बड़ा गुणकारी है पपीता | Papita

बड़ा गुणकारी है पपीता

( Bada gunkari hai papita ) 

 

नही फलों का राजा ‌है पर महाराजा से कम नही,
बड़ा गुणकारी फल है ये हम बात बता रहें सही।
सुबह रोज़ाना इसको खाने से फ़ायदे होते है कई,
बढ़ती आयु के संकेतों को कम करता‌ है यही।।

इसी विषय पर लिखीं है हमनें आज यह कविता,
भरपूर मात्रा में होते पौषक तत्व नाम है पपीता।
है स्वास्थ्यवर्धक अनेंक बीमारियां दूर यह करता,
साल के १२ महिनों मिलता ये फल है पपीता।।

साधारण सा फल है यह कब्ज़-अपच करता दूर,
पोटेशियम कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन फाइबर भरपूर।
शुगर विटामिन ए एवं सी भरा है इसी में ये प्रचुर,
कील मुंहासे एवं झाइयां चेहरे से करता है दूर‌।।

है हितकारी ऑंखों के लिए भी एवं पीलिया रोग,
दांतो के लिए भी है फायदेमंद और रतोंधी रोग।
राम बाण है डायटिंग वालें हर व्यक्तियों के लिए,
कोलेस्ट्रॉल भी कम करके ये बनाता है निरोग।।

मासिक परेशानी में देता है ये स्त्रियों को आराम,
इम्यून सिस्टम मजबूत बनाना पपीता का काम।
गठिया रोग और ब्लड शुगर ये करता है कन्ट्रोल,
कैंसर किडनी स्किन वाले भी लेवें सुबह शाम।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • दो अज़नबी एक रात

    दो अज़नबी एक रात पूँछ ले ऐ मुसाफ़िर रात की तन्हाई का सहारा lकलम कह उठेगी देख आसमान में चमकता सितारा llचाँद भी ऐंठकर चिल्ला उठता है lजब मेरे संघ एकऔर चाँद दिखता है ll चाँद ने पूँछा किसओर है चित lबीते पलकी ओर है पूँछ मत llकह दो ,ढलती रात में बढ़ता अंधेरा है…

  • उठ जागो मेरे भगवान | Uth Jaago mere Bhagwan

    उठ जागो मेरे भगवान ( Uth jaago mere bhagwan )   उठ जागो…उठ जागो…उठ जागो, उठ जागो मेरे भगवान, उठ जागो। तेरे द्वार खड़ा मैं इंसान, उठ जागो, मेरे निकल ना जाएं प्राण, उठ जागो। मेरी जान में आ जाएं जान, उठ जागो, उठ जागो मेरे भगवान…।।1।। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में, देवशयनी पावन…

  • दर्द ए दास्तां कोयल की | Koyal par Kavita

    दर्द ए दास्तां कोयल की ( Dard – e – dastan koyal ki )    दर्द ए दास्तां कोयल बोली ईश्वर ने दी प्यारी बोली। रंग तो काला कर डाला कैसी खेली आंख मिचोली। कोई कहे बसंत की रानी मधुर तान लगती सुहानी। रंग वर्ण मोहे श्याम मिला शर्म से हो गई पानी पानी। तन…

  • मैं

    मैं –> मैं हुँ तो सब कुछ है, नहीं तो कुछ भी नहीं || 1.मैं हुँ तो चाँद सूरज सितारे, बादल आसमान सब है | मैं हुँ तो नादियाँ झील झरने, सागर और किनारे सब है | मैं हुँ तो पर्वत वृक्ष वादियाँ, घनेरे जंगल चट्टान सब है | मैं नहीं तो क्या पता क्या…

  • औरत समपर्ण है | Aurat Samarpan Hai

    औरत समपर्ण है ( Aurat Samarpan Hai )   औरत को एक जन्म में समझना चाहते हो ग़लत फ़हमी में हो औरत को समझने के लिये एक जन्म नहीं, कई जन्म चाहिए औरत का दिल समन्दर की तरह है मोम की तरह है, पत्थर की तरह है औरत समपर्ण है आकर्षण है पारे जैसा दर्पण…

  • उठो पार्थ | Kavita utho parth

    उठो पार्थ (  Utho parth )     उठो पार्थ प्रत्यंचा कसो महासमर में कूद पड़ो। सारथी केशव तुम्हारे तुम तो केवल युद्ध लड़ो।   धर्म युद्ध है धर्मराज युधिष्ठिर से यहां महारथी महाभारत बिगुल बजाओ उद्धत होकर हे रथी।   कर्ण भीष्म पितामह से महायोद्धा है सारे भारी। धनंजय धनुष बाण लेकर करो युद्ध…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *