Poem Bhakt Se Bhagwan

भक्त से भगवान | Poem Bhakt Se Bhagwan

भक्त से भगवान 

( Bhakt se bhagwan )

 

भक्त से भगवान का

रिश्ता अनोखा होता हैl

जब जब बजेगी बांसुरिया

राधा को आना होता हैl

द्रौपदी की एक पुकार पर

वचन निभाना पड़ता हैl

लाज बचाने बहना की

प्रभु को आना पड़ता हैl

मीरा के विश के प्याले को

अमृत बनाना पड़ता हैl

कृष्ण है मेरे ऐसे भोले

मोर मुकुट पीतांबर धारी

कमल नयन शेष सैया धारी

ध्रुव की भक्ति देख उन्हें

गोदी में बिठाना पड़ता हैl

भक्त प्रहलाद की खातिर

नरसिंह रूप आना पड़ता हैl

कभी सारथी बनके अर्जुन

को मार्ग बताना पड़ता हैl

मित्र सुदामा के खातिर

कच्चे अक्षत खाना पड़ता हैl

गायों की रक्षा के खातिर

ग्वाला बनना पड़ता हैl

गोपियों को मन में बस ने

माखन चुराना पड़ता हैl

यशोदा का लाल बनने

रस्सी में बंधना पड़ता है l

यमुना का जल नीरव करने

शेषनाग से लड़ना पड़ता हैl

❣️

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

पिता | Pita par kavita in Hindi

Similar Posts

  • पेड़

    पेड़ ?   पत्र पुष्प फलादि माया कौन देता। पेड़ न होते तो छाया कौन देता।।   बगीचों को काट रेगिस्तान न कर, प्राण वायु जो खपाया कौन देता।।   पेड़ों में भी जान है जहान भी है, चूल्हे में लकड़ी लगाया कौन देता।   “दसपुत्र समद्रुमः”शेष बतलाते हो, औषधी जीवन बचाया कौन देता।  …

  • एकता व देश प्रेमी लौहपुरुष | Loh purush par kavita

    एकता व देश प्रेमी लौहपुरुष ( Ekta va desh premi loh purush )    काश अगर मैं एक गायक होता, हमारे सामने भी एक माइक होता। माइक वह पूरा लोहे का ही बना होता, लोहा सरदार वल्लभभाई पटेल को कहा जाता ।।   उनकी याद में हम-सब फूल चढ़ाते, अन्याय यह बिलकुल सहन नही करतें।…

  • समर | Samar

    समर ( Samar )    हर दर्द की दवा नहीं मिलती हर डालियों में फूल नहीं खिलते हर चमन से आती है बहार, मगर हर चमन को माली नहीं मिलते कभी और से तो कभी खुद से भी सफल शुरू करना जरूरी होता है जरूरी है उजाला भी रात के अंधेरे में मगर चांद से…

  • हरिशंकर परसाई | Harishankar Parsai

    हरिशंकर परसाई ( Harishankar Parsai )    बाईस अगस्त चौबीस में लिया जन्म जिला होशंगाबाद, दस अगस्त पिचानवे पाई वफात रहे जीवन भर आबाद। हंसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे हैं संग्रह कहानी, जवाला और जल, रानी नागफनी नावल है उनकी जुबानी। प्रेमचंद के फटे जूते,आवारा भीड़ के खतरे ये भी संग्रह निबंध…

  • बोले कोयलिया | Bole koyaliya

    बोले कोयलिया ( Bole koyaliya )   कोयलिया कुहू कुहू बोले। वन उपवन में लता कुंज में, मधुरस के घट खोले। पवन बह रही है बासंती, करती जनरुचि को रसवंती, बौराई अमराई सारी, मादकता सी घोले। हुई मंजरित डाली डाली, मुग्ध भाव से देखे माली, एक-एक तरु की फलता को, मन ही मन में तोले।…

  • चलता अयोध्या नगरिया | Chalta Ayodhya Nagariya

    चलता अयोध्या नगरिया ( Chalta Ayodhya Nagariya )    सुना सइयाँ आवत बा होली, चलता अयोध्या नगरिया। (4) रामजी कै देखित सुन्दर मुरतिया, मरलो पे बिसरी न ओनकर सुरतिया। भरि जात अपनों ई झोली, चलता अयोध्या नगरिया, सुना सइयाँ आवत बा होली। तन-मन रंग -रंगीला होई जाई, चलत डहरिया न गोड़वा दुखाई। नाहीं बाटी नई-नबेली,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *