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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Prem par kavita
    कविताएँ

    प्रिय आ जाना | Prem par kavita

    ByAdmin October 20, 2022October 20, 2022

    प्रिय ! आ जाना ( Priye aa jaana )     यह प्रेम छिपाए ना छिपता जब पास प्रिय ना होती हो दिल दर्द सहे कितना पूछो? अधमरा मरा कर देती हो,           कुछ अजब गजब हरकत मुझमें         तुम यादों में दे जाती हो         फिर प्यार छिपाए कहां छिपे         उल्टा मुझको…

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  • Kavita world war ke muhane par vishwa
    कविताएँ

    वर्ल्ड वार के मुहाने पर विश्व | Kavita world war ke muhane par vishwa

    ByAdmin October 20, 2022October 20, 2022

    वर्ल्ड वार के मुहाने पर विश्व ! ( World war ke muhane par vishwa )   दुनिया को सुलगता देखना चाहता है अमेरिका, खून की नदी भी बहाना चाहता है अमेरिका। भिड़े रहें दुनिया के देश कहीं न कहीं वो युद्ध में, दूर से तमाशा देखना चाहता है अमेरिका। दुश्मन देश की कमर तोड़ने में…

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  • Raabta Poetry
    साहित्यिक गतिविधि

    द साहित्य के खूबसूरत पोर्टल से जुडने पर राब्ता पोइट्री के संस्थापक शिवम झा ने शुभकामनाऐं ज्ञापित की

    ByAdmin October 20, 2022October 20, 2022

    देहरादून की शान डॉ अलका अरोड़ा जी की निज़ामत में राब्ता पोएट्री के मंच पर शायर कमर अंजुम मोहम्मद कृष्ण जी के संग बड़ा धमाका प्रिय रिंकी सोनी जी नलिनी जी शुभ्रा जी को एक साथ जोड़ने का सराहनीय प्रयास हेतु आदरणीय संस्थापक श्रीमान शिवम झा जी को हार्दिक शुभकामनाएं “स्क्वायड टैलेंट मीडिया” (STM) प्राइवेट…

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  • Thanedar par kavita
    कविताएँ

    मैं थानेदार हूँ | Thanedar par kavita

    ByAdmin October 19, 2022October 20, 2022

    मैं थानेदार हूँ! ( Main thanedar hoon )   जो कानून का आँचल फाड़ते हैं, मैं उन्हें फाड़ता हूँ। ऐसे मजनुओं का जुनून मैं, जूतों से कुचलता हूँ। मैं सेवक हूँ आम जनता का, हर जुल्म का प्रहार हूँ, मैं एक थानेदार हूँ।   हर आग से देखो मैं हूँ वाकिफ , जलना मुझे आता…

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  • diwali ki poem
    कविताएँ

    दिवाली की जगमग रात | Diwali ki poem

    ByAdmin October 18, 2022October 20, 2022

    दिवाली की जगमग रात ( Diwali ki jagmag raat )   दीयों की रोशनी में जगमगा रही दिवाली की जगमग रात जहां जहां राम ने चरण रखे हो रही खुशियों की बरसात   अमावस की काली रात भी रोशनी से रोशन हो रही घी के दिए जल रहे हैं घट घट खुशियां हो रही  …

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  • Kavita karma karta chal
    कविताएँ

    कर्म करता चल | Kavita karma karta chal

    ByAdmin October 18, 2022

    कर्म करता चल ( Karma karta chal )     कर्म करता चल बटोही, कर्म करता चल राह में कांटे मिले तो, ध्यान देकर चल।   जिंदगी के इस सफ़र में कष्ट है हर पल फूल भी कांटों में खिलते ये समझ कर चल।   देख कर कांटे कभी भी ना समझ निर्बल दुःख देते…

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  • Poem jaan chidakne lage hain
    कविताएँ

    जान छिड़कने लगे हैं | Poem jaan chidakne lage hain

    ByAdmin October 17, 2022October 17, 2022

    जान छिड़कने लगे हैं ( Jaan chidakne lage hain )   तारे भी देखो ठिठुरने लगे हैं, लोग दुशाले अब ओढ़ने लगे हैं। उतर चुका है वो बाढ़ का पानी, अब से ही जान छिड़कने लगे हैं।   कुछ दिन में लोग माँगेंगे रजाई, ठण्डी के पर देखो उगने लगे हैं। अलाव की तलब बढ़ेगी…

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  • Ghazal bhool ja sitam uske pyar ke
    शेरो-शायरी

    भूल जा सितम उसके प्यार के | Ghazal bhool ja sitam uske pyar ke

    ByAdmin October 17, 2022October 20, 2022

    भूल जा सितम उसके प्यार के ( Bhool ja sitam uske pyar ke )     हाँ मगर अदू  पर अपनी निगाह रखना तू दिल में ही ज़रा बदला बेपनाह रखना तू   सोचना नहीं तू दिल में ही दुश्मनी अपने दोस्ती की  दिल में अपने ही चाह रखना तू   हर तरफ़  से बरसेगी…

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  • A.P.J. Abdul Kalam Kavita
    कविताएँ

    ए०पी०जे०अब्दुल कलाम ( एक घटना ) | A.P.J. Abdul Kalam Kavita

    ByAdmin October 16, 2022October 16, 2022

    ए०पी०जे०अब्दुल कलाम ( एक घटना )  ( A. P. J. Abdul Kalam Kavita  )   कल का जीवन किसने देखा,जो सोचा क्या सब पाई ली है है कठिन-सरल निष्ठुर-मृदुल ,जीवन की बात निराली है जीवन लीला पर चली कलम, लिख दी बातों की बात गजब जिस रूप में जीया जीवन को,रच दी इतिहास हो अब…

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  • Parivar
    कविताएँ

    परिवार | Parivar par kavita

    ByAdmin October 16, 2022November 6, 2022

    परिवार ( Parivar )   चाहे कोई कितना भी हो पास, चाहे तुम हो किसी के कितने भी खास। छोटी-बड़ी बातों को पल में जो भुला दे, वो परिवार ही होता है। टूटने लगे जब हर आस, छूटने लगे जब तन से साँस, फिर भी हर आवाज़ में तुम्हें पुकारे, उस पिता के साये में…

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