सुशील चन्द्र बाजपेयी की कविताएं | Sushil Chandra Bajpai Poetry
आकांक्षा ये भी कर लूं वो भी कर लूं,आकांक्षाएं अनगिन पाली।उधर नियति का क्रूर चक्र है,कोई बजा रहा है ताली। कर्मकाल सब है निश्चित फिर,जो भी करना, लग, कर जाओ।फल तो ऊपर वाला जाने,बस अपना कर्तव्य निभाओ। फिर भी याद रहे बस इतना,दिल ना दुखे किसी का भाई।ऐसा कोई काम करो ना…दिख जाए प्रभु की…
