Poem amar prem ki amar kahani

अमर प्रेम की अमर कहानी | Poem amar prem ki amar kahani

अमर प्रेम की अमर कहानी

( Amar prem ki amar kahani )

 

 

एक दीन साधारण सा इंसान पर इरादे थे फौलादी

विशाल पर्वत का सीना चीरकर की उसने मुनादी

 

अथाह प्रेम की पराकाष्ठा का दिया उसने निशानी

बिहार की पावन भूमि के लोगों को याद हुई जुबानी

 

दिन हीन दशरथ मांझी प्रेयसी थी फाल्गुनी देवी

प्रेमवश पर्वत के पर्वत के पार जाती थी प्रेम की देवी

 

क्रूर काल ने मजबूत चट्टानों से दिल के टुकड़े छीना

प्यार में पागल होकर विशाल पर्वत काटने को ठाना

 

वो प्रेमी असाध्य को भी साधने चला वो प्रेम का मतवाला

दाशरथी ने पत्नी मृत्यु के कारण को ही समूल मिटा डाला

 

कैसा भी मौसम हो आंधी हो या तूफान हो वो  डटा रहा है

बाइस वर्षों की लंबी तपस्या में अनवरत बिना थके जुटा रहा है

 

कोई नही था उसके इस पागलपन में अकेला सधा रहा

छेनी की छनछन में पायल की धुन वह सुना करता रहा

 

दुष्कर कार्य उपहासिक कार्य भी सहज कर दिखाया

ऊंचे पथरीले विशाल पर्वत श्रृंखला को काट राह बनाया

 

प्रेरित होता रहेगा याद करता रहेगा तुम्हें  ये जमाना

अदम्य साहसी इन्सान की कहानी पढ़ेगा ये जमाना

🍂

कवि : राजेन्द्र कुमार पाण्डेय   “ राज 

प्राचार्य
सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
बागबाहरा, जिला-महासमुन्द ( छत्तीसगढ़ )
पिनकोड-496499

यह भी पढ़ें :-

हवाओं में तेरी खुशबू है | Romantic poem in Hindi

Similar Posts

  • तुम उस शर्वरी पढ़ते

    तुम उस शर्वरी पढ़ते खत मेरा अंततः तक,काश ! तुम उस शर्वरी पढ़ते,प्रेम का एक नव रूप,काश ! तुम विभावरी गढ़ते।तुम अगर पढ़ते तो शायद,फैसले आज कुछ और होते,देह से भले विलग रहते,किन्तु ह्रदय से एक रहते।प्रिय ! निर्णय तुम्हारा सहजरूपी,निर्मित ताज होता,शीश मैं झुकाती,पूर्ण सब अभिषेक होते।सोपान उस दिन प्रणय का,काश ! तुम दो…

  • कर्म ही धर्म है | Karm hi Dharam

    कर्म ही धर्म है ( Karam hi dharam hai  )   मैं धार्मिक आदमी हूं मुझे पसंद है मिट्टी की मूर्तियां मंदिर मस्जिद- गिरिजा गुरूद्वारा बनाना स्तुतियां करना धार्मिक परंपराओं को निभाना टीवी मीडिया में दिखाना बढ़ा चढ़ाकर बताना किसी अन्य चीज पर कभी ध्यान न देना बस अपने अल्लाह गाॅड भगवान में व्यस्त रहना…

  • अनुबंध | Anubandh

    अनुबंध ( Anubandh )   रिश्ता है अनमोल भाई बहन का ये नही बंधन महज एक कलाई का ये त्योहार नही है फकत राखी का बहन के लिए भाई है साथ बैसाखी का जन्मों जन्मों के बाद ये रिश्ता बनता है रिश्तों के आंगन मे बन पुष्प खिलता है उम्रभर निभाने का ये तो एक…

  • प्रेम की गंगा नहाऊँ | Prem ki Ganga Nahaoon

    प्रेम की गंगा नहाऊँ कि जिसकी प्रीत का दीपक जलाऊं, उसी के प्रेम की गंगा नहाऊँ। वो मेरा श्याम है सुंदर सलोना उसी की बावरी राधा कहाऊं।। वो मेरा देव मैं बन कर पुजारन, उसी को मन के मंदिर में सजाऊं। लगन ऐसी लगी उस बावरे से, उसी से रूठ कर उसको मनाऊं। बिना देखे…

  • पहली महिला शिक्षिका | Savitribai Phule par kavita

    पहली महिला शिक्षिका ( Pahli mahila shikshika )   भारत-भूमि पर किया जिसने ऐसा काम, माता सावित्री बाई फुले आपको प्रणाम। नारी सशक्तिकरण की तुम बनी मिशाल, गुरूओं में पूजा जाएंगा आपका ये नाम।। देश की पहली महिला शिक्षिका है आप, लड़कियां भी पढ़ें ऐसे आपके थें ख़्वाब। रुढ़िवादी सोच के कारण यातनाएं ‌झेली, आपकी…

  • 78वाँ स्वतंत्रता दिवस | 78th Independence Day

    78वाँ स्वतंत्रता दिवस ( 78th Independence Day ) आजादी पर्व पर चेतन निज घट में रमना हैं । क्या खोया क्या पाया उसका चिन्तन करना हैं । आजादी पर्व पर चेतन – ।।ध्रुव ॥ हमारा अवचेतन मन है ऐसा संग्राहलय । जिसे कहते है सुचिन्तित विचारों का आलय।। आजादी पर्व पर चेतन – ।।ध्रुव ॥…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *