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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • कागज की कश्ती
    कविताएँ

    Kavita Kagaz ki Kashti | कागज की कश्ती

    ByAdmin April 17, 2021February 9, 2023

    कागज की कश्ती ( Kagaz ki kashti )   कागज की कश्ती होती नन्हे  हाथों  में  पतवार कौन दिशा में जाना हमको जाने वो करतार आस्था विश्वास मन में जाना  है  उस  पार बालपन का भोलापन क्या जाने संसार   भाव भरी उमंगे बहती नन्हे  बाल  हृदय  में चंचल मन हिलोरे लेता बालक के तन…

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  • ग्लोबल वार्मिंग
    निबंध

    Global warming par nibandh | ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध

    ByAdmin April 17, 2021December 7, 2022

    निबंध : ग्लोबल वार्मिंग ( Global Warming : Essay In Hindi ) मानव ही नही संपूर्ण भूमंडल के ऊपर वर्तमान में जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है। जलवायु परिवर्तन एक ऐसी समस्या है जो पर्यावरण से संबंधित सभी समस्याओं का मूल स्रोत है। ग्लोबल वार्मिंग (भूमंडलीय तपन) वास्तव में 18 वीं सदी की औधोगिक…

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  • Wah re zindagi
    कविताएँ

    Kavita | वाह रे जिन्दगी

    ByAdmin April 17, 2021April 17, 2021

    वाह रे जिन्दगी ( Wah re zindagi )   भरोसा तेरा एक पल का नही, और नखरे है, मौत से ज्यादा।   जितना मैं चाहता, उतना ही दूर तू जाता, लम्हां लम्हां खत्म होकर तू खडा मुस्कुराता। वाह रे जिन्दगी…. भरोसा तेरा एक पल का नही, और नखरे हैं मौत से ज्यादा। बाँध कर सांसों…

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  • आधुनिकता
    कविताएँ

    आधुनिकता | Aadhunikta

    ByAdmin April 17, 2021June 7, 2023

    आधुनिकता ( Aadhunikta )   चाँद की हो गई, दुनिया दीवानी । तारों में बसने लगे, शहरे हमारी ।। ख्वाहिश  पूरी  हुई , इंसानो  की । दुनिया छोड़ दी,घर बनाने के लिए ।।   जल हो गई, प्रदूषित भारी । ज़हर  बन  गई, प्राणवायु ।। जिए  तो  जिए कैसे इंसान । नरक बन गई, धरती…

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  • गुनाह
    कविताएँ

    Kavita | गुनाह

    ByAdmin April 17, 2021

    गुनाह ( Gunaah )   सद्भावों की पावन गंगा सबके   मन  को भाए वाणी के तीखे बाणों से कोई घायल ना हो जाए   प्रेम के मोती रहा लुटाता खता   यही    संसार  में कदम बढ़ाता फूंक फूंक कर कहीं  गुनाह  ना  हो जाए   कोई अपना रूठ ना जाए रिश्तो   के   बाजार   में घूम…

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  • दबे हुए अरमान
    कविताएँ

    Kavita | दबे हुए अरमान

    ByAdmin April 16, 2021

    दबे हुए अरमान ( Dabe hue armaan )   हर बार देख कर तुमकों क्यों,अरमान मचल जाते है। तब  भाव  मेरे  आँखों  मे आ, जज्बात मचल जाते है।   मन  कितना भी बाँधू लेकिन, मनभाव उभर जाते है, दिल की धडकन बढ जाती है,एहसास मचल जाते है।   क्या ये मेरा पागलपन है, या तेरे…

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  • संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान
    कविताएँ

    संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान | Kavita Sambhal ja re

    ByAdmin April 16, 2021January 26, 2023

    संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान   संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान   गाइडलाइन जारी कर दी दिल्ली बड़ा-बड़ा फरमान संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान 2   मुंह पर मास्क दो गज दूरी बचा लेगी तेरी ज्यान संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान 2   संकट रो खोटो टाइम है सोच समझ…

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  • Corona par Kavita | दबंग कोरोना
    कविताएँ

    Corona par Kavita | दबंग कोरोना

    ByAdmin April 16, 2021February 9, 2023

    दबंग कोरोना ( Dabang Corona )   ये हाल है और पूछते हैं कि क्या हाल है? अरे यह कोरोना है दबंग हैं सब इससे तंग है। धर लेता तो नहीं देखता धनी निर्धन सरकारों की भी परीक्षा लेता है देखो वह झूठ कितना बोलता है उनकी पोल पट्टी सब खोलता है अफसरों की हनक…

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  • कहां मुश्किल
    शेरो-शायरी

    Ghazal | कहां मुश्किल अगर वो साथ में करतार आ जाए

    ByAdmin April 16, 2021April 17, 2021

    कहां मुश्किल अगर वो साथ में करतार आ जाए ( Kahan Mushkil Agar Wo Sath Mein Kartar Aa Jaye )   कहां मुश्किल अगर वो साथ में करतार आ जाए। लगे  कश्ती  किनारे  हाथ  ग़र पतवार आ जाए।।   निभाना होता है मुश्किल ये जीवन साथ में यारो। दिलों के बीच में जब भी कोई…

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  • इस भीड़ की सच्चाई ( व्यंग्य )
    व्यंग्य

    Vyang | इस भीड़ की सच्चाई ( व्यंग्य )

    ByAdmin April 15, 2021

    इस भीड़ की सच्चाई ( व्यंग्य ) ( Is bheed ki sachai : Vyang )   ये कोरोना फैला नहीं रहे हैं भगा रहे हैं, देश को गंभीर बीमारी से बचा रहे हैं। देखते नहीं सब कितना जयघोष कर रहे हैं? समझो कोरोना को ही बेहोश कर रहे हैं? अजी आप लोग समझते देर से…

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