• चोरी पकड़ी गई

    स्कूल की कैंटीन में कक्षा एक की 6 साल की इलिशा के हाथ में 500 का नोट देखकर कैंटीन मालिक को बड़ा आश्चर्य हुआ। वह बच्ची कैंटीन से कुछ सामान खरीदने आयी थी। कैंटीन मालिक ने बच्ची से पूछा- “बेटा, तुम्हें क्या चाहिए? यह 500 का नोट तुम्हें किसने दिया? क्या पापा ने दिया?” “नहीं,…

  • भला क्या माँगा

    भला क्या माँगा तुझ से दिलदार से मैंने भी भला क्या माँगातेरे जलवों से शब-ए-ग़म में उजाला माँगा तेरी रहमत ने जो भी फ़र्ज़ मुझे सौंपे हैंउनको अंजाम पे लाने का वसीला माँगा हर ख़ुशी इनके तबस्सुम में छुपी होती हैरोते बच्चों को हँसाने का सलीक़ा माँगा तू है दाता हैं तेरे दर के भिखारी…

  • छोड़ दे ऐब को

    छोड़ दे ऐब को छोड़ दे ऐब को, तख़सीस ,दुआ तू रख लेअपने असलाफ़ के अख़लाक़ की तू बू रख ले तू सलीके से पहुँच जाए बुलंदी पे भीख़ार दे गुल के मुझे और तू ख़ुशबू रख ले है फ़रेबी ये जहाँ लोग तमाशाई भीमत बिफर नादां तू गुस्से पे भी काबू रख ले मिल…

  • गुरु घासीदास बाबा जयंती

    गुरु घासीदास बाबा जयंती सन्ना न न ना सना हो रे नना ।सन्ना न न ना नाना हो रे नना ।। गुरु बाबा जी के जयंती मनाए बर।सतनाम के पावन अंजोर बगराए बर।आवा जी संगी हो आवा जी मितान।गुरु बाबा के सीख ल कर लव धारन।सन्ना न न ना सना हो रे नना ।सन्ना न…

  • क्या कहने | Kya Kahne

    क्या कहने इक तो जुल्फें दराज़, क्या कहनेउसपे बाहें ग़ुदाज़, क्या कहने मुँह को तेड़ा किये यूँ बैठे हैंहुस्न और उसपे नाज़, क्या कहने अहले-दुनिया को ताक पर रख करएक उसका लिहाज़, क्या कहने जब भी गाऐ तो अंदलीब लगेउस पे परवाज़-ए-बाज़, क्या कहने गुफ़्तुगू भी पहेलियों जैसीऔर आँखों में राज़, क्या कहने कल तलक…

  • खुदीराम बोस | Khudiram Bose

    खुदीराम बोस भारत का जयघोष..बेबाक शब्दों का उदघोष..मनाया बचपन में ही फाँसी का जल्लोष..खुदीराम बोस…खुदीराम बोस…भारत की रक्षा का प्रणतेज पवन वायू का था प्रकंपनपाषाण थाथा वह तीर भाले का निशानस्वतंत्रता संग्राम कास्वतंत्र आकाश..विदेशियों का कालइस नाबालिग युवक ने कर दिए थे ब्रिटिश साम्राज्य के हाल..सीने पर अपने झेले वारगुलामी के ऊपर किया कड़ा प्रहारभारत…

  • नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करो

    नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करो नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करोजब भी जी चाहे तुम आज़माया करो बेगुनाहों की फ़रियाद सुनता है रबझूठी तुहमत न ऐसे लगाया करो इश्क़ का तुहफा भी नज़्र करती तुम्हेंमेरी ग़ज़लों में आकर समाया करो बात माना करो दूसरों की भी तुमहर समय अपनी ही मत चलाया करो ये…

  • प्रियंका सौरभ की कविताएं | Priyanka Saurabh Poetry

    “मनीषा की अरदास” मत रो माँ, अब मत रो,तेरी बेटी की आवाज़ हम सब हैं,न्याय की राह पर चल पड़े,अब जाग उठा हर जन-जन है…। गूँजे धरती, गगन गवाह,अन्याय के विरुद्ध उठे निगाह।“भाग गई होगी” कहना भूल,अब टूट चुका हर झूठा फूल। मनीषा तेरी कसम हमें,लड़ेगे जब तक साँस है।न्याय की ज्वाला जलती रहे,हर दिल…

  • फिर क्यों?

    फिर क्यों? हम बंटेंगे तो कटेंगे  फिर क्यों बंटे हैं? जातियों में  धर्मों में  ऊॅंच में  नीच में  शिकार हो रहे हैं – केवल गरीब  लुट रहे हैं – केवल बदनसीब  मारे जा रहे हैं – पेट के भूखे।  लोकतंत्र की पद्धतियाॅं ऐसी नहीं है  जो तोड़ती ही नहीं  झुका देती है पेट के बल …

  • आनंद त्रिपाठी की रचनाएँ

    लिखो नवल श्रृंगार फूलों की मकरंद है छाया हर्ष अपारउठो कवि इस भोर में लिखो नवल श्रृंगार लिखो नवल श्रृंगार प्रेम की अनुपम धुन मेंहो कोई न द्वंद कभी इस चंचल मन में अरुणोदय की झलक तुषार की कैसी मालाभ्रमर गीत यह मधुर गान है रस वाला यही अवधि है बजें दिलों के तारउठो कवि…