ये कोरोना फैला नहीं रहे हैं
भगा रहे हैं,
देश को गंभीर बीमारी से बचा रहे हैं।
देखते नहीं
सब कितना जयघोष कर रहे हैं?
समझो कोरोना को ही बेहोश कर रहे हैं?
अजी आप लोग समझते देर से हैं,
हम तो यही कब से कह रहे हैं?
उनकी बात कुछ और थी
जो छुपकर फैला रहे थे
अपने को निर्दोष बता रहे थे।
बाद में हाईकोर्ट ने भी बरी किया,
जाने उन पर क्या क्या इल्जाम लग रहे थे?
लेकिन ये तो इंतहा है
लाखों की भीड़ एक साथ इकट्ठी हुई है
कोरोना एस.ओ.पी के विरुद्ध
फिर भी इन्हें कोई कुछ नहीं कह रहा,
यहां सरकार भी है गई गूंगी बहरी,
अंधेरे में तीर कचृआ
कभी कुछ कभी कुछ कह रही।
यही हाल रहा तो
चपेट में सब आएंगे
कब तलक आंखें बंद कर
सच्चाई छुपाएंगे?
राजाजी आंखें खोलिए!
अब भी वक्त है
व्यवस्थाओं को तोलिए,
वरना सब पछताएंगे,
ढ़ूंढ़ने से भी नजर नहीं आएंगे।
महारानी लक्ष्मी बाई ( Maharani Laxmi Bai ) आजादी की चिंगारी थी बैरियों पर भारी थी गोरों के छक्के छुड़ाए लक्ष्मी वीर नारी थी तेज था तलवारों में ओज भरा हूंकारों में रणचंडी पराक्रमी हजारों पर भारी थी क्रांति काल की कहानी वो झांसी की महारानी बिगुल बजाया रण का राष्ट्र पुजारी…
दूरस्थ दर्शन ( Doorasth darshan ) दूरदर्शन वालों ने हमें दिखने का हक नही दिया केवल देखने का हक दिया है। उन्हे रंगीन देखने के लिये हमें सात हजार रूपये खर्च करना पडे । हमारी भी इच्छा है कि हमारे घर वाले और मोहल्ले वाले हमें मूर्ख डिब्बे में देखे। आंचलिक आम आदमी, आंचलिक…
प्रभु वंदना ( Prabhu Vandana ) ( मनहरण घनाक्षरी छंद 8,8,8,7 वर्ण ) दीनबंधु दीनानाथ सबका प्रभु दो साथ संकट हर लो सारे विपदा निवारिये रण में पधारो आप जनता करती जाप सारथी बन पार्थ के विजय दिलाइये मन में साहस भर हौसला बुलंद कर जन-जन मनोभाव सशक्त बनाइये मुरली की…
जल ही जल ( Jal hi jal ) जल की ना पूछो भैया। आजकल तो बहुत जला रहा है। मर कर जलना तो सुना थाl या यूं कह लो जल कर मरना, मगर यह जल तो ह्रदय जला रहा है l और जब ह्रदय जलता है l तो चूल्हा जलने का सवाल नहीं उठता l…
कोरोना काल का पक्ष एक और! ( Corona Kal Ka Pach Ek Or ) जरा सोचें समझें कैसा है यह दौर? भविष्य हमारा किधर जा रहा है? देखो कोई चांद पर मंगल पर बस्तियां- बसा रहा है! उधर हम देख सोच भी नहीं पा रहे हैं हम अनजाने डर से डरे जा रहे हैं…
रिश्ता प्यार का जोड़ना चाहता हूँ ( Rishta Pyar Ka Jodna Chahta Hoon ) रिश्ता प्यार का जोड़ना चाहता हूँ! दीवारें नफ़रतें तोड़ना चाहता हूँ मिली है किसी दर से ही बेदिली है अब यें शहर मैं छोड़ना चाहता हूँ ख़फ़ा होते है लोग मुझसे यहां कुछ यहां सच जब भी बोलना…