आइना जिन्दगी का
आइना जिन्दगी का ना पैसों का गुरुर , ना बोले रुदबा lआप अगर नेकी है , तो नेकी क्या है ll ख़ुशियों का आंचल बनकर , उल्लास को छापा है lदिनचर्या की चाह बनकर , जीना सिखाया है ll चमक सूर्य – चंद्र के सम , दया प्रभु के सम lदिया नाम और शहोरत ,…
आइना जिन्दगी का ना पैसों का गुरुर , ना बोले रुदबा lआप अगर नेकी है , तो नेकी क्या है ll ख़ुशियों का आंचल बनकर , उल्लास को छापा है lदिनचर्या की चाह बनकर , जीना सिखाया है ll चमक सूर्य – चंद्र के सम , दया प्रभु के सम lदिया नाम और शहोरत ,…
जग गोकुल में आनंद भयों देते सब बधाई जग गोकुल में आनंद भयों देते सब बधाई,सारी सृष्टि में सब खुश हैं बहना क्या भाई। काली-काली रात में कान्हा गोकुल आएं,गोकुल में नन्दलाल यशोदा के मन भाए,आने से कान्हा के दूर हुई सबकी तन्हाई। निराला रूप सब जन के मन को भाया,सब खुशियों को कान्हा अपने…
मन की पीड़ा मन की पीड़ा से जब कांपीं उंगली तो ये शब्द निचोड़ेअक्षर-अक्षर दर्द भरा हो तो प्रस्फुटन कहाँ पर होगा अभिशापों के शब्दबाण लेकर दुर्वासा खड़े हुए हैंकैसे कह दूँ शकुन्तला का फ़िर अनुकरण कहाँ पर होगा नया रूप धर धोबी आए मन में मैल आज भी उनकेईश्वर ही जाने सीता का नव…
मानवीय संवेदना ख़त्म हो गई! हे ईश्वर ! आज तेरे मनुष्यों में,दयाभाव एवं मनुष्यता न रही।एक दूसरे के प्रति इन मनुष्यों में,बस! घृणा व शत्रुता समा रही है।मानवीय संवेदना ख़त्म हो गई!हैवानियत, हिंसा खूब बढ़ रही है।पति पत्नी की हत्या कर रहा है।आजकल मनुष्य पशु समान है।चंद पैसे हेतु हत्याएँ भी होती हैं।आज मनुष्य का,…
क़लम की ताकत मेरी क़लम है मेरी जुबां,जिससे कहती हूँ हर दास्तां।हर दर्द, हर खुशी के रंग,इसी से रचती हूँ मैं जीवन के ढंग। यह स्याही नहीं, यह भावना है,जो दिल से निकल, कागज पर थामना है।हर अक्षर में बसती है एक सदी,यह कलम तो मेरे सपनों की नदी। कभी चुप रहकर चीखती है,अन्याय पर…
बीते हुए वर्षसादर प्रणाम तुम्हे पत्र लिखने का कारण की, तुम आयें और चले भी गयें और हमे तुम्हारे आने और जाने का एहसास और आत्मनुभव नही हो पाया , तुम्हारा आना एसे ही था जैसे इस वर्ष का आना रहा और जाना भी उसी तरह रहा जैसे पिछले वर्ष का जाना रहा बस थोड़ा-बहुत…
हमारे कण – कण में व्याप्त आम बोलचाल की भाषा हिंदी है । हिंदी भाषा के द्वारा स्वाध्याय, लेखन आदि का सही से ज्ञान होता है । पुराने समय में वह अभी प्रचलित भाषा में एक हिंदी है । मन के भाव व्यक्त करने का माध्यम की भाषा हिंदी है । साहित्यिक रस धार की…
नेह शब्द नहीप्रसंग का विषय नहीयह दृष्टिगोचर नही होतायह कहा भी नही जातायह सिर्फ और सिर्फअनुभूत करने का माध्यम हैयह अन्तरतम मेंउठा ज्वार हैनितान्त गहराजिसमें केवल समाहित होना हैउसके बाद फिर होश ही कहाँ रहता हैयह एक ऐसा आल्हाद हैजिसको शब्दातीत, वर्णातीतनही किया जा सकता।यह शब्दों के बंधनों में नहीं बंधतासिर्फ अनुभूत किया जा सकता…
छत पर चाँद बुलाने से अच्छा छत पर चाँद बुलाने से अच्छा,उसपर टहला जाए तो अच्छा, मिलता ना कोई इन्सां से इन्सां,खुद से मिलन हो जाए तो अच्छा, होती है अब ना कोई खातिरदारी,कोई मन ही सहला जाए तो अच्छा, होता ना हमसे चहरे पे लेपन,सेहत सम्हाली जाए तो अच्छा, इस जग में कितनी है…
मुहब्बत के झूठे रिवाजों से पूछो मुहब्बत के झूठे रिवाजों से पूछोवफ़ा चाहतों के फ़सानों से पूछो यहाँ बंद सारे मकानों से पूछोगिरी गाज जिन उन किसानों से पूछो छुपा कौन दिल के खयालों में मेरेउन्हीं के सुनों तुम इशारों से पूछो रुलाया यहाँ कौन है चालकों कोयहां पे खड़े मेज़बानों से पूछो वफ़ा का…