Akshay Tritiya

अक्षय तृतीया शुभ दिन | Akshay Tritiya

अक्षय तृतीया शुभ दिन

( Akshay Tritiya Shubh din )

 

अपने नाम के अनुरूप अक्षय तृतीया शुभ दिन,
सूर्य-चंद्रमा उच्च राशि में रहते अपनी इस दिन।
विवाह गृहप्रवेश व व्यापार आरंभ करें इस दिन,
है अबूझ मुहूर्त और पुण्य फल वाला यही दिन।।

महत्वपूर्ण है इसदिन का किया दान और स्नान,
प्रभु विष्णु लक्ष्मी का पूजन होता विधि विधान।
हरवर्ष बैसाख माह शुक्ल पक्ष तृतीया में आता,
इसी दिन अवतार लिया परशुराम जी भगवान।।

है भगवन विष्णु के एक छठे आप ऐसे अवतार,
अष्टजीवित महापुरुषों में परशुरामजी भगवान।
अक्षय तृतीया पे करते जो किसी चीज़ का दान,
चार धाम तीर्थ स्थल जैसा मिलता फल समान।।

शास्त्रों ने भी इसदिन को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना,
मंगलमय होता वह कार्य जिसने ‌इसदिन ठाना।
24 रूपों में लिया धरा पर देवताओं ने अवतार,
इसदिन पवित्र नदियों में स्नान को महत्व माना।।

अनजानो में पापों का दान से बोझ हल्का होता,
इसीदिन मिला आशीष बेहद फलदायक होता।
चार-धाम उल्लेखनीय बद्रीनारायण पट खुलता,
वृंदावन में बिहारी जी के दर्शन सभी को ‌होता।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • वही खत वही दीवानगी चाहिए

    वही खत वही दीवानगी चाहिए वही खत वही दीवानगी चाहिए दोस्त बचपन का वह सादगी भरी जिंदगानी चाहिए खेल सकुं गुल्ली डंडा, छुपन छुपाई, गुड्डे गुड़ियों के साथ ऐसी वर्दान कि रब से मेहरबानी चाहिए वही खत वही,,,,,,, नहीं चाहिए माया ममता नहीं मकड़जाल कि जिंदगानी चाहिए वह खेल वह बचपन वह गांव कि हावा…

  • हम कब जागेंगे | Hum kab Jagenge

    हम कब जागेंगे? ( Hum kab jagenge )  अपनों की आवाज़ अपनों के खिलाफ बुलंद कराते हैं.. कुछ टुकड़े फेंक ललचाते हैं और हम, आपस में टकराते हैं! जाल यही हुक्मरानों की चाल यही राजघरानों की हमें बांट, लहू ये पीते हैं और लाशों पर फख्र से जीते हैं उनकी चालों के हम मुहरें हैं…

  • मानव अधिकार दिवस | Manav Adhikar Divas

    मानव अधिकार दिवस ( Manav Adhikar Divas )   मानवता के मूल में, देवत्व का परम भाव लख चौरासी योनि श्रंखला, मनुज अवतरण विशेष । नैतिक आभा शीर्ष पद, चाह सर्वत्र आनंद अधिशेष । हिय अनुभूत परस्पर स्वर , दया अनुग्रह अपनत्व छांव । मानवता के मूल में, देवत्व का परम भाव ।। सृष्टि हर…

  • राम का गलत वनवास हुआ | Kavita Ram ka Vanvas

    राम का गलत वनवास हुआ ( Ram ka Galat Vanvas Hua )   हमें कुछ ऐसा एहसास हुआ राम का गलत वनवास हुआ। भरत तो थे नहीं अपने घर में और भी माँए थी उस नगर में। सबकी बनी भी सहमति होती नहीं किसी की कोई क्षति होती। विमाता का स्वार्थ खास हुआ राम का…

  • मां तुम बहुत याद आती हो | Maa ke Uper Kavita

    मां तुम बहुत याद आती हो ( Maa tum bahut yaad aati ho )    पहले मेरी एक मामूली सी छींक पर तुम चिंतित हो जाती थी, डांट डपटकर घरेलू नुस्खों के साथ कड़वी दवा पिलाती थी, अब कोई नहीं जो तबियत पूछे मेरी, मां तुम बहुत याद आती हो। कहीं आते जाते हर बार…

  • खुदीराम बोस | Khudiram Bose

    खुदीराम बोस भारत का जयघोष..बेबाक शब्दों का उदघोष..मनाया बचपन में ही फाँसी का जल्लोष..खुदीराम बोस…खुदीराम बोस…भारत की रक्षा का प्रणतेज पवन वायू का था प्रकंपनपाषाण थाथा वह तीर भाले का निशानस्वतंत्रता संग्राम कास्वतंत्र आकाश..विदेशियों का कालइस नाबालिग युवक ने कर दिए थे ब्रिटिश साम्राज्य के हाल..सीने पर अपने झेले वारगुलामी के ऊपर किया कड़ा प्रहारभारत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *