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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • सबके प्यारे मनमोहन
    कविताएँ

    सबके प्यारे मनमोहन

    ByAdmin December 27, 2024December 27, 2024

    सबके प्यारे मनमोहन भारत को चमकाने वाले,सच्ची राह दिखाने वाले,नस -नस में ईमा को भरकर,मुश्किल से टकराने वाले. करता दिल से खूब नमन, सबके प्यारे मनमोहन,करता दिल से खूब नमन, सबके प्यारे मनमोहन. माता अमृत, पिता गुरूमुख, जन्मे गाह पंजाब में,मगर आग में बंटवारे की, आ गये भारत छाँव में. बी. ए, एम. ए किया…

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  • मुझे गहराई का चस्का लगा था
    ग़ज़ल

    मुझे गहराई का चस्का लगा था

    ByAdmin December 27, 2024December 27, 2024

    मुझे गहराई का चस्का लगा था मुझे गहराई का चस्का लगा थातभी इक झील में डूबा हुआ था हक़ीक़त का मज़ा अपना मज़ा हैमुहब्बत का नशा अपना नशा था हुई जब गुफ़्तुगू ऐसे खुला वोकोई मोती जो सीपी में छिपा था तुम्हारा दिल महक कैसे रहा हैतुम्हारा दिल तो पत्थर का सुना था बता देता…

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  • वो घास हैं
    कविताएँ

    वो घास हैं

    ByAdmin December 26, 2024December 26, 2024

    वो घास हैं पाश हो या सफदर हाशमीया हो फिर भगत सिंहइन तीन नाम में छिपे हैं कई और नामडराया गयाधमकाया गयामारा गयाकोशिश की गई उनके विचारों को मिटाने कीक्या फिर भी मिट पाए ये नाम?क्या नेस्तनाबूद हुए उनके विचार ? वो तो घास हैंहर बार उग आते हैं कहीं ना कहींजो जगह कर दी…

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  • बाल काव्य-सम्मेलन
    साहित्यिक गतिविधि

    वीर बाल-दिवस पर बाल काव्य-सम्मेलन आयोजित

    ByAdmin December 26, 2024December 26, 2024

    एक दर्जन देशों के‌ पंद्रह कवियों नें किया बाल काव्य-पाठ नारनौल। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा द्वारा वीर बाल-दिवस के उपलक्ष्य में वर्चुअल अंतरराष्ट्रीय बाल काव्य-सम्मेलन का आयोजन आज किया गया, जिसमें एक दर्जन देशों के पंद्रह कवियों ने बालकाव्य-पाठ किया। डॉ. कांता भारती द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना-गीत के उपरांत प्रगीत कुंअर के कुशल संचालन और…

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  • समझते ही नहीं
    ग़ज़ल

    समझते ही नहीं | Samajhte hi Nahi

    ByAdmin December 26, 2024December 26, 2024

    समझते ही नहीं वो मुहब्बत को मेरी कुछ क्योंकर समझते ही नहींप्यार के वादों पे अब तो वो उछलते ही नहीं एक हम हैं जो उन्हें देखे सँभलते ही नहींऔर वो हैं की हमें देखे पिघलते ही नहीं मिल गये जो राह में हमको कभी चलते हुएइस तरह मुँह फेरते जैसे कि मिलते ही नहीं…

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  • परिवार से विरासत में मिले साहित्य प्रेम और माहौल से बनी लेखिका प्रियंका ‘सौरभ’
    आलेख

    परिवार से विरासत में मिले साहित्य प्रेम और माहौल से बनी लेखिका प्रियंका ‘सौरभ’

    ByAdmin December 26, 2024December 26, 2024

    महामारी के खाली समय में लिखने की आदत डाली, अब बाज़ार में आया निबंध संग्रह ‘समय की रेत पर’ कहते है न कि बच्चों को जैसा माहौल घर में मिलता है, उनके भविष्य में उसकी छाप ज़रूर दिखती है। अगर परिवार में गायन का माहौल है तो बच्चें में गायन के गुण स्वतः आ जाते…

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  • अटल बिहारी
    कविताएँ

    अटल बिहारी

    ByAdmin December 25, 2024December 25, 2024

    अटल बिहारी सत्य के पथ पर अपने कर्मों सेचल रहे थे जो संभल संभल ,नाम से ही नही अपने काम से भीइस जनता के भी प्यारे थे अटल।। प्रखर राजनेता बनकर जिन्होंनेप्रधानमंत्री पद के दायित्व को चुनाजनता की सुनने वाले इस सेवक कोजनता ने ही अपना स्वयं नेता चुना ।। परम ओजस्वी वक्ता थे बिहारी…

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  • मानव समाज में नशा बुरा है
    कविताएँ

    मानव समाज में नशा बुरा है

    ByAdmin December 25, 2024December 25, 2024

    मानव समाज में नशा बुरा है सुख शांति , समृद्धि का दुश्मन ,नशा नाश का खुला द्वार ।नर्क का यह प्रवेश मार्ग ,इसका करें सब बहिष्कार । फलता , फूलता अच्छा परिवार ,ग़म की दरिया में बह जाता ।केवल विनाश पथ पर गिरता ,दर्द ही पीने को रह जाता । कोई भी नशा नहीं अच्छा…

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  • सीधी उँगली से घी नहीं निकलता
    कहानियां

    सीधी उँगली से घी नहीं निकलता

    ByAdmin December 25, 2024December 25, 2024

    देखा जाए तो बेईमान होना आसान काम नहीं है। इसके लिए ईमान बेचना पड़ता है। आज के इस कलयुगी संसार में लोगों की पहचान करनी बहुत मुश्किल हो गई है। कुछ पता नहीं चलता कब, कौन, कहां, आपके साथ विश्वासघात कर दें। गैर तो गैर अपनों तक पर विश्वास करना बड़ा मुश्किल हो गया है।…

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  • समझदारी | Laghu Katha Samajhdari
    कहानियां

    समझदारी | Laghu Katha Samajhdari

    ByAdmin December 25, 2024December 25, 2024

    आज फिर राजीव और सुमन के कमरे से एक दूसरे पर चीखने-चिल्लाने की आवाजें से आ रही थी। सप्ताह में एक बार तो यह होता ही था। दो दिन बाद फिर से वे एक हो जाते थे। मुझे इसकी आदत थी। मैं दोनों मियां-बीबी के बीच में बोलना उचित नहीं समझती थी। आज भी मैंने…

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