• तुम वर्तमान

    तुम वर्तमान तुम वर्तमान के पृष्ठों पर ,पढ़ लो जीवन का समाचार ।क्या पता कौन से द्वारे से ,आ जाये घर में अंधकार।। आशा की किरणें लौट गयीं ,बैठी हैं रूठी इच्छायेंप्रात: से आकर पसर गईं ,आँगन में कितनी संध्यायेंइन हानि लाभ की ऋतुओं में, तुम रहो सदा ही होशियार ।।तुम वर्तमान—– चल पड़ो श्रमिक…

  • हमको कभी

    हमको कभी हमको कभी ख़ुशियों का भी मंज़र नहीं मिलतादिल को मिले सुकूँ वो मुकद्दर नहीं मिलता शिद्दत से जो चाहे वही दिलबर नहीं मिलताजो ज़ख़्म मेरे सी दे रफ़ूगर नहीं मिलता रहने को ग़रीबों को कभी घर नहीं मिलतादे दे उन्हें जो छाँव वो छप्पर नहीं मिलता जो राह दिखाते थे सदा ज़ीस्त में…

  • बच्छराज काकासा के हीरक जयन्ती वर्ष

    बच्छराज काकासा के हीरक जयन्ती वर्ष नई भोर नव ऊर्जा आनंदनव प्रभात के हम अभिलाषी है।सूरज की पहली किरण संग ! काकासाउजास ! आरोग्य !आनंद और विकास !हो वर्धमान ,रहे प्रकाशमान ! काकासाआपके जीवन के हर पल में संग !बच्छराज काकासा का20 जनवरी को जबजन्मदिन आता है तोहमको यह बात बताता है किहम सदैव फूलों…

  • एक बूढ़ा और बच्चा – “हाथों का सहारा”

    भाग एक – गांव के छोर पर स्थित एक पुराना घर, जहां बूढ़े दादा जी अपने प्यारे पोते के साथ रहते थे। उम्र के प्रभाव से दादा जी की याददाश्त कमजोर हो चुकी थी और शरीर भी थकान से झुकने लगा था। कभी खाना गिरा देते, तो कभी हाथ कांपते हुए पानी छलका देते। इन…

  • नशे से हुआ इंसान बर्बाद

    नशे से हुआ इंसान बर्बाद उड़ता युवा नशा मुक्त समाज की ओर बढ़ते कदम,एक सपना है जो सच होने की उम्मीद है।।नशे की जंजीरों से मुक्त होकर,हम एक नए युग की ओर बढ़ सकते हैं। नशा मुक्त समाज में हर कोई होगा स्वस्थ,हर कोई होगा खुशहाल, हर कोई होगा समृद्ध।नशे की लत से मुक्त होकर,हम…

  • रंग दे बसंती चोला

    रंग दे बसंती चोला रंग दे बसंती चोला,मेरे देश की धरती को,रंग दे बसंती चोला। तेरी खुशबू से महके,मेरे देश की हवा को,तेरी खुशबू से महके। तेरे रंग से रंगे,मेरे देश की धरती को,तेरे रंग से रंगे। तेरी खुशियों से खिले,मेरे देश की फसलें को,तेरी खुशियों से खिले। तेरे प्यार से प्यारे,मेरे देश के लोगों…

  • कलाम है क्या

    कलाम है क्या ये गोल मोल मुहब्बत भरा कलाम है क्यातमाम उम्र यहीं पर तेरा क़याम है क्या कबूल कैसे मैं कर लूँ बता तेरी शर्तेंबिना ये जाने तुझे लेना मुझसे काम है क्या जो बार बार मुझे हुक्म देता रहता हैसमझ लिया मुझे तूने बता गुलाम है क्या जो हर घड़ी चला आता है…

  • मौजू सुहाने आ गये

    मौजू सुहाने आ गये वो बहाने से हमें हर दिन बुलाने आ गयेशायरी के वास्ते मौजू सुहाने आ गये इस कदर डूबे हुए हैं वो हमारे प्यार मेंउनकी ग़ज़लों में हमारे ही फ़साने आ गये अनसुनी कर दी जो हमने आज उनकी बात कोहोश इक झटके में ही उनके ठिकाने आ गये उस घड़ी हमको…

  • जरूरी काम

    मेरी बेटी 12 वर्षीय चुनमुन कक्षा 6 में पढ़ती है। उसमें एक गंदी आदत है कि वह एक बार में किसी काम को नहीं सुनती। ऐसा भी नहीं है कि उसे कम सुनाई देता है, बल्कि ऐसा वह जानबूझकर करती है। गुस्सा करो, तो कहती है- “मम्मी, आप इतना क्यों चिल्ला रही हो? मैं आ…

  • तुम जो ज़ाहिर अगर ज़रा होते

    तुम जो ज़ाहिर अगर ज़रा होते तुम जो ज़ाहिर अगर ज़रा होतेआने वालों का रास्ता होते ग़र दुबारा ये राब्ता होताकुछ न होते तो हमनवा होते ख़ुद को कितना निहारते हैं वोकाश हम यार आइना होते आप हम हैं तभी न सब कुछ हैहम न होते तो क्या ख़ुदा होते रोते रोते यही कहा उसनेख़ैर…