँ सरस्वती ऐसा वरदान दे कि हम सबके जीवन में सदैव विद्या के संग विनय का ज्ञान होता रहे । वह माँ सरस्वती मेरे को ऐसा आशीर्वाद प्रदान करती रहना की मैं सदैव अपने लेखन को उत्कृष्टता पर लिख आध्यात्मिक संतुष्टि प्राप्त करता रहूँ। मेरे दिवंगत आध्यात्मिक शिक्षक शासन श्री…

  • समझदारी

    2005 की बात है। रामपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में मुकुल गुरु जी की पोस्टिंग हेड मास्टर के पद पर हुई। मुकुल बच्चों के प्रति बहुत संवेदनशील थे और बच्चों से विशेष लगाव व स्नेह रखते थे। मुकुल जी का व्यवहार बच्चों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण, समझदार और प्रेरक था। वे बच्चों की जरूरतों और समस्याओं…

  • आनंदा आसवले की कविताएं | Ananad Asawle Poetry

    बढ़ना सीखो लिखते लिखते चलना सीखो,चलते चलते बढ़ना सीखो।रुकना मत तूम राहों में अब,हर मुश्किल से लड़ना सीखो।।धृ।। काग़ज़ पे उतरे ख्वाब जो तेरे,उन्हें हकीकत बनाना सीखो।हर गिरने को सीढ़ी समझकर,मंज़िल तक जाना सीखो।।१।। लिखते लिखते चलना सीखो,चलते चलते बढ़ना सीखो….. थोड़ा दर्द, थोड़ा सुख होगा,हर रंग में जीना सीखो।आंधी आए या हो तूफ़ाँ,जैसे दीपक,…

  • निशाना

    तीव्र बुद्धि की सानिया एक गरीब लड़की थी। वह कक्षा 5 में पढ़ती थी। उसको जो भी सिखाओ या पढ़ाओ वह तुरंत सीख जाती थी और याद कर लेती थी। उसकी मैडम संध्या उसको बहुत प्यार करती थी। सानिया के पिता मजदूरी करते थे। पिछले 6 माह से सानिया विद्यालय बेहद कम आने लगी थी…

  • प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी की कविताएं | Prabhat Sanatani Poetry

    वादे पे वादा अब वो वादा तो करती है पर भूल जाती है,अब उसे मैं नहीं कोई और याद आता है।उसकी मुस्कान अब हम पर मुस्कराने लगी है,उसके मुस्कान में अब और कोई नजर आता है।। अब वो बात नहीं रही हमारे और उसके बीच में,जो हमेशा मुझे ही हर पल याद किया करती थी।उसकी…

  • विवाह संस्कार

    विवाह संस्कार सात फेरे लेकर हम दोनों मिले,एक दूसरे के साथ जीवन का संगम बनाएं,और साथ में जीवन की यात्रा पर निकले। विवाह के बंधन में बंधने से ना डरें,एक दूसरे के साथ जीवन की यात्रा पर चलने का वचन दें,और साथ में जीवन की यात्रा पर निकलने का वचन दें। सात फेरे लेकर हम…