अकेलापन ( Akelapan ) आज कल अकेलापन महसूस कर रहा हूं ना जाने क्यूं ऐसा लगा दादी की कहानी दादा जी का लाड मां की ममता ओर खोया बहुत चिढाचारी का खेल जोहड़ के किनारे रिपटना गुल्ली डंडा बेट बोल का खेल सब खो गया ईंटों से घर बनाना रेत से घर बनाना सब…
नारी : एक स्याह पक्ष ! ( मंजूर के दोहे ) ******* १) नारी नारी सब करें, किसी की यह न होय। उद्देश्य पूर्ति ज्यों भयो, पहचाने ना कोय।। २) नारी सम ना दुष्ट कोई, होवे विष की खान। दयी लयी कुछ निपट लो,संकट डाल न जान।। ३) त्रिया चरित्र की ये धनी,करें न कभी…
किताब ( Kitab ) पन्ने फड़फड़ाते रहे और हम लिखते रहे किताब जिंदगी की मगर,सियाही ही खत्म सी होने लगी कलम की किताब भी रह गई अधूरी की अधूरी ही शब्दों के मायने बदलते गए बदलते हुए अपनों की तरह बह गईं किश्तियां भी उम्मीदों की रह गए निखालिस टूटते हुए सपनों की तरह…
बनना है मुझे सैनिक! ( Banna hai mujhe sainik ) बनना है मुझे सैनिक बन करके दिखा दूँगा, सरहद की हिफाजत में मैं प्राण लुटा दूँगा। प्यारा है वतन मेरा, प्यारा है चमन मेरा, मैं कूच करूँ पहले नभ-थल को नमन मेरा। गर जंग हुई लाजिम श्मशान बना दूँगा, सरहद की हिफाजत में मैं…
भारत का डंका ( Bharat ka danka ) भारत का डंका बजता था, विश्व गुरु कहलाता था। मेरा देश स्वर्ण चिड़िया, कीर्ति पताका लहराता था। ज्ञान विज्ञान धर्म आस्था, नीति नियम योग आचार। मानवता प्रेम समर्पण, जन-जन भरा था सदाचार। कला कौशल वीरता भरी, स्वाभिमान सिरमौर रहा। संत सुरों की पावन भूमि, ज्ञान भक्ति…
नैया ला मोर तार देना मेहा आएवं गणेश तोर दुवारी।करइया तैं हावस मुसवा के सवारी।।विपदा ला मोर गणपति जी टार देना।नैया ला मोर गणपति जी तार देना।। अरजी करथवं मेहा महाराज तोर।छाए हावय अंधियारा सब्बो ओर।।मोला तेहा गणपति जी उबार देना।नैया ला मोर गणपति जी तार देना।। पूजथे तोला गजानन सरी संसार।हावस विघ्नहर्ता दया सागर…