देखो ! उसकी सादगी,
गीली मिट्टी से ईंट जो पाथ रही।
लिए दूधमुंहे को गोद में,
विचलित नहीं तनिक भी धूप में।
आंचल से ढंक बच्चे को बचा रही है,
रखी है चिपकाकर देह से-
ताकि लगे भूख प्यास तो सुकुन से पी सके!
खुद पाथे जा रही है।
दिनकर से न तनिक घबरा रही है,
न कोई छांव ही तलाश रही है।
पाषाण है तू क्या री?
बच्चे का इंतजाम कर संतुष्ट है बड़ी!
पाथे जा रही है,
बस पाथे ही जा रही है?
बचा खुद को भी!
अरी तू क्या कर रही है?
देखो आदित्य तेरे सिर मंडरा रहा है,
देख मेरा तो सिर चकरा रहा है।
घड़ी घड़ी ले रहा हूं आब की घूंट,
फिर भी गला जा रहा है पल में सूख।
तू किस चीज़ की बनी है,
लोहे की तो न लग रही है।
सजीव है,
हिल-डुल रही है;
मानो मुझसे कह रही है?
बाबू! मुझे जून की गर्मी नहीं-
दो जून की रोटी सताती है
इसलिए ये कड़ी धूप भी-
मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाती है।
गिनती करूंगी पूरी
तभी तो मिलेगी मज़दूरी?
वही बचाएगा,
रवि कुछ ना कर पाएगा;
मेरे जीजिविषा के आगे निस्तेज हो चित हो जाएगा।
हसीन सपने ( Haseen sapne ) बैठे थे हम महफिल में, हसीनो के बीच, बालों को रंगवा कर। और हरकत थी कुछ ऐसे जैसे 60 में से 40 घटा कर। महफिल भी जवां और दिल भी जवां। मन में सावन ऐसे झूम रहा था, जैसे आवारा, बादल चूम रहा था। हमने भी, हमने भी,…
जल ही जीवन ( Jal Hi Jeevan Hai ) बूॅ॑द -बूॅ॑द से घड़ा भरे, कहें पूर्वज लोग, पानी को न व्यर्थ करें, काहे न समझे लोग। जल जीवन का आधार है,बात लो इतनी मान। एक चौथाई जल शरीर, तभी थमी है जान। जल का दुरुपयोग कर, क्यों करते नुकसान। जल से है …
मजदूर का स्वप्न ( Majadoor ka swapan ) ऊंची ऊंची अट्टालिका है , बड़े-बड़े यह भवन खड़े हैं l चारों और यह भरे पड़े हैं, मेरे हाथों से ही बने हैं l। कितने भवनों का निर्माता, खून पसीना मैं बहाता। मेरे घर के हाल बुरे हैं, पत्नी बच्चे भूखे पड़े हैं l। …
मृत्यु तुल्य विश्वास ( Mrityu Tulya Vishwas ) मृत्यु तुल्य विश्वास पड़ा है ,संजीवन पिलवाओ । रजनी के माथे पर कोई ,फिर बिंदिया चमकाओ।। तुम्हीं शिवा राणा लक्ष्मी हो ,और जवाहर गाँधी । तुमने ही मोड़ी थी बढ़कर ,काल चक्र की आँधी । अर्जुन जैसा आज यहाँ पर , तुम गाण्डीव उठाओ ।। मृत्यु तुल्य…
समय का कालखंड ( Samay ka kalkhand ) समय की महत्ता जो समझे वही है बलवान, समय के संग चलनेवाला होता है धनवान। सु अवसर पाकर जो कर्म से मुकर जाता है, वह अभागा है धरती पर जीवन भर पछताता है। समय ही करावत लड़ाई-झगड़ा बनावत राजा रंक फकीर, समय ही बनाता-बिगाड़ता रिश्ता और…
नींबू ( Nibu ) गैस एसिडिटी और पेट दर्द पलभर में दूर करता, जिसके स्वाद एवं खुश्बू से हमें ताज़गी मिलता। कहते है यह मृत-व्यक्ति को भी जिन्दा कर देता, अगर उसके अन्दर एक भी ये बीज नही होता।। ये पीले रंग का होता लगता झाड़-काॅंटों के बीच, मसूड़ों से ख़ून आने वाली समस्या…