Pyar Mein

प्यार में | Pyar Mein

प्यार में

( Pyar Mein ) 

 

प्यार में वो हुआ जुदा आज़म
कर गया खूब दिल ख़फ़ा आज़म

ग़ैर आँखें वो कर गया है आज
वो रहा अब न आशना आज़म

ज़हर मुझको मिला जफ़ा का ही
प्यार की कब मिली दवा आज़म

जुल्म सहता रहा मुहब्बत के
कब वफ़ा में मिली वफ़ा आज़म

प्यार का फूल कब मिला उससे
रोज़ मुझको मिला गिला आज़म

तोड़ कर जा चुका वहीं रिश्ता
वो न मेरा सनम बना आज़म

ज़ीस्त से दूर हर मुसीबत हो
रोज़ होठों पर ये दुआ आज़म

 

शायर: आज़म नैय्यर
(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

भारत प्यारा | Bharat Pyara

Similar Posts

  • हमें आपसे | Ghazal Hame Aapse

    हमें आपसे  ( Hame Aapse ) हमें आपसे अब शिक़ायत नही है । मगर अब किसी से मुहब्बत नही है ।।१ झुके सिर हमारा किसी नाज़नी पे । अभी इस जहाँ में वो सूरत नहीं है ।।२ जिसे चाहने में भुलाया खुदी को । वही आज कहता हकीकत नही है ।।३ कसम आज अपनी उसे…

  • कुछ नज़ीरों से

    कुछ नज़ीरों से ये बात आज भी साबित है कुछ नज़ीरों सेगये हैं शाह सुकूँ माँगने फ़क़ीरों से क़दम बढ़ाने से मंज़िल करीब आती हैउलझ रहा है तू क्यों हाथ की लकीरों से बहुत दिनों से है बरबाद ज़िन्दगी अपनीलड़ाई कितनी लड़ें अपने हम ज़मीरों से किया है सामना कुछ यूँ भी तंग दस्ती कालिबास…

  • सुमन सिंह याशी की ग़ज़लें | Suman Singh Yashi Poetry

    ठोकर लाखों खाई  होगी ठोकर लाखों खाई  होगी । तब आख़िर टकराई होगी। ऐब गिनाने से पहले तुम ढूंढों, कुछ अच्छाई होगी II कितनी उम्मीदें आँखों में I पलती ले अंगड़ाई  होगी II जब आँखें ही मोल न समझे I तब आवाज उठाई होगी II यार खिलौना दिल मत समझो। एक दिन सब भरपाई होगी।।…

  • हम हैं | Ghazal Hum Hain

    हम हैं ( Hum Hain ) नज़र शल है,जिगर ज़ख़्मी है फिर भी ख़ंदाज़न हम हैं। न जाने किस लिए उनकी मुह़ब्बत में मगन हम हैं। हमारे नाम से मनसूब है हर एक जंग-ए-ह़क़। मिसालें जिनकी क़ायम हैं वही लख़्त-ए-ह़सन हम हैं। तनाफ़ुर के अंधेरों को मिटाने की ख़ता क्या की। फ़क़त इस जुर्म पर…

  • यूं ही रखना सदा ख़याल अपना।

    यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। दूर जाकर भी ख़ुश जमाल अपना।यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। जो भी है आपका ही है वल्लाह।हम को कुछ भी नहीं मलाल अपना। कुछ तो बतलाओ ऐ तबीब-ए-दिल।ह़ाल कैसे हो अब बह़ाल अपना। कौन देखेगा माहो-अन्जुम को।छत पे आ जाए गर हिलाल अपना। ह़ालत-ए-ह़ाल भूल जाओगे।हम दिखा दें…

  • इस तरह याद आया न कर

    इस तरह याद आया न कर तू मुझे इस तरह याद आया न करमेरी ही धुन में तू वक़्त ज़ाया न कर तेरी महफ़िल में चल के अगर आ गयातो नज़र मुझसे दिलबर चुराया न कर गुल में भी तू नज़र आए जान-ए- ग़ज़लहर किसी के दिलों को यूँ भाया न कर काफ़िया हूँ मैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *