Poem meri sanskriti

मेरी संस्कृति | Poem meri sanskriti

मेरी संस्कृति

( Meri sanskriti )

 

है अलग मेरी संस्कृति
नहीं उसमें कोई विकृति

चुटकी भर सिंदूर तेरा
मौन मेरी स्वीकृति

गरिमा बढ़ाती लाल बिंदिया।
विदेशी कर रहे अनुकृति

पायलेे पैरों में मेरे
सुनो उसकी आवृत्ति

तुलसी पर जल चढ़ाएं
यही हमारी प्रकृति

रिश्तो की प्यारी प्रक्रिया
फैला रही है जागृति

हार जाए तो भी हममें
नहीं दिखती कोई विरक्ति

मेरी मिट्टी में समाहित
न जाने कितनी संस्कृति

वेशभूषा भाषा अलग है
फिर भी हममें है अनुरक्ति

टूट जाते माया जाल
यही हमारी है निवृत्ति

❣️

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

कविता परिवर्तन | Kavita Privartan

Similar Posts

  • बात एक कॉल की | Baat ek Call ki

    बात एक कॉल की ( Baat ek call ki )    14 अक्टूबर 14:14 पर कॉल आया, उसी पर मैंने यह हास्य व्यंग बनाया । एक दिन दोपहर में आया मुझे फोन, घंटी उसकी सुनकर हो गया मैं मौन। देखा मोबाइल तो नॉर्मल कॉल आया था, पूजनीय सतीश जी ने कॉल लगाया था। कुछ पल…

  • मन का विश्वास | Kavita man ka vishwas

    मन का विश्वास (  Man ka vishwas )   बवाल बड़ा होता बोले तो हंगामा खडा हो जाता सहता रहा दर्द ए दिल को कब वक्त बदल जाता   वो मुश्किलें आंधियां रोकना चाहे मेरे होसलो को अल मस्त रहा मै सदा खुद को बुलंदियों पे पाता   अड़चनो को रास ना आया राहों पे…

  • और क्रंदन

    और क्रंदन     थकित पग में अथक थिरकन  और क्रंदन। आंसुओं का बरसा सावन और क्रंदन।।   हृदय से उस चुभन की आभास अब तक न गयी। सिंधु में गोते लगाये प्यास अब तक न गयी ।।   बढ़ रही जाने क्यूं धड़कन और क्रंदन । थकित बालक समझ मुझको धूल ने धूलित किया…

  • Kavita | अबोध

    अबोध ( Abodh ) बहुत अच्छा था बचपन अबोध, नहीं  था  किसी  बात का बोध। जहाॅ॑  तक  भी  नजर जाती थी, सूझता था सिर्फ आमोद -प्रमोद।   निश्छल मन क्या तेरा क्या मेरा, मन लगे सदा जोगी वाला फेरा। हर  ग़म मुश्किल से थे अनजान मन  में  होता  खुशियों का डेरा।   हर  किसी  में …

  • सौगंध मुझे है इस मिट्टी की | Desh prem ki kavita

    सौगंध मुझे है इस मिट्टी की ( Saugandh mujhe hai is mitti ki )     सौगन्ध मुझे है इस मिट्टी-की कुछ ऐसा कर जाऊॅंगा, अपनें वतन की सुरक्षा में दुश्मनों को धूल-चटाऊॅंगा, नक्सली हों चाहें घुसपैठी इन सबको मार गिराऊॅंगा। ऑंधी आऍं चाहें तूफ़ान आऍं मैं चलता ही जाऊॅंगा।।   साहस और ज़ुनून के…

  • लो आया राखी का त्यौहार | Geet

    लो आया राखी का त्यौहार ( lo aaya rakhi ka tyohar )   लो आया राखी का त्यौहार, बरसे भाई बहन का प्यार, कच्चे धागों में बसता है, सुहाने रिश्तो का संसार, लो आया राखी का त्यौहार-2   माथे चंदन अक्षत रोली, बहना नेह भरी रंगोली, कलाई पर बांध रही है, बहना अपना प्यार, लो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *