• राम के ही जाप से

    राम के ही जाप से है अवध बलिहारी, पधारे है धनुर्धारी,दूर है अब अयोध्या, वियोग के शाप से, राम हैं पधारे जब, धन्य हुआ जग सब,गूँज उठा जयकारा, नगाड़े के थाप से, मान और नाम मिला, फूल सा जीवन खिला,भाग्य मेरे खुल गए, राम के ही जाप से। कर जोर भजूं राम, पावन तुम्हारा नाम,करना…

  • कागा काव्य किरन | Kaga Kavya Kiran

    मज़दूर दिस एक मई मज़दूर दिवस मोज मस्ती से मनायें,अपना भविष्य मज़दूर दिवस शानो शोक्त से मनाये। करते ख़ून पसीने की कमाई हाढ़ तोड़ ह़लाल,तपती धूप दुपहरी में अपनी अच्छी बस्ती बनायें। सर्दी में ठिठुर अलाव पर हाथ पैर तपाते,तन बदन पर पहने फट्टे चीत्थड़े हस्ती बनायें। धूल भरी चलती आंधियां सरपट लू के थपेड़े,बरसे…

  • सुभाष चंद्र बोस : Poem on Subhash Chandra Bose

    सुभाष चंद्र बोस शायद सदियों में होती हैंपूरी एक तलाश,शायद विश्वासों को होतातब जाकर विश्वास। शायद होते आज वो जिंदाभारत यूं ना होता,शायद दुश्मन फूट-फूट करखून के आँसू रोता। आजादी की भेंट चढ़ गयेहुआ अमर बलिदान,श्रद्धा पूर्वक नमन आपकोहे वीरों की शान। मोल असल इस आजादी कीआपने हीं समझाया,दिया जवाब हर इक ईंटों कापत्थर बन…

  • भारत कहलाता है

    भारत कहलाता है धर्म-जात का भेद भुलाके , नागरिक हाथ मिलाता है, मुस्लिम-हिन्दू-सिख-इसाई का कोई नहीं कहलाता है । सभी जन को सिर्फ भारतवादी कहा जाता है, ऐसा किस्सा जनाब सिर्फ मेरे भारत में देखा जाता है। जहां अत्यंत हुबियाली से गणतंत्रता-स्वतंत्रता को मनाया जाता है, 21 तोपों की सलामी देकर भारतीय तिरंगा लहराया जाता…

  • क्या हुआ कैसे हुआ कितना हुआ

    क्या हुआ कैसे हुआ क्या हुआ कैसे हुआ कितना हुआजो हुआ वो था नहीं सोचा हुआ फिर से रस्ते पर निकल आए हैं लोगफिर से देखा वो ही सब देखा हूआ दर्द तन्हाई अंधेरा सब तो हैंमैं अकेला तो नहीं बैठा हुआ उड़ गयी उल्फ़त किसी दीवार सेधूप में धुंधला गया लिख्खा हुआ इक रियासत…

  • अलौकिक भारत भूमि

    अलौकिक भारत भूमि ज्ञान विज्ञान का पोषक रहा भारत ,ज्योतिषी ज्ञान,जग को वेद दिया ।शुश्रुत ने दी शल्य चिकित्सा वही,चरक,धनवंतरी ने आयुर्वेद दिया।। वराहमिहिर,ब्रह्मगुप्त,बौधयान और,कणाद,भास्कराचार्य विज्ञ यही हुए।जहाँ आर्यभट्ट ने जग को शून्य दिया,तो योग पतंजलि से लोग नीरोग हुए।। विदुषी, मनीषियों से भरा देश मेरा,कला साहित्य में सदा समृद्ध रहा।कालिदास,कबीरा ,तुलसी,जायसी ,सूर,मीरा,रत्नाकर कर वद्ध…

  • गणतंत्र दिवस

    एक छोटे से गाँव में एक छोटा लड़का रहता था, जिसका नाम रोहन था। गणतंत्र दिवस नजदीक था। रोहन की बड़ी बहन मोनी गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति गीत सुनाने की घर पर तैयारी कर रही थी। रोहन को बार बार गणतंत्र दिवस का नाम सुनने को मिल रहा था। वह समझ नहीं पा…

  • लता सेन की कविताएं | Lata Sen Hindi Poetry

    हरियाली प्रकृति का श्रृंगार प्रकृति का श्रृंगार हरियालीजीवन का आधार हरियाली देखो धरती की बदली है कायाप्रकृति ने ओढ़ी हरि चुनरियानजारों ने आंखों को लुभायामहक उठे फुल चारों ओर छाई हरियाली ।प्रकृति का श्रृंगार हरियालीजीवन का आधार हरियाली ……. देख इस सब हैं हर्षातेमन ही मन है मुस्कातेनहीं करती यह भेदभावसबको करती उल्लासित हरियाली।प्रकृति का…

  • किधर जाता है

    किधर जाता है राह-ए-उल्फ़त से परेशान, किधर जाता हैअपनी मंज़िल से भी अनजान किधर जाता है झूठ से हार के नादान किधर जाता हैमार के अपना तू ईमान किधर जाता है बिक रहा हूँ सरे बाज़ार तेरी शर्तो परदे के मुझको तू ये नुक़सान किधर जाता है तेरी यादों का उठा था जो मेरे सीने…

  • मां की आँखों के हम भी तारे हैं

    मां की आँखों के हम भी तारे हैं मां की आँखों के हम भी तारे हैंमेरे जैसे ज़मीं पे सारे हैं। इक नदी सी है ज़िन्दगी यारोसुख के मिलतें नहीं किनारे हैं देखता आजकल जिधर मुड़करहर तरफ़ ग़म के आज मारे हैं हम ख़ुशी की तलाश में अब तकग़म के मारे थे ग़म के मारे…