प्रिय आ जाना | Prem par kavita
प्रिय ! आ जाना ( Priye aa jaana ) यह प्रेम छिपाए ना छिपता जब पास प्रिय ना होती हो दिल दर्द सहे कितना पूछो? अधमरा मरा कर देती हो, कुछ अजब गजब हरकत मुझमें तुम यादों में दे जाती हो फिर प्यार छिपाए कहां छिपे उल्टा मुझको…
प्रिय ! आ जाना ( Priye aa jaana ) यह प्रेम छिपाए ना छिपता जब पास प्रिय ना होती हो दिल दर्द सहे कितना पूछो? अधमरा मरा कर देती हो, कुछ अजब गजब हरकत मुझमें तुम यादों में दे जाती हो फिर प्यार छिपाए कहां छिपे उल्टा मुझको…
वर्ल्ड वार के मुहाने पर विश्व ! ( World war ke muhane par vishwa ) दुनिया को सुलगता देखना चाहता है अमेरिका, खून की नदी भी बहाना चाहता है अमेरिका। भिड़े रहें दुनिया के देश कहीं न कहीं वो युद्ध में, दूर से तमाशा देखना चाहता है अमेरिका। दुश्मन देश की कमर तोड़ने में…
देहरादून की शान डॉ अलका अरोड़ा जी की निज़ामत में राब्ता पोएट्री के मंच पर शायर कमर अंजुम मोहम्मद कृष्ण जी के संग बड़ा धमाका प्रिय रिंकी सोनी जी नलिनी जी शुभ्रा जी को एक साथ जोड़ने का सराहनीय प्रयास हेतु आदरणीय संस्थापक श्रीमान शिवम झा जी को हार्दिक शुभकामनाएं “स्क्वायड टैलेंट मीडिया” (STM) प्राइवेट…
मैं थानेदार हूँ! ( Main thanedar hoon ) जो कानून का आँचल फाड़ते हैं, मैं उन्हें फाड़ता हूँ। ऐसे मजनुओं का जुनून मैं, जूतों से कुचलता हूँ। मैं सेवक हूँ आम जनता का, हर जुल्म का प्रहार हूँ, मैं एक थानेदार हूँ। हर आग से देखो मैं हूँ वाकिफ , जलना मुझे आता…
दिवाली की जगमग रात ( Diwali ki jagmag raat ) दीयों की रोशनी में जगमगा रही दिवाली की जगमग रात जहां जहां राम ने चरण रखे हो रही खुशियों की बरसात अमावस की काली रात भी रोशनी से रोशन हो रही घी के दिए जल रहे हैं घट घट खुशियां हो रही …
कर्म करता चल ( Karma karta chal ) कर्म करता चल बटोही, कर्म करता चल राह में कांटे मिले तो, ध्यान देकर चल। जिंदगी के इस सफ़र में कष्ट है हर पल फूल भी कांटों में खिलते ये समझ कर चल। देख कर कांटे कभी भी ना समझ निर्बल दुःख देते…
जान छिड़कने लगे हैं ( Jaan chidakne lage hain ) तारे भी देखो ठिठुरने लगे हैं, लोग दुशाले अब ओढ़ने लगे हैं। उतर चुका है वो बाढ़ का पानी, अब से ही जान छिड़कने लगे हैं। कुछ दिन में लोग माँगेंगे रजाई, ठण्डी के पर देखो उगने लगे हैं। अलाव की तलब बढ़ेगी…
भूल जा सितम उसके प्यार के ( Bhool ja sitam uske pyar ke ) हाँ मगर अदू पर अपनी निगाह रखना तू दिल में ही ज़रा बदला बेपनाह रखना तू सोचना नहीं तू दिल में ही दुश्मनी अपने दोस्ती की दिल में अपने ही चाह रखना तू हर तरफ़ से बरसेगी…
ए०पी०जे०अब्दुल कलाम ( एक घटना ) ( A. P. J. Abdul Kalam Kavita ) कल का जीवन किसने देखा,जो सोचा क्या सब पाई ली है है कठिन-सरल निष्ठुर-मृदुल ,जीवन की बात निराली है जीवन लीला पर चली कलम, लिख दी बातों की बात गजब जिस रूप में जीया जीवन को,रच दी इतिहास हो अब…
परिवार ( Parivar ) चाहे कोई कितना भी हो पास, चाहे तुम हो किसी के कितने भी खास। छोटी-बड़ी बातों को पल में जो भुला दे, वो परिवार ही होता है। टूटने लगे जब हर आस, छूटने लगे जब तन से साँस, फिर भी हर आवाज़ में तुम्हें पुकारे, उस पिता के साये में…