तेरी प्रिय प्रतिभा की मैं रूबाई हूॅ

तेरी प्रिय प्रतिभा की मैं रूबाई हूॅ

तेरी प्रिय प्रतिभा की मैं रूबाई हूॅ

कुछ लिखिए, तो मैं भी लिखूँ,
कल से कुछ लिख नहीं पाई हूँ।

सानिध्य ले त्रिवेणी संगम बनूँ,
कुछ बेहतरीन की सोच आई हूँ।

जिक्र न मेरा न तुम्हारा होगा
प्रथम स्थान की परछाई हूँ,

परिवेष्टित स्नेहिल सा संसार,
नेह में आकण्ठ बहुत हरषाई हूँ।

यदा मिले याद करती रहती तुझे,
पर कदा की थाह कभी न पाई हूँ।

जिज्ञासु ढूँढने लगती जब अनुभव,
कहाँ थी तू अब कहाँ परछाई हूँ।

थे गुमनाम हम नाम बनाते रहे,
भटके यौवन की मैं तरुणाई हूँ।

बलवान वक्त के सम्मुख प्रखर,
अब व्यक्तित्व अमिताभ पाई हूँ।

दूर,बहुत दूर तक जाना मुझको,
बॅध नहीं पाऊॅ मैं तो अंगड़ाई हूँ,

आतुर मन करता नित घोर श्रम,
तेरी प्रिय प्रतिभा की मैं रूबाई हूँ।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

यह भी पढ़ें :-

हुई पस्त मैं | Past Hui Main

Similar Posts

  • मौसम गर्मी का

    ?मौसम गर्मी का ?   अब तो तैयारी कर लो मौसम है आया गर्मी का। देखो त्याग कर दिया है इस धूप ने भी नर्मी का।।   कहां बूंद शबनमी के वो मंज़र सुहाने कोहरे के! ना ही सर्द वो हवाएं ना नामो-निशां नमी का।।   मंजर हुए सुनहरे खेतों तालाबों झील के। ज्यूं श्रृंगार…

  • राम मंदिर महोत्सव | Kavita Ram Mandir Mahotsav

    राम मंदिर महोत्सव   सुन लो सुन लो सारे जग वालों, आपस में लड़ने वालों, रहो ईमान से। राम आए हैं बताने ये जहान से।। राम मंदिर बना है बड़ा सुंदर, भारत में है महोत्सव , अवधपुर की शान से । आशा जागी हैं श्री राम भगवान से। भारत में आईं हैं खुशियां सुहानी, भारत…

  • हद कर दी आपने | Geet had kar di aapne

    हद कर दी आपने ( Had kar di aapne )   वादे प्रलोभन भारी, नित्य नियम बदले सरकारी। नेताओं की लीला न्यारी, चमचे आला अधिकारी। हद कर दी आपने, हद कर दी आपने।   सड़क पुल नदियां निगले, निगल रहे हैं वोट। फन फैलाए विषधर बैठे, करते विषैली चोट। सत्ता के गलियारों में, मिल जाएंगे…

  • sad shayari in hindi || तुम इतनी कठोर

    तुम इतनी कठोर ( Tum Itni Kathor )   तुम इतनी कठोर कैसे हो सकती हो..? क्या भूले से भी मेरे नाम से तुम्हारा दिल नहीं धड़कता…..   तुम्हारे दिल में मेरे लिए थोड़ा सा भी प्रेम नहीं है क्या जो इतनी बे-मुरोव्वत बन गई हो….   एक हमारी हालात है कि एक पल का…

  • सूर्योदय | Suryoday par kavita

    सूर्योदय ( Suryoday )   पूरब में छा गई लाली धूप खिली है मतवाली। रश्मि रथ पर हो सवार सूर्योदय छटा निराली।   पंछी कलरव गीत गाते भंवरे मधुबन लहरी गाई। भोर की बेला मुस्काती सूर्योदय हुआ जागो भाई।   सूरज किरणें धरती छाई शुभ प्रभात बेला आई। हरियाली ने पांव पसारे मधुर मधुर बही…

  • धुंआ | Dhuaan

    धुंआ ( Dhuaan )   धुंये के कितने रंग…|| 1.उठता है ऊपर आसमान, छूने का जनून होता है | उसे देखकर लोगों मे, हलचल सा शुरूर होता है | भीड जमा होती है, जाने कितने सबाल होते हैं | धुंआ कहाँ से उठा है, पता कर के निहाल होते हैं | धुंये के कितने रंग…||…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *