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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Dastan shayari
    शेरो-शायरी

    ये क्या अजब दास्तां बन गई | Dastan shayari

    ByAdmin August 20, 2022August 20, 2022

    ये क्या अजब दास्तां बन गई ( Ye kya ajab dastan ban gayi )   ये क्या अजब दास्तान बन गई , खव्वाहिशे उसकी मेरे अरमान बन गई I   जिन राहो से गुजर गये वो कभी , वो मेरी मंजिलों की निशान बन गई I   दर्द के आगोश में तमन्नाओ की शाम ,…

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  • Muskurahat Shayari
    शेरो-शायरी

    वो मुझे देखकर मुस्कुराते रहे | Muskurahat Shayari

    ByAdmin August 20, 2022August 20, 2022

    वो मुझे देखकर मुस्कुराते रहे ( Wo mujhe dekh kar muskurate rahe ) वज़न: फाइलुन फाइलुन फाइलुन फाइलुन     इश्क बनके वो दिल में समाते रहे वो मुझे देखकर मुस्कुराते रहे   अक्स बनके वो आंखों में आते रहे रात भर मेरी नींदें उड़ाते रहे   एक पल के लिए उनको भूला नहीं सांस…

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  • Kavita itishree
    कविताएँ

    इतिश्री | Kavita itishree

    ByAdmin August 20, 2022

    इतिश्री ( Itishree )   धीरे धीरे खत्म हो रहा, प्यार का मीठा झरना। उष्ण हो रही मरूभूमि सा दिल का मेरा कोना।   प्रीत के पतवारो ने छोडा,प्रेम मिलन का रोना। अब ना दिल में हलचल करता,मिलना और बिछडना।   पत्थर सी आँखे बन बैठी, प्रीत ने खाया धोखा। याद तो आती है उसकी…

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  • Antardwand kavita
    कविताएँ

    अन्तर्द्वन्द्व | Antardwand Kavita

    ByAdmin August 20, 2022March 27, 2023

    अन्तर्द्वन्द्व ( Antardwand )   मन जब अन्तर्द्वन्द से घिर जाये, तब हार न जायें जीवन में। हार न जायें जीवन में। कोयल सी वाणी जब कौए की भाँति कानों को चुभ जाये, हृदय की विदीर्णता पर जब कोई लेप न लगाये। टूटती आस जब बचाने को कोई हाथ पंख ना बन पाये, सफलता की…

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  • Shayari on ghum
    शेरो-शायरी

    नहीं ग़म में कभी शामिल रहा है | Shayari on ghum

    ByAdmin August 20, 2022

    नहीं ग़म में कभी शामिल रहा है  ( Nahin gam mein kabhi shamil raha hai )     नहीं ग़म में कभी शामिल रहा है ? ख़ुशी का वो मेरी क़ातिल रहा है   कभी भी पेश उल्फ़त से न आया हमेशा यूं बड़ा जाहिल रहा है   ख़ुशी का हो भला अहसास कैसे ग़मों…

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  • Mera swabhiman hai yah
    कविताएँ

    मेरा स्वाभिमान है यह | Mera swabhiman | Kavita

    ByAdmin August 19, 2022August 20, 2022

    मेरा स्वाभिमान है यह ( Mera swabhiman hai yah )   मैं गिरकर उठने का हुनर अब जान गई हूं किंलिष्ट प्रकृति का आवरण पहचान गई हूं तीन लोको की करती हुई आज अगुवाई जीवन -मृत्यु का मैं ही निरन्तर सेतु बनी   जिंदगी बढ़ाती हूँ मुकाम के अन्वेष पर संभालें रखती हूँ सृष्टि के…

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  • Krishna bhakti gaan
    कविताएँ

    कृष्ण भक्तिगान | Krishna Bhakti Gaan

    ByAdmin August 19, 2022August 19, 2022

    कृष्ण भक्तिगान ( Krishna bhakti gaan )   कृष्ण तुलसी माला लेके कान्हा मैं तेरा इंतज़ार करती प्रभातवेला की घंटी बजने पे कान्हा मेरा मन उछलता रहा   वृन्दावन की एक एक धूली तेरी गाथाएं सुनाती रही यमुना नदी की छोटी लहरें भी तेरी लीलाएं बखान करती रही   तेरी निकटता पाने को तरसती निकुंजों…

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  • Krishna kanhaiya geet
    कविताएँ

    कृष्ण कन्हैया | Krishna kanhaiya geet

    ByAdmin August 19, 2022

    कृष्ण कन्हैया ( Krishna kanhaiya )   आ जाना, आ जाना, आ जाना घनश्याम, आज तुम आ जाना। माता यशोदा लाड लडाये, ग्वाल बाल सब माखन लाये। नटखट कान्हा मटकी फोड़, माखन मिश्री खा जाना‌ आ जाना आ जाना   सजा धजा वृंदावन सारा, गोकुल मथुरा जमुना किनारा। द्वारका का नाथ हमारा, सारी दुनिया का…

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  • Janmashtami ke geet
    कविताएँ

    श्याम की बांसुरी मुझे पुकारे | Janmashtami ke geet

    ByAdmin August 18, 2022

    श्याम की बांसुरी मुझे पुकारे ( Shyam ki bansuri mujhe pukare )   धूम मची जमुना किनारे, श्याम की बांसुरी मुझे पुकारे। राधा के घनश्याम प्यारे, मीरा के प्रिय मोहन दुलारे। जय गोविंदा जय गोविंदा -2   केशव माधव नटवर नागर, अधरो पे मुरली साजे। रुनक झुनक बाजे पैजनिया, मोहक धुन बंसी बाजे। गोवर्धनधारी की…

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  • Badiya si ghazal
    शेरो-शायरी

    कौन रक्खे प्यार अपने के लिए | Badiya si ghazal

    ByAdmin August 18, 2022

    कौन रक्खे प्यार अपने के लिए  ( Kaun rakhe yaar apne ke liye )     कौन रक्खे प्यार अपने  के लिए ! लड़ रहे है लोग पैसे के लिए   दिल भरा है ख़ूब लालच से यहाँ कौन लड़ता देखो रिश्तें के लिए   और तू तैय्यार मिलनें को नहीं शहर से आया हूँ…

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