आज भी हूँ | Kavita aaj bhi hoon
आज भी हूँ ( Aaj bhi hoon ) मैं मर चुका हूं ये कौन कह रहा है, मैं कल भी कालजयी था आज भी हूं l मेरा जीवन हर कल में स्थिर रहा है , मैं कल भी था असुराधिपति आज भी हूँll रावण है जब तक इस जग में , राम तेरा…
आज भी हूँ ( Aaj bhi hoon ) मैं मर चुका हूं ये कौन कह रहा है, मैं कल भी कालजयी था आज भी हूं l मेरा जीवन हर कल में स्थिर रहा है , मैं कल भी था असुराधिपति आज भी हूँll रावण है जब तक इस जग में , राम तेरा…
अपनों ने ज़ख्मों को रोज कुरेदे है ( Apno ne zakhmon ko roj kurede hai ) किसने दामन के ग़म दर्द समेटे है ! अपनों ने ज़ख्मों को रोज कुरेदे है कैसे ख़ुशबू फैले फ़िर ये उल्फ़त की रूठे फूलों से क्यों यार बगीचे है सबने ज़ख्मों पर रगड़ा रोज नमक…
लक्ष्मण मूर्छित ( lakshman moorchhit ) मेघ समान गर्जना करता हुआ मेघनाथ जब आया। अफरा-तफरी मची कटक में रचता मायावी माया। आया इंद्रजीत रणयोद्धा बाणों पर बाण चले भारी। नागपाश बंधे राम लखन भयभीत हुई सेना सारी। देवलोक से आए नारद जी गरूड़ राज को बुलवाओ। रघुनंदन नागपाश बंधन को प्यारे रामभक्त हटवाओ। महासमर…
कर मुहब्बत का यहाँ छाया ख़ुदा ( Kar muhabbat ka yahan chaya khuda ) मैं पढ़ूं कलमा करुं सज़दा ख़ुदा! जीस्त भर हो ऐसा लम्हा ख़ुदा नफ़रतों की धूप ढ़ल जाये यहाँ कर मुहब्बत का यहाँ छाया ख़ुदा जिंदगी में दोस्त कोई भेज दें हूँ बड़ा ही जीस्त में तन्हा ख़ुदा…
लंका दहन ( Lanka Dahan ) जामवंत ने याद दिलाया हनुमत सब बल बुद्धि समाया। सौ योजन सिंधु कर पारा रामभक्त है बजरंग अवतारा। सीता माता की सुधि लेने जब हनुमान जी धाये। लंका में जा अशोक वाटिका मां सीता दर्शन पाए। मुद्रिका डाली सन्मुख सिया राम नाम गुण गाए। विस्मित माता…
लक्ष्मण मूर्छा शक्ति बाण ( lakshman murcha shakti baan ) आलेख रावण का पुत्र मेघनाथ जिसमें इन्द्र तक को जीत लिया था। वह इंद्रजीत कहलाता था। उसकी पत्नी सुलोचना एक पतिव्रता नारी थी। सतीत्व के बल के कारण उसने तपस्या करके अनेक अमोध शक्तियां प्राप्त कर ली थी। रामादल में मेघनाथ युद्ध करने आया…
मां को शीश नवाते हैं ( Maa ko shish navate hain ) जिस मिट्टी की मूरति को, गढ़ गढ़ हमी बनाते हैं शाम सुबह भूखे प्यासे, उसको शीश झुकाते हैं सजा धजा कर खुद सुंदर, मां का रूप बताते हैं बिन देखे ही बिन जाने, नौ नौ रूप दिखाते है …
जोत जले मां ( Jyot Jale Maa ) सजा दरबार निराला जोत जले मां अंबे ज्वाला। सबके दुखड़े हरने वाली कर सोहे मां चक्र भाला। कालरात्रि तू महागौरी तू कुष्मांडा चामुंडा माता। ढाल खड्ग खप्पर वाली तू ही मां भाग्यविधाता। तू ही काली तू महाकाली रणचंडी दुर्गा मतवाली। दानव दलनी मां जगदंबे यश वैभव…
तितली बन उड़ जाऊं ( Titli ban ud jau ) नीले अंबर खुले आसमां तितली बन उड़ जाऊं। सारी दुनिया घूम के देखूं महकूं और मुस्काउं। डगर डगर गांव-गांव देखूं सारे रंग अलबेले। हौसलों के पंख लगा देखूं दुनिया के मेले। हिम्मत और हौसलों से कुछ करके मैं दिखलाऊं। देखूं दुनिया के…
हृदयांगन साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संस्था (पंजीकृत) मुंबई एक राष्ट्रीय संस्था हैं ।अभी इस संस्था में नये संरक्षक मंडल तथा कार्यकारिणी का चयन हुआ। नवरात्रि के पावन पर्व मे चयन प्रक्रिया में महिलाओं का वर्चस्व रहा। संस्थापक अध्यक्ष श्री विधुभूषण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि संस्था निरन्तर प्रगतिपथ पर बढती जा रही हैं।…