Khuddari par kavita

खुद्दारी पे आँच आने न पाए | Khuddari par kavita

खुद्दारी पे आँच आने न पाए!

( Khuddari pe aanch aane na paye )

 

दीमाग पर अंधेरा जमने न पाए,
यादों का मेला ओझल होने न पाए।
ख्वाहिशों का कोई अंत नहीं भाई,
माता-पिता की हबेली बिकने न पाए।

एक जहां है इस जहां के और आगे,
उस जहां का धन राख होने न पाए।
अपने हुनर से दो पैसे जरूर कमाओ,
तेरे उसूलों का फूल झरने न पाए।

बनों तो सादे दिल का इंसान बनों,
आज के जमाने की हवा लगने न पाए।
जिन्दगी एक साज है, इसे छेड़ा करो,
तन्हाई की छाया इसे डसने न पाए।

तुम काले हो या गोरे, इसे छोड़ दो,
मन के आईने में सूरत बिगड़ने न पाए।
मत तोड़ो रिश्ता,गिला किससे करोगे?
आँख का तराजू कभी टूटने न पाए।

मत निभाओ तुम अपने जीने की रस्म,
देखो खुद्दारी पे आँच आने न पाए।
वक्त की शाख लचलती है तो लचके,
बदन की सिलवट पे दाग लगने न पाए।

 

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )
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