राम सत्व में, विस्थापित दलित शोषित उत्थान कृत संकल्पित राम अनुपमा, स्वार्थ तज्य अनुज्ञ सिद्धांत । उपेक्षित एकता प्रेरणा पुंज, अनुग्रह तत्पर सदैव क्लांत । आत्म गौरव पुनःअभिमंडन, स्फूर्ति शक्ति संचेतन आह्वान । राम सत्व में, विस्थापित दलित शोषित उत्थान ।। जन भावना सहर्ष स्वागत, पर पक्ष व्यंजना नीति रीति । साधन साध्य नैतिक…
गुरु ( Guru ) गुरु तुम दीपक मैं अंधकार , किए हैं मुझपे आप उपकार, पड़ा है मुझपर ज्ञान प्रकाश, बना है जीवन ये उपवास, करें नित मुझ पर बस उपकार , सजे मेरा जीवन घर द्वार, गुरु से मिले जो ज्ञान नूर, हो जाऊं मैं जहां में मशहूर गुरु…
हुंकार की कवितायेँ 23. रिश्ते बहुत मजबूत रिश्ते थे, कि कुछ कमजोर लोगो से। निभाते तो भला कैसे, कि कुछ मजबूर लोगो से। कशक थी दिल मे जो मेरे ,बताते तो भला कैसे। बडे बेबस थे हम जुड के, कुछ मशहूर लोगो से। बडे ही सख्त लहजे मे, हमे इल्जाम दे कर के। मोहब्बत को…
जेवर ( Jewar ) रत्न जड़ित आभूषण जेवर मनमोहक लगते रखड़ी बाजूबंद बोरला गले में सुंदर हार सजते छम छम पांवों की पायल नथली के नखरे न्यारे हाथों में मुद्रिका मनोहर कानों में झुमके प्यारे स्वर्ण आभूषण जड़ित कंगना भी कहर ढहाते हैं जेवर जो आकर्षण भर पिया के मन को भाते…
ओम बन्ना का धाम निराला ( Om banna ka dham nirala ) पूरी-दुनिया में है अनोखा वह एकमात्र ऐसा स्थान, मोटर-साइकिल को पूजते है जैसे पूजते भगवान। बुलेट-बाबा की बुलेट ने सबको कर दिया है हैरान, आज भी जिसमे बसी है श्री-ओमबन्ना की जान।। वो रहस्यमयी सच्ची-कहानी अब बन गया है धाम, काले रंग…
पुष्प की अभिलाषा ( Pushp ki abhilasha ) मै हूँ एक छोटा सा यह फूल, निकल आता पौधे पर फूल। पहले होता में बाग व बग़ीचे, आज लगाते घर गमले बग़ीचे।। मैं एक फूल अकेला हूँ ऐसा, खिलते तोड़ लिया मुझे जाता। वन माली मुझको पानी है देता, खाद और रखवाली भी करता।। कभी-कभी…