• खुदीराम बोस | Khudiram Bose

    खुदीराम बोस भारत का जयघोष..बेबाक शब्दों का उदघोष..मनाया बचपन में ही फाँसी का जल्लोष..खुदीराम बोस…खुदीराम बोस…भारत की रक्षा का प्रणतेज पवन वायू का था प्रकंपनपाषाण थाथा वह तीर भाले का निशानस्वतंत्रता संग्राम कास्वतंत्र आकाश..विदेशियों का कालइस नाबालिग युवक ने कर दिए थे ब्रिटिश साम्राज्य के हाल..सीने पर अपने झेले वारगुलामी के ऊपर किया कड़ा प्रहारभारत…

  • नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करो

    नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करो नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करोजब भी जी चाहे तुम आज़माया करो बेगुनाहों की फ़रियाद सुनता है रबझूठी तुहमत न ऐसे लगाया करो इश्क़ का तुहफा भी नज़्र करती तुम्हेंमेरी ग़ज़लों में आकर समाया करो बात माना करो दूसरों की भी तुमहर समय अपनी ही मत चलाया करो ये…

  • प्रियंका सौरभ की कविताएं | Priyanka Saurabh Poetry

    “मनीषा की अरदास” मत रो माँ, अब मत रो,तेरी बेटी की आवाज़ हम सब हैं,न्याय की राह पर चल पड़े,अब जाग उठा हर जन-जन है…। गूँजे धरती, गगन गवाह,अन्याय के विरुद्ध उठे निगाह।“भाग गई होगी” कहना भूल,अब टूट चुका हर झूठा फूल। मनीषा तेरी कसम हमें,लड़ेगे जब तक साँस है।न्याय की ज्वाला जलती रहे,हर दिल…

  • फिर क्यों?

    फिर क्यों? हम बंटेंगे तो कटेंगे  फिर क्यों बंटे हैं? जातियों में  धर्मों में  ऊॅंच में  नीच में  शिकार हो रहे हैं – केवल गरीब  लुट रहे हैं – केवल बदनसीब  मारे जा रहे हैं – पेट के भूखे।  लोकतंत्र की पद्धतियाॅं ऐसी नहीं है  जो तोड़ती ही नहीं  झुका देती है पेट के बल …

  • आनंद त्रिपाठी की रचनाएँ

    लिखो नवल श्रृंगार फूलों की मकरंद है छाया हर्ष अपारउठो कवि इस भोर में लिखो नवल श्रृंगार लिखो नवल श्रृंगार प्रेम की अनुपम धुन मेंहो कोई न द्वंद कभी इस चंचल मन में अरुणोदय की झलक तुषार की कैसी मालाभ्रमर गीत यह मधुर गान है रस वाला यही अवधि है बजें दिलों के तारउठो कवि…

  • कागा की क़लम से | Kaga ki Kalam Se

    जाति धर्म जनता को नहीं बाटो जाति धर्म में ,मुफ़्त रेवड़ियां नहीं बांटो जाति धर्म में! चुनावों के चक्रव्यू में फंस धंस कर ,दलगत दलदल नहीं बाटो जाति धर्म में ! लोभ मोह माया छोड़ शिक्षा मुफ़्त करो ,अमीर ग़रीब नहीं बांटो जाति धर्म में! ऊंच नीच छूआ छूत भेद भव बेकार ,मानव को नहीं…

  • नफरत भरी है जमाने में

    नफरत भरी है जमाने में नफरत भरी है जमाने मेंदर्द भरा है दिवाने मेंवह मजा नए में अब कहांजो मजा होता था पुराने में।। पैसा है तो अब प्यार हैमोहब्बत भी एक व्यापार हैइंतजार कौन करता हैजब बेवफा सरकार है।। दौर कहां अब पुराना हैदेवदास जैसा कोई दीवाना हैअब तो पैसे से दिल्लगी होतीप्यार तो…

  • भगवान पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक दिवस

    भगवान पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक दिवस धर्म मार्ग को जीवन आचरण में अपनायें ।विकट – विकटतम मार्ग से पार लगायें ।कही न रुके सदैव आगे बढ़ते जायें ।मानव जीवन से मोक्ष पायें ।प्रभु पार्श्वनाथ की तरह मंजिल पायें ।धर्म से भावना प्रबल रहती ।गलत आचरण से कोसों दूर रहते ।मन में निर्मल सरिता की भावना…

  • यह जो उर्दू ज़बान है साग़र

    यह जो उर्दू ज़बान है साग़र मीर ग़ालिब की जान है साग़रयह जो उर्दू ज़बान है साग़र उर्दू सुनते ही ऐसा लगता हैगोया बंशी की तान है साग़र बेसबब आज हिंदी उर्दू मेंहो रही खींचतान है साग़र उर्दू को माँ कहो या तुम मौसीएक ही खानदान है साग़र मेरी ग़ज़लों में उर्दू के दम सेघुल…

  • उनको मुहब्बतों में ख़ुदा कर चुके हैं हम

    उनको मुहब्बतों में ख़ुदा कर चुके हैं हम उनको मुहब्बतों में ख़ुदा कर चुके हैं हमअब अपनी मंज़िलों का पता कर चुके हैं हम इक बेवफ़ा को अपना ख़ुदा कर चुके हैं हमसब अपनी मंज़िलों को खफ़ा कर चुके हैं हम अपना ये दिल वतन पे फ़ना कर दिया है अबऔर जाँ लुटा के फ़र्ज़…