कस्तूरी गंध ( Kasturi Gandh ) तुमको क्या मालूम कि, कितना प्यार किया करती हूं। ठोकर खाकर संभल-संभल,कर सदा बढ़ा करती हूं।। रुसवा ना हो जाए मोहब्बत की ये, दुनियां हमारी। मिले उमर लंबी इसको ये, दुआ किया करती हूं।। आशाओं के दीप जलाएं ,हृदय अंधेरी कुटिया। बाती बन में जली प्रियतम, सदा तुम्हारी सुधियां।।…