• मेरी कलम से | डॉ. बी.एल. सैनी

    सप्ताह के सात रंग सोमवार का सूरज संग नया उत्साह लाए,आलस्य मिटे, कर्म का दीप जगमगाए।जीवन की डगर पर पहला कदम बढ़े,सपनों का कारवां उम्मीद से जुड़े। मंगलवार ऊर्जा का संचार करे,परिश्रम की ज्योति हर ओर भर दे।कठिन राहें भी सरल बन जाएं,साहस से हर मंज़िल कदमों में आएं। बुधवार का दिन सिखाए सादगी,ज्ञान की…

  • मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं

    मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैंलगा के ताज को ठोकर खड़े हैं न थामा हाथ भी बढ़कर किसी नेयूँ तन्हा हम शिकस्ता-तर खड़े हैं करूँ कैसे तुम्हारा मैं नज़ाराज़माने में सौ दीदा-वर खड़े हैं शजर आता न कोई भी नज़र अबबशर सब धूप में थक -कर खड़े हैं मिरे ज़हनो गुमाँ…

  • सभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले

    सभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले सितम ही सहते रहे वो तो ला-मकाँ निकलेसभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले न कल ही निकले न वो आज जान-ए-जाँ निकलेकि चाँद ईद के हैं रोज़ भी कहाँ निकले तबाही फैली कुदूरत की हर तरफ़ ही यहाँकहाँ कोई भी मुहब्बत का आशियाँ निकले रहे-वफ़ा में न…

  • देश आखिर है क्या बला?

    देश आखिर है क्या बला? कुछ जाहिलों के लिए जमीन का टुकड़ाकुछ गोबर गणेशों के लिए उनके आकाकुछ सिरफिरों के लिए उसमें बसे लोगकुछ घाघ लोगों के लिए बिजनेस का अड्डाजिन्होंने खोद दिया गरीबों के लिए खड्डा आका घाघ लोगों से मिलकर –जाहिल और गोबर गणेशों को रोज घास चराता हैटीवी पर हर वक्त पीपली…

  • प्यार की ताकत | Pyar ki Taqat

    प्यार की ताकत प्यार की ताकतकोई गणितज्ञ आज तकनाप नहीं पाया है।यह ख़ुशबू की तरह है,जो आँखों से नहीं दिखतीबस इसको महसूस कियाजा सकता है प्यार की ताकतकोई शासक आज तककुचल नहीं पाया है।यह मिट्टी में गिरे बीज की तरह हैथोड़ी सी अनुकूल परिस्थिति पाते हीकहीं से भी फूटकरअपनी राह खोज लेता है। प्यार की…

  • ईश्वर से शिकायत

    सत्संग चल रहा था। गुरुजी अपने भक्तों के प्रश्नों के उत्तर बारी बारी से दे रहे थे। 15 साल की एक छोटी बच्ची ने गुरुजी से सवाल किया:- “गुरु जी, मुझे भगवान से शिकायत है कि ईश्वर(भगवान) अच्छे लोगों को हमेशा इतने कष्ट क्यों देते हैं? अच्छे लोग व उनके परिवार वाले हमेशा कष्ट में…

  • डॉ. मनमोहन सिंह का मान

    डॉ. मनमोहन सिंह का मान सादगी का स्वर, ज्ञान का था दीप।जिसने रच दिया, बदलाव का सीप।मनमोहन सिंह, वह नाम है अमर,जिनपर भारत देश को गर्व है प्रखर। गाह(पाक)के गाँव से उठकर चले।विद्या के दीप संग, तम को पले।कैम्ब्रिज,ऑक्सफोर्ड के ज्ञानी प्रणेता,भारत की माटी का वह अमूल्य रचयिता। आर्थिक संकट जब आया करीब।देश को मिला…

  • धूल को फूल बनाने वाले

    धूल को फूल बनाने वाले धूल को फूल बनाने वालेराग औ रंग सजाने वाले अब नही साथ निभाने वालेलाख कसमें वो उठाने वाले सब खरीद्दार ही निकले देखोरूह तक आज वो जाने वाले कर रहे बात यहां उल्फ़त कीदिल में वो आग लगाने वाले कुछ नही पास हमारे अब हैरंक से आज बताने वाले क्या…

  • मिस्टर मनमोहन जो थे सबको भाने वाले थे

    मिस्टर मनमोहन जो थे सबको भाने वाले थे मिस्टर मनमोहन जो थे, सबको भाने वाले थे,सोचा भी नहीं था कल तक, वो भी जाने वाले थे। ध्रुव तारा सा, आसमान में , चमकेंगे, इस कारण भी,अर्थशास्त्र में, ऊंची-ऊंची, डिग्री पाने वाले थे। संकट में भी मुल्क को जब साहस की पड़ी ज़रूरत थी,मौनी बाबा बनकर…

  • हा.. मुझे सिनेमा पसंद है..

    मै कई ऐसे लोगो को जानता हु की जो की सिनेमा के नाम पर नाक भौ सिकोड़ते है.. सिनेमा उनकी दृष्टि में हेय और निंदनीय कृति है.. वे सिनेमा को समाज के पतन का कारण मानते है.. सिनेमा ने ही देश का बंटाधार किया है यह मान्यता उन के जेहन में कही भीतर तक समा…