होली के रंग

होली के रंग | Poem Holi ke Rang

होली के रंग

( Holi ke Rang )

 

होली के इन्द्रधनुषी रंग,
बड़े लाजवाब हैं।

जो ऐंठे रहते हैं हरदम,
और नाक पे गुस्सा,
उनके लिये इस होली में
बढ़िया जवाब है।

रंगों से है परहेज़ जिन्हें,
दुबके पड़े घर पर,
निकलेंगे अगर बाहर
तो खानाखराब है।

ऐ दोस्त मेरे होली-ए-दस्तूर
ग़ज़ब का,
दो दिल मिले और चेहरों पर
छाया शबाब है।

दो दुश्मनों के दिल न मिलें,
लगें चौके पे छक्के
कर लें सलाम आज फिर,
दिन नायाब है।

चिलमन से परी झांकती
खुशियां लिये हज़ार,
शायद लगे है दूसरी
जरीना वहाब है।

मुद्दत के बाद आज फिर
रोशन हुआ आंगन,
लगता जमीं पे फिर से
आया आफ़ताब है।

अब भूलिये शिकवे गिले,
बरसों से हैं बोझिल,
अब होली में तो निकले
ज़रा “आदाब है।”

sushil bajpai

सुशील चन्द्र बाजपेयी

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें :-

होली ‌पुरानी | Kavita Holi Purani

Similar Posts

  • बढ़ई का इतिहास

    बढ़ई का इतिहास प्राचीन सभ्यता से जुड़ा हुआ है बढ़ई का इतिहास,कुशल कारीगरी शिल्प-कला है कारपेंटर के पास।करतें है इनके हृदय भगवान विश्वकर्मा जी निवास,फर्नीचर के कामों में यह लोग कर रहें है विकास।। छिल-छिलकर यह काठ को अद्भुत चीजें बना देते,ना देखा ना सोचा किसी ने मनमोहक रूप दे देते।दिल में उम्मीद लिए यह…

  • गीता ज्ञान | Geeta Gyan

    गीता ज्ञान ( Geeta Gyan )   जब से गीता ज्ञान मिला मुझे भागवत में भगवान मिला, कण कण में जब नारायण तो फिर कण-कण से मुझे ज्ञान मिला! नहीं सर्वज्ञ अंतर्यामी में , ना ही में कुछ जानता हूं मेरे अंदर भी तू है बसा हुआ ! मैं तुझको पहचानता हूं।। देख धनुर्धर अर्जुन…

  • अडिग | Adig

    अडिग ( Adig )    किसको कहे हम खास अपना किस पर जतायें हम विश्वास अपना हर किसी दिल में फरेब है पल रहा किस पर लगाएं हम आश अपना तोड़े हैं वही जिन्हें जोड़ा था हमने छोड़े हैं वही जिन्हें संभाला था हमने बहाये थे आंसू हमने जिनके खातिर वे हि कहते हैं ,उन्हें…

  • हमारे शहर में | Hamare Shahar mein

    हमारे शहर में ( Hamare shahar mein )  ( 36) ‘हमारे शहर में’ प्रायः डाॅक्टर का बेटा डाॅक्टर है, वकील का बेटा वकील मास्टर का बेटा मास्टर है. इसी के अनुसार वधू भी तलाशते हैं , डाॅक्टर के लिए डाक्टरनी प्राथमिकता बताते हैं. कमाने वाली बहू सबकी पहली पसंद है , नकद दस लाख फार्चूनर…

  • पडोसन | Padosan

    पडोसन ( Padosan )    लगा ली छत पें मैने बाग, पडोसन के आते ही। कोई पूछे नही सवाल, लगा ली मैने खूब उपाय॥ मुझे दिन मे दिखता चाँद, पडोसन के आते ही…. सुबह सबेरे योगा करने जब वो छत पर आती है। ठंडी हवा की खुँशबू बन, अन्तर्मन को महकाती है॥ मेरे दिल को…

  • सफर | Kavita Safar

    सफर ( Safar )   हंसाती भी है रुलाती भी है जिंदगी न जाने कितने मोड पर लाती है जिंदगी कटते जाता है सफर दिन रात की तरह मौसम के जैसे बदलती जाती है जिंदगी मिलते हैं अपने भी और पराये भी यहाँ सभी के साथ ही गुजरती जाती है जिंदगी बहते रहना है हमें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *