अम्मा | Amma
अम्मा ( Amma ) देखते ही देखते बाबूजी चल बसे और माँ बूढी से और ज्यादा बूढी हो गयी… आँखे उदास हो गयी पर चेहरे की चमक कम ना हो पायी। अगर आँखों को देखा जाए तो अब भी उसमें ळही प्यार वात्सल्य और अपनापन है जो मै देखता हूँ समझता हूँ पर चाह…
अम्मा ( Amma ) देखते ही देखते बाबूजी चल बसे और माँ बूढी से और ज्यादा बूढी हो गयी… आँखे उदास हो गयी पर चेहरे की चमक कम ना हो पायी। अगर आँखों को देखा जाए तो अब भी उसमें ळही प्यार वात्सल्य और अपनापन है जो मै देखता हूँ समझता हूँ पर चाह…
निर्मल मन के दर्पण में ( Nirmal man ke darpan mein ) पल रहे भाव अनुपम निर्मल मन के दर्पण में। सद्भावों की गंगा बहती प्रेम सुधारस अर्पण से। भाईचारा स्नेह बाटो भरो अनुराग आचरण में। विनय शील आभूषण है रहे नर हरि शरण में। निर्मल मन के दर्पण में मन मंदिर में करुणा…
केतकी का फूल ( Ketaki ka phool ) केतकी के फूल का भी अपना ही एक सफ़र रहा। प्रतिष्ठित रहा जो अपनी ही, शख्सियत के लिए सदा ही। जाना गया,वो माना भी गया हमेशा से बड़ा ही शाही रहा । किस्मत केतकी के फूल की अलग ही कहानी कहती हैं। सुंदर रहा वो अधुभूत…
चल छोड़ दे दारू ( Chal chhod de daru ) चल छोड़ दे दारू जरा तू फोड़ दे बोतल। मत लड़खड़ा प्यारे संभल संभल के चल। करना है नशा तो कर जरा तू स्वाभिमान का। धरती का लाल सपूत अन्नदाता किसान सा। अभिमान का त्याग करके संभाल अपनों को। शुभ कर्म कर संसार में…
तुम्हारे शहर की फिज़ा ( Tumhare shehar ki fiza ) तुम्हारे शहर की अलग फिज़ा हैं प्यार तो जैसे बिका पड़ा है … हैं ये नीलामी अपने ही दिल की , जर्रे जर्रे पर फरेब छुपा पड़ा है … हर कोई राजा है अपने दिल का शतरंज दिल का यहां बिछा हुआ है ……
कहते है मुझको मच्छर ( Kehte hain mujhko machhar ) कहते है मुझको यहां सभी लोग मच्छर, में इंसानों का ख़ून पीता हूं घूम-घूमकर। घूमता रहता हूं में दिन रात और दोपहर, भूख मिटाता हूं में उनका ख़ून-चूसकर।। पुरुष अथवा महिला बच्चें चाहें वो वृद्ध, पीता हूं में रक्त इनका समझकर शहद। चीटी-समान हूं…
अंधी दौड़ ( Andhi daud ) नशा और उन्माद यह सर्द रात कैसा दौर आज नशा और उन्माद संस्कृति का विनाश प्रश्न पूछने पर बड़े बेतुके जवाब चुप रह जाते आप बिगड़ रहा समाज अंधी दौड़ कैसी भागमभाग बेकाबू गाड़ियां बेखौफ सवार अंधकार चहु ओर नीरसता सन्नाटा मौत का तांडव कहीं कोई दिखाता …
खुद्दारी पे आँच आने न पाए! ( Khuddari pe aanch aane na paye ) दीमाग पर अंधेरा जमने न पाए, यादों का मेला ओझल होने न पाए। ख्वाहिशों का कोई अंत नहीं भाई, माता-पिता की हबेली बिकने न पाए। एक जहां है इस जहां के और आगे, उस जहां का धन राख होने न…
कवि/गीतकार गोपालदास नीरज ( Kavi/Geetkar Gopaldas Neeraj ) काव्य लेखक हिन्दी शिक्षक कवि साहित्यकार, फिल्मी इंडस्ट्री में भी बनाये पहचान गीतकार। पद्म-श्री और पद्म-भूषण से अलंकृत हुए आप, दो-दो बार सम्मानित हुए आप भारत सरकार।। काव्य एवं गीत लेखन में बनाई पहचान विशेष, जो चार जनवरी १९२५ को जन्में उत्तर-प्रदेश। फिल्म इंडस्ट्री से फिल्म-फेयर जो…
दिल ना दुखाना किसी का ( Dil na dukhana kisi ka ) हंसी खुशी में रैना बीते सब प्रेम सुधा रस घोलो। छोड़ो सब नफरत की बातें आपस में सब बोलो। आंगन उजियारा होगा कभी मन ना होगा फीका। प्यार के मोती लुटाओ दिल ना दुखाना किसी का। कभी दिल ना दुखाना किसी का…