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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • दिल हुआ है दीवाना इक आज मुखड़ा देखकर
    शेरो-शायरी

    दिल हुआ है दीवाना इक आज मुखड़ा देखकर

    ByAdmin December 19, 2020December 29, 2020

    दिल हुआ है दीवाना इक आज मुखड़ा देखकर     दिल हुआ है दीवाना इक आज मुखड़ा देखकर! रोज़ आहें दिल मेरे अब उसको भरता देखकर   प्यार का दिल पे असर मेरे हुआ ऐसा यारों दिल कहीं भी अब नहीं उसको लगता देखकर   के जैसे मेरे लिये रब ने बनाया है तुम्हें दिल…

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  • अनोखा आंदोलन!
    कविताएँ

    अनोखा आंदोलन!

    ByAdmin December 18, 2020December 29, 2020

    अनोखा आंदोलन! **** कृषि कानूनों के खिलाफ अन्नदाता आंदोलनरत हैं, भीषण सर्दी में ही- दिल्ली बार्डर पर दिए दस्तक हैं। भीड़ बढ़ती जा रही है! ठसाठस सड़कों पर डटे हैं, सरकारी दमनचक्र के बावजूद- टस से मस नहीं हो रहे हैं। तू डाल डाल, मैं पात पात की नीति पर चल रहे हैं, शासन की…

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  • जो किया मिलनें का वो वादा बदलती
    शेरो-शायरी

    जो किया मिलनें का वो वादा बदलती

    ByAdmin December 18, 2020December 29, 2020

    जो किया मिलनें का वो वादा बदलती     जो किया मिलनें का वो वादा बदलती दोस्त वो बातें लम्हा लम्हा बदलती   साथ क्या मेरा निभायेंगे जीवन भर देखकर मुझको वही चेहरा बदलती   आदमी इतना बुरा हूँ शक्ल से क्या मैं जो  मुझे वो देखकर  रस्ता बदलती   किस तरह उसपे यकीं कर…

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  • रात पूस की
    कविताएँ

    रात पूस की!

    ByAdmin December 17, 2020December 29, 2020

    रात पूस की! **** पवन पछुआ है बौराया, बढ़ी ठंड अति- हाड़ मांस है गलाया! नहीं है कोई कंबल रजाई, बिस्तर बर्फ हुई है भाई। किट किट किट किट दांत किटकिटा रहे हैं, कांपते शरीर में नींद कहां? निशा जैसे तैसे बिता रहे हैं। चुन बिन कर लाए हैं कुछ लकड़ियां- वहीं सुनगा रहे हैं,…

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  • बैठे है सब किसान दिल्ली में
    शेरो-शायरी

    बैठे है सब किसान दिल्ली में

    ByAdmin December 17, 2020December 29, 2020

    बैठे है सब किसान दिल्ली में     बैठे है सब किसान दिल्ली में! चल रहे है बयान दिल्ली में   अपने हक़ के लिये किसानों ने   हाँ लगा दी है जान दिल्ली में   कोई भी  जब बातें  नहीं मानी क्या  किसानों का मान दिल्ली में   सच की आवाज़  से किसानों ने…

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  • ग़म भरी अपनी यहां तो जिंदगी है
    शेरो-शायरी

    ग़म भरी अपनी यहां तो जिंदगी है

    ByAdmin December 17, 2020December 29, 2020

    ग़म भरी अपनी यहां तो जिंदगी है     ग़म भरी अपनी यहां तो जिंदगी है! लिक्खी क़िस्मत में नहीं शायद ख़ुशी है   कोई भी अपना नहीं है आशना  ही तन्हाई के रोज़ आंखों में नमी है   हो गया मुझसे पराया उम्रभर वो रोज़ रातें यादों में जिसकी कटी है   हाँ ख़ुशी…

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  • नज़र का तीर जब उसका जिग़र के पार होता है
    शेरो-शायरी

    नज़र का तीर जब उनका जिग़र के पार होता है

    ByAdmin December 16, 2020December 29, 2020

    नज़र का तीर जब उनका जिग़र के पार होता है     नज़र का तीर जब उनका जिग़र के पार होता है। नहीं तब होश रहता है सभी सुख-चैन खोता है।।   सहे तकलीफ जो पहले है पाते चैन आख़िर में। जो पहले ऐश करता है सदा आख़िर में रोता है।।   वही मिलता उसे…

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  • हाँ व़क्त कटता तेरे इंतजार में
    शेरो-शायरी

    हाँ व़क्त कटता तेरे इंतजार में

    ByAdmin December 16, 2020December 29, 2020

    हाँ व़क्त कटता तेरे इंतजार में     हाँ व़क्त कटता तेरे  इंतजार में! तू लौट आ दिल मेरा बेक़रार में   इस बार आऊंगा मैं मिलनें को तुझे छुटटी है दोस्त मेरी इतवार में   वो तल्ख़ बात करता रोज़ है़ मगर लहज़ा नहीं उल्फ़त का मेरे यार में   ख़ुशबू  कैसे महकेगी प्यार…

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  • स्वतंत्रता
    कविताएँ

    स्वतंत्रता

    ByAdmin December 15, 2020December 29, 2020

    स्वतंत्रता   नभ धरातल रसातल में ढूंढ़ता। कहां हो मेरी प्रिये  स्वतंत्रता।। सृष्टि से पहले भी सृष्टि रही होगी, तभी तो ये बात सारी कहीं होगी, क्रम के आगे नया क्रम फिर आता है, दास्तां की डोर बांध जाता है।। सालती अन्तस अनिर्वचनीयता।।                        …

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  • जाने कहां चले गए
    कविताएँ

    जाने कहां चले गए ?

    ByAdmin December 15, 2020December 29, 2020

    जाने कहां चले गए ? ****** महंगाई महंगाई का शोर करने वाले, सड़क और संसद पर धरना देने वाले! नहीं दिख रहे आजकल? जो बात बात पर करते थे बंद का आह्वान, प्याज की माला गले में डाल- चलते थे सीना तान। जाने कहां चले गए? सो रहे होंगे शायद? या फिर खो गए होंगे…

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