पानी पानी हर तरफ़

पानी पानी हर तरफ़

पानी पानी हर तरफ़

दिख रहा है आज हमको पानी पानी हर तरफ़
कर रहा है ख़ूब बादल मेहरबानी हर तरफ़

बेतकल्लुफ़ होके दोनों मिल न पाये इसलिए
बज़्म में बैठे थे मेरे खानदानी हर तरफ़

तोड़कर वो बंदिशें वादा निभाने आ गया
कर रहे थे लोग जब के पासबानी हर तरफ

तेरे जैसा दूसरा पाया नहीं हमने कहीं
ढूँढ कर देखा है हमने तेरा सानी हर तरफ़

इक ग़लतफहमी को उसने तूल इतना दे दिया
फैलती ही जा रही है यह कहानी हर तरफ़

जिस तरफ़ भी मन किया हम उस तरफ़ ही चल पड़े
जेब में पैसे हैं तो है दाना पानी हर तरफ़

बस यही इक बात अपने दुश्मनों को चुभ रही
कर रहे कैसे तरक्क़ी हिंदुस्तानी हर तरफ़

तोड़ डाला सूर्य ने जब बादलों का चक्रव्यूह
छा गई हर रुख पे साग़र शादमानी हर तरफ़

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • तिरंगो से सज़ा देखो वतन है | Tirango se Saja

    तिरंगो से सज़ा देखो वतन है  ( Tirango se saja dekho vatan hai )    तिरंगो से सज़ा देखो वतन है गुलों से यूं भरा अपना चमन है सलामत ए ख़ुदा रखना हमेशा वतन का जो हसीं मेरे फ़बन है नहीं आये कभी कोई मुसीबत वतन में रब सदा रखना अमन है किसी में बू…

  • कितने आलोक समाये हैं | Kitne Alok

    कितने आलोक समाये हैं ( kitne alok samay hai)    तुमने जो निशिदिन आँखों में आकर अनुराग बसाये हैं हम रंग बिरंगे फूल सभी उर-उपवन के भर लाये हैं हर एक निशा में भर दूँगा सूरज की अरुणिम लाली को बाँहों में आकर तो देखो कितने आलोक समाये हैं प्रिय साथ तुम्हारा मिलने से हर…

  • मिजाज | Mijaaj

    मिजाज एक लम्हे में कैसे मिजाज बदल लेते हैं, यह जहां पल में रिश्ते तमाम बदल लेते हैं। इतनी जल्दी तो मौसम भी नहीं बदला करते, यह ऐसे बदलते जैसे लिबास बदल लेते हैं। एहसास-ओ-जज़्बात से खाली हो गए हैं सारे, ये मतलब के लिए तो ख़्याले-मीरास बदल लेते हैं। तुम उनको जवाब देकर तो…

  • किसको दिल की पीर सुनाएं

    किसको दिल की पीर सुनाएं एक ख़ता की लाख सज़ाएं।किसको दिल की पीर सुनाएं। कोई नहीं इब्न-ए-मरियम सा।ज़ख़्म जिगर के किसको दिखाएं। जान ही जाते हैं जग वाले।राज़-ए-मुह़ब्बत कैसे छुपाएं। नफ़रत के सहरा में आओ।उल्फ़त के कुछ फूल खिलाएं। ख़ाली से बेगार भली है।मुफ़्त न अपना वक़्त गंवाएं। क़रिया-क़रिया पेड़ लगा कर।आबो-हवा को मस्त बनाएं।…

  • भला क्या माँगा

    भला क्या माँगा तुझ से दिलदार से मैंने भी भला क्या माँगातेरे जलवों से शब-ए-ग़म में उजाला माँगा तेरी रहमत ने जो भी फ़र्ज़ मुझे सौंपे हैंउनको अंजाम पे लाने का वसीला माँगा हर ख़ुशी इनके तबस्सुम में छुपी होती हैरोते बच्चों को हँसाने का सलीक़ा माँगा तू है दाता हैं तेरे दर के भिखारी…

  • हवा में उड़ा दीजिए | Ghazal Hawa mein Uda Dijiye

    हवा में उड़ा दीजिए  ( Hawa mein Uda Dijiye )   साज़े-दिल पर ग़ज़ल गुनगुना दीजिए शामे-ग़म का धुँधलका हटा दीजिए ग़म के सागर में डूबे न दिल का जहाँ नाख़ुदा कश्ती साहिल पे ला दीजिए एक मुद्दत से भटके लिए प्यास हम साक़िया आज जी भर पिला दीजिए इल्तिजा कर रहा है ये रह-रह…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *