• उसे पास बुलाते क्यों हो

    उसे पास बुलाते क्यों हो टूटने है जो मरासिम वो निभाते क्यों होदूर जाता हो उसे पास बुलाते क्यों हो। वक्त माकूल नहीं हो तो बिगड़ती चीज़ेंदौर-ए-तूफाॅं में चिराग़ों को जलाते क्यों हो। तुम हमारे हो फ़कत है ये नवाज़िश हम परबस गिला ये है कि एहसान जताते क्यों हो। आइना सबको दिखाकर के गिनाकर…

  • खोया है विश्वास

    खोया है विश्वास : नवगीत फटे-पुराने कपड़े उनके,धूमिल उनकी आस।जीवन कुंठित है अभाव में,खोया है विश्वास।। अवसादों की बहुतायत है,रूठा है शृंगार।अंग-अंग में काँटे चुभते,तन-मन पर अंगार।।मन विचलित है तप्त धरा है,कौन बुझाये प्यास। चीर रही उर पिक की वाणी,काॅंपे कोमल गात।रोटी कपड़ा मिलना मुश्किल,अटल यही बस बात।।साधन बिन मौन हुआ उर,करें लोग परिहास। आग…

  • बढ़ई का इतिहास

    बढ़ई का इतिहास प्राचीन सभ्यता से जुड़ा हुआ है बढ़ई का इतिहास,कुशल कारीगरी शिल्प-कला है कारपेंटर के पास।करतें है इनके हृदय भगवान विश्वकर्मा जी निवास,फर्नीचर के कामों में यह लोग कर रहें है विकास।। छिल-छिलकर यह काठ को अद्भुत चीजें बना देते,ना देखा ना सोचा किसी ने मनमोहक रूप दे देते।दिल में उम्मीद लिए यह…

  • युग द्रष्टा अटल – काव्य संग्रह

    संपादक – डॉ जसप्रीत कौर फ़लक ,लुधियाना पंजाब समीक्षक- डॉ गुलाब चंद पटेल गांधी नगर गुजरात अटल जी एक उच्च कोटी के कवि थेऔर मूल्य आधारित विचार धारा से चलनेवाले सिद्धांतवादी नेता के साथ संवेदनशील राज नेता थे । इनके लिए डॉ जसप्रीत कौर फ़लक का यह काव्य संग्रह अटल जी के व्यक्तित्व को उजागर…

  • शुभम साहित्य संस्था के मुशायरे में झलकी गंगा-जमुनी संस्कृति, विनय साग़र जायसवाल ने की अध्यक्षता

    शुभम साहित्य एवं सामाजिक संस्था ने ख़ुश लोक सभागार में एक भव्य गंगा-जमुनी कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर विनय साग़र जायसवाल ने की, जबकि संचालन ग़ज़लराज ने अपनी शानदार शैली में किया। शुरुआत मां शारदे की वंदना से हुई, जिसे हिमांशु श्रोतिए निष्पक्ष जी ने प्रस्तुत किया।…

  • निकल गया | Nikal Gaya

    निकल गया ऐसे वो आज दिल के नगर से निकल गया।जैसे परिन्द कोई शजर से निकल गया। किस रूप में वो आया था कुछ तो पता चले।बच कर वो कैसे मेरी नज़र से निकल गया। क्यों कर न नफ़़रतों का हो बाज़ार गर्म आज।जज़्बा-ए-इ़श्क़,क़ल्बे-बशर से निकल गया। उस दिन ही मेरे दिल के महक जाएंगे…

  • भगवान के यहाँ देर है, अंधेर नहीं

    “बड़ा खूबसूरत कांच का गिलास है। क्या यह आपका है?” दीपक सर ने मेज पर रखे कांच के गिलास को देखते हुए, रोमांटिक अंदाज में शालिनी मैडम से कहा। “जी सर, मेरा ही है।” शालिनी मैडम ने जवाब दिया। “मेरा इस पर दिल आ गया है। क्या यह कांच का गिलास मेरा हो सकता है?”…

  • सावन आया | Sawan Aaya

    सावन आया  नयी चेतना  नयी जाग्रत  अंतर्मन में  नया भाव कुछ  मन को भाया, गूॅंज उठे स्वर झूॅंम उठे वन प्रकृति ने भी  नव मधुरस का  पान कराया, लतिकाएं तरु आलिंगन कर  लिपट लिपट कर  नतमस्तक  साभार जताया, रिमझिम रिमझिम  बूॅंदें जल की  छोड़ गगन को  उतर धरा पर  उपवन का  संसार बसाया, स्पर्श प्रेम…

  • मस्तियों में जी मैंने

    मस्तियों में जी मैंने शराबे – शौक़ निगाहों से उसकी पी मैंनेतमाम उम्र बड़ी मस्तियों में जी मैंने हज़ारों किस्म की चीज़ों से घर सजाया थातुम्हारे शौक़ में रख्खी नहीं कमी मैंने जुनून ऐसा चढ़ा था किसी को पाने कालगाई दाँव पे हर बार ज़िन्दगी मैंने हज़ारों ग़म थे खड़े ज़िन्दगी की गलियों मेंहरेक मोड़…

  • तुम्हारा साथ और तुम

    तुम्हारा साथ और तुम मैंने हमेशा प्रयत्न किया,अपने अनुराग को पारावार देने का,एवं उसकी नीरनिधि में समाने का,तुम्हारे चेहरे की आभा,और उस पर आईहँसी कोकायम रखने का,किन्तु-मैं हमेशानाकामयाब रही,क्योंकि–तुम मुझे एवं मेरे प्यार कोसमझ ही नहीं पाये।तुम मेरीभावनाओं में लिप्त,परवाह कोभांप न सके,मालूम है कि-हमेशा साथ संभव नही,फिर भी मैंने हमेशा ढूंढ़ी तलाशी,तुम्हारे साथ रुक…