Poem keh do ye

कह दो ये | Poem keh do ye

कह दो ये

( Keh do ye )

 

दूर के ढोल ,सुहाने अच्छे लगते है।
दिल आये तो,बेगाने अच्छे लगते है॥

 

हंसते हंसते जो फांसी पर झूल गया
हमको वो,दीवाने अच्छे लगते है॥

 

शम्मा को भी पता है,वो जल जाएगा
उसको पर,परवाने अच्छे लगते है॥

 

अपनों से धोखे इतने खाये है
अब तो बस,अंजाने अच्छे लगते है॥

 

उन्हें मुफ्त मोबाइल लैपटाप से क्या
भूखों को तो,दाने अच्छे लगते है॥

 

कहते है बेचारे का, दिल टूट गया
जिसको भी,मैखाने अच्छे लगते है॥

 

इतनी सी ख्वाइश है “चंचल”,अपनी तो
कह दो ये,तराने अच्छे लगते है॥

🌸

कवि भोले प्रसाद नेमा “चंचल”
हर्रई,  छिंदवाड़ा
( मध्य प्रदेश )

 

यह भी पढ़ें : –

जब तक भला किया | Poem jab tak bhala kiya

Similar Posts

  • सावन में मिलन | Kavita Sawn Mein Milan

    सावन में मिलन ( Sawn Mein Milan ) आ गई हुई सावन में कुछ दिनों के लिए मायके। जिया लग नही रहा मेरा अब उनके बिना यहाँ। मिलने की राह में हम बहुत व्याकुल हो रहे। करें तो क्या करें अब की मिलन हमारा हो जाये।। पिया की राह में आँखें उन्हें निहार रही है।…

  • भक्त से भगवान | Poem Bhakt Se Bhagwan

    भक्त से भगवान  ( Bhakt se bhagwan )   भक्त से भगवान का रिश्ता अनोखा होता हैl जब जब बजेगी बांसुरिया राधा को आना होता हैl द्रौपदी की एक पुकार पर वचन निभाना पड़ता हैl लाज बचाने बहना की प्रभु को आना पड़ता हैl मीरा के विश के प्याले को अमृत बनाना पड़ता हैl कृष्ण…

  • हे वागेश्वरी मैया, ऐसा वर दे

    हे वागेश्वरी मैया ,ऐसा वर दे   मृदुल मधुर ह्रदय तरंग, स्वर श्रृंगार अनुपम । विमल वाणी ओज गायन, ज्योतिर्मय अन्तरतम । गुंजित कर मधुमय गान , नव रस लहर मानस सर दे । हे वागेश्वरी मैया,ऐसा वर दे ।। दुर्बल छल बल मद माया, प्रसरित जग जन जन । दे निर्मल विमल मति, तमस…

  • गलत कौन | Galat Kaun

    गलत कौन ( Galat kaun )    औरत ,महिला ,लड़की ,नारी स्त्री बनकर दिखती कितनी बेचारी स्वयं जगाती उर मे काम वासना फिर भी होती वही सिद्ध सुकुमारी.. महिला संग बलात्कार हुआ नारी की इज्जत लूटी गई फलां की बहू बदचलन हुई उसकी लड़की घर से भाग गई… कटि के कुछ नीचे ही पहना वस्त्र…

  • नव वर्ष 2024 | Nav Varsh

    नव वर्ष 2024   हंसी खुशी करते विदा नमन तुम्हें 2023 स्वागत है आपका आइये घर 2024 नव प्रभात की शुभ बेला पर अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा भर दो सब में प्रेम रस बने स्वर्णिम देश हमारा देते हैं आसन कमल पुष्प सा जो है देवों का सिंहासन चतुर्मुखी हो प्रगति हमारी तुमसे मिले यही…

  • राम-राम गूंज गगन में | Ram Ram Goonj

    राम-राम गूंज गगन में ( Ram Ram Goonj Gagan Me )   धनुष की टंकार हुई है, धर्म की जयकार हुई है। अयोध्या सजी संवरी, दीपों की छटा बहार हुई है। राम-राम गूंज गगन में, राम महिमा साकार हुई है। सनातन परचम फहराया, राम नाम झंकार हुई है। मंदिर मंदिर राम पूजा, घर-घर दिवाली आई…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *