• क्या कहना

    क्या कहना     सरस सरगम सुधा सी सुंगधित बयार क्या कहना। चलन चपला सी चंचल छन छनन झंकार क्या कहना।।   विकट लट की घटा की छटा न्यारी, कशिश ऐसी अनुचरी प्रकृति है सारी, घूंघट पट अपट अनुपम निष्कपट श्रृंगार क्या कहना।।   कमल दल विकल लखि अधरन की आभा, रंक जग है तुम्हारा…

  • प्यार में दिल टूटा नहीं होता

    प्यार में दिल टूटा नहीं होता     प्यार में दिल टूटा नहीं होता जख़्म दिल में गहरा नहीं होता   ढूंढ़ पाता नहीं नगर में मैं याद जो  वो चेहरा नहीं होता   फ़ेरकर मुंह नहीं चलता उससे  ग़ैर उससे रिश्ता नहीं होता   तोड़ देता मैं प्यार के धागे प्यार से जो देखा…

  • मतदान जरूर करें

    मतदान जरूर करें ***** लोकतंत्र के महापर्व का मजा ले लो भैया, नियत तिथि को मतदान कर चुनो भविष्य भैया। अपनी ताकत-एकजुटता का दिखलाओ एहसास, जो काम न करे, कहें उसे नो बाॅस! अच्छे उम्मीदवार को कुर्सी पर बिठाएं, गर ना हो पसंद ‘नोटा विकल्प’ दबाएं। जांच परख कर किसी को दीजिए अपना मत, लालच…

  • रोज़ मुझको हिचकियां आती रही!

    रोज़ मुझको हिचकियां आती रही!     रोज़ मुझको हिचकियां आती रही! यादों की ही सिसकियां आती रही   बात बिगड़ी उससे ऐसी गुफ़्तगू में रोज दिल में  दूरियां आती रही   काम कोई भी हल नहीं मेरा हुआ है रुलाने  मजबूरियां आती रही   हार मैंनें भी नहीं मानी लड़ने में दुश्मनों की धमकियां…

  • अरमां यूं भी मरते देखा

    अरमां यूं भी मरते देखा   अरमां यूं भी मरते देखा। दिल ही दिल में पलते देखा।।   आगे बढता देख किसी को। दिल दुनिया का जलते देखा।।   दुनियादारी के रिश्तों में। सबका ढंग बदलते देखा।।   गर्व करे तू क्या यौवन का। वक्त पडे सब ढलते देखा।।   दो कौङी के लोगों का…

  • विजय संकल्प

    विजय संकल्प     हार माने हार होत है जीत माने जीत, जीतने वाले के संग सब लोग लगावत प्रीत।   मन कचोटता रह जाता जब होता है हार, मन ही बढ़ाता है मनोबल जीवन सीख का सार।   जीत-हार का जीवन चक्र सदैव चलता रहता है, जीत-हार उसी की होती है जो खेल खेलता…

  • जानम पहला पहला प्यार है

    जानम पहला पहला प्यार है      जानम पहला पहला प्यार है रात दिन बस तेरा ख़ुमार है   नींद आये कैसे यादों में इश्क़ में आंखें बेदार है   देखता मैं  रहूँ उसको ही खूबसूरत इतना दिलदार है   प्यार में डूबा है दिल उसके कर गया आंखों से वार है   अब रहा…

  • क्या रावण मर गया है ?

    आज दोपहर उस वक्त मुझे  प्रभु राम मिले जब मैं नींद में था। कहीं जा रहे थे वह, जल्दी में थे। मैंने उन्हें देखा और पुकारा। वह रुके। मैंने उन्हें प्रणाम किया। उन्होंने जल्दबाजी में अपना दायाँ हाथ मेरे सर पर रखकर आशीर्वाद दिया। मैंने कहा प्रभु इतनी जल्दी में ?  उन्होंने कहा हां कहा…

  • प्रेयसी | Preyasi

    प्रेयसी ( Preyasi )    सृष्टि में  संचरित अथकित चल रही है। प्रेयसी ही ज्योति बन कर जल रही है।।   कपकपी सी तन बदन में कर गयी क्या, अरुणिमा से उषा जैसे डर गयी क्या, मेरे अंतस्थल अचल में पल रही है।। प्रेयसी०   वह बसंती पवन सिहरन मृदु चुभन सी, अलक लटकन नयन…

  • देश आवाज अब दें रहा

    देश आवाज अब दें रहा   देश आवाज अब दें रहा खून अपना बहा दो कभी   मुल्क है मुश्किलों से घिरा जान सब की बचा लो अभी   इस वतन से अदूँ दो भगा आग है इक दिलों में लगी   देश भर में अमन ही रहे रोशनी भी जलेगी कभी   किस तरह…