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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • पी नज़रों के पैमानों में
    शेरो-शायरी

    Poem Nazron ke Paimano | पी नज़रों के पैमानों में

    ByAdmin April 6, 2021February 11, 2023

    पी नज़रों के पैमानों में ( Pee Nazron Ke Paimano Mein )   पी  नज़रों  के  पैमानों  में। क्यूं सुख ढूंढे मयखानों में।।   जब दिल में ग़म गुलशन फीका। रौनक    लगती    वीरानों   में।।   बात चमन के फूलों में जो। बात कहां वो गुलदानों में।।   जो शान तेरी महफिल में है।…

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  • मैं मरूँगा
    कविताएँ

    मैं मरूँगा | Kavita main Marunga

    ByAdmin April 6, 2021February 11, 2023

    मैं मरूँगा ( Main Marunga )   मैं नहीं मरूँगा किसी सड़क दुर्घटना में नदी या तालाब में डूब कर !   मैं नहीं मरूँगा किसी ज़हर के सेवन से या नशे का आदि होने से !   मैं नहीं मरूँगा पँखे से लटक कर या किसी पेड़ पर झूल कर !   मैं नहीं…

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  • वो गूंज
    शेरो-शायरी

    Nazm Woh Goonj | वो गूंज

    ByAdmin April 6, 2021February 11, 2023

    वो गूंज ( Woh Goonj )   वो गूंज वो सदा जो उठती है मुझसे     पहुँचती है तुम तलक छूकर कभी नाद करती है कभी नहीं भी   बिखर जाती है बीच खला में खाली सी तरंगे हवा की आजाती है फिर भरने को   शंख ह्रदय का बस इक वही बरसों का…

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  • पड़ोसी धर्म निभाएं
    कविताएँ

    पड़ोसी धर्म निभाएं | Padosi par Kavita

    ByAdmin April 6, 2021February 11, 2023

    पड़ोसी धर्म निभाएं ( Padosi Dharm Nibhayen )   सीमेंट गारे से बनी ईंट पाथर से गढ़ी कस्बे में खड़ी ये मंदिर मस्जिद बड़ी बड़ी गिरिजा गुरुद्वारा साहिब भी नहीं इंसानियत से बड़ी सदैव काम आएंगे सर्वप्रथम आपके पड़ोसी ही उन्हें मिलिए जुलिए घड़ी घड़ी रिश्तों में बनाए रखें विनम्रता सादगी और ईमानदारी माहौल बनेगा…

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  • भागीदारी
    कविताएँ

    भागीदारी | Bhagidari par Kavita

    ByAdmin April 6, 2021February 11, 2023

    भागीदारी ( Bhagidari )   संस्थाओं में हमारी क्या है? कितनी है? कभी सोची है! इतनी कम क्यों है? हम इतने कम तो नहीं! फिर बौखलाहट बेचैनी क्यों नहीं? कानों पर जूं तक रेंगती नहीं, हम सब में ही है कमी; हालत बहुत है बुरी। न सोचते कभी न विचारते न स्वयं को निखारते! न…

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  • उलझन
    कविताएँ

    Ghazal | उलझन

    ByAdmin April 6, 2021

    उलझन ( Uljhan ) क्यों  उलझा  है  शेर हृदय तू, बेमतल की बातों में। जिस संग मन उलझा है तेरा, तू ना उसके सासों में। मना  ले  अपने चंचल मन को, वर्ना तू पछताएगा, प्रेम पतित हो जाएगा फिर,रूक ना सकेगा आँखो में। इतना ज्ञान भरा है तुझमें, फिर.भी क्यो अंजान रहे। इकतरफा है प्यार…

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  • मैंने क्या किया?
    कविताएँ

    मैंने क्या किया | Kavita Maine kya Kiya

    ByAdmin April 6, 2021February 11, 2023

    मैंने क्या किया ? ( Maine Kya Kiya )   मेरे पास एक नाव है टुटी हुई सी छेद हुआ पड़ा जो किसी काम का नहीं फेंक नहीं सकता पर जगह टार है रखा क्या करूं इसका समझ नहीं आता फेंका भी नहीं जाता जाड़े का इंतजार कर रहा हूं जला दूंगा भगा के ठंड…

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  • गजगामिनी
    कविताएँ

    Kavita | गजगामिनी

    ByAdmin April 6, 2021

    गजगामिनी ( Gajagamini )   मन पर मेरे मन रख दो तो,मन की बात बताऊं। बिना  तेरा  मै  नाम  लिए ही, सारी बात बताऊं। महफिल में कुछ मेरे तो कुछ,तेरे चाहने वाले है, तेरे बिन ना कटते दिन, हर रात की बात बताऊं।   संगेमरमर  पर  छेनी  की,  ऐसी  धार ना देखी। मूरत जैसे सुन्दर…

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  • कन्या भ्रूण हत्या : मानव जाति के भविष्य पर प्रश्न 
    निबंध

    Essay In Hindi on female feticide | कन्या भ्रूण हत्या : मानव जाति के भविष्य पर प्रश्न

    ByAdmin April 6, 2021December 5, 2022

    निबंध | कन्या भ्रूण हत्या : मानव जाति के भविष्य पर प्रश्न  ( Female feticide: Questions on the future of mankind: Essay In Hindi )   भूमिका (Introduction) : – भारत में बढ़ती कन्या भ्रूण हत्या के चलते अनेक प्रकार की सामाजिक समस्याएं जन्म दे रही है। इससे समाज में असंतुलन की स्थिति धीरे-धीरे उत्पन्न…

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  • चित आदित्य
    कविताएँ

    Kavita | चित आदित्य

    ByAdmin April 5, 2021

    चित आदित्य  ( Chit Aditya ) देखो ! उसकी सादगी, गीली मिट्टी से ईंट जो पाथ रही। लिए दूधमुंहे को गोद में, विचलित नहीं तनिक भी धूप में। आंचल से ढंक बच्चे को बचा रही है, रखी है चिपकाकर देह से- ताकि लगे भूख प्यास तो सुकुन से पी सके! खुद पाथे जा रही है।…

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