Kavita Privartan

कविता परिवर्तन | Kavita Privartan

कविता परिवर्तन

( Kavita Parivartan )

 

सोचने को मजबूर एक सोच
सुबह के आठ बजे आते हुए
देखा एक बेटी को शौच करते हुए
नजरें मैंने घुमा ली शर्म उसे ना आए
मुझे देख कहीं लज्जित ना हो जाए
बना है घर पर शौचालय नहीं
शादी के लिए सोना तो जोड़ा
पर सुरक्षा के लिए शौचालय नहीं
पर्यावरण भी होता प्रदूषित यही
यह सोच मन में विकसित नहीं
मुद्दे कई होते कोई बोलता नहीं
रात में जाएं बेटियां सुरक्षित नहीं
पढ़ते हैं पेपरों में घटना यही
मिले सरकार से रुपए बराबर
पर शौचालय बन गया
देखो तो उपला घर
बच्चियां बेखौफ बाहर नहीं
सांझ ढले घटती है घटनाएं
आज भी गांव के यही हाल है
समझते नहीं तभी बेहाल हैl समझाइश की इन्हे
सख्त जरूरत हैl
अपराधों, को बढ़ता क्रम थोड़ा कम कर पाए हम
सोना चाहे ना पहनाए
गहने चाहे ना बनवाएं
हादसों को कम करने
घर में शौचालय बनवाएं
पुरानी सोच को आओ
थोड़ा बदल डालो,
कुछ जिम्मेदारी अपनी भी
समझ अपनी इसे निभा दो
पुरानी परंपरा में एक परिवर्तन कर डालो

❣️

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

मॉर्निंग वॉक बनाम पुष्प | Hindi mein kahani

Similar Posts

  • Hindi Poetry | Hindi Kavita | Hindi Poem -विष प्याला

    विष प्याला ( Vish Pyala )   क्रूर हृदय से अपनों ने, जीवन भर  दी  विष प्यालों में। जबतक आग को हवा दी तबतक,शेर जला अंगारों में। कोमल मन के भाव  सभी, धूँ  धूँकर तबतक  जले मेरे, जबतब प्रेम हृदय से जलकर,मिट ना गया मन भावों से।   ** नगमस्तक भी रहा तभी तक, जबतक…

  • गांधीजी के जीवन सिद्धांत

    गांधीजी के जीवन सिद्धांत २ अक्टूबर १८६९ को पोरबंदर में जिसने जन्म लिया,पुतली बाई मां पिता करमचंद ने मोहनदास नामकरण किया,पीर पराई देख जिसकी आंखें और हृदय भर आता था,करूणा दया देख टैगोर ने जिन्हें महात्मा नाम दिया। माता के गुरु श्रीमद राजचंद्र जैन धर्म के अनुयायी थे,गांधीजी के विदेश जाने पर मां के मन…

  • नव वर्ष मंगलमय हो | Nav varsh mangalmay ho 2022

    नव वर्ष मंगलमय हो ( Nav varsh mangalmay ho )   नव वर्ष अति हर्षद् सुखद आनन्दवृष्टिअपार हो। मेरे हृदय में आपका अनवरत साक्षात्कार हो।। नव वर्ष ० उपवन सुगंधित हो सदा अवनी पर हरियाली रहे, मन से कलुष सब दूर हों अमृत भरी प्याली रहे, वसुधा ही अपना कुटुंब है मनस् से यह उद्गार…

  • हे रावी | Kavita Hey Ravi

    हे रावी! ( Hey Ravi ) मुझे जिसकी तक़दीर पे आज भी अभिमान है वो भूखा-नंगा ही सही, मेरा हिन्दुस्तान है इस बांस-बन में छांव का आना है सख्त मना, चांद को भी जैसे यहाँ फांसी का फरमान है अब शहर मांस के दरिया में तब्दील हुआ, इसीके जख़्मो का मवाद अपने दरमियान है कल…

  • Badal par Hindi Kavita | बादल

    बादल! ( Badal )    मेरी मुंडेर की तरफ बढ़ रहा बादल, अरब सागर की तरफ से चढ़ रहा बादल। न जाने कितने क्विंटल पानी से है भरा, तूफानी हवाओं से भी लड़ रहा बादल। सूख चुके तालाब,नदी,डैम न जाने कब के, उनकी चीख- चीत्कार को सुन रहा बादल। सागर की कोख से फिर जन्म…

  • हाय री सरकार | Hi Ri Sarkar

    हाय री सरकार ( Hi Ri Sarkar )    सड़क पर  निकल पड़ी है  नौजवानों की एक भीड़ बेतहासा बन्द मुठ्ठी, इन्कलाब जिन्दाबाद  के नारों के साथ.  सामने खड़ी है एक फौज मुकम्मल चौराहे पर  हाथ में लिए लाठी – डन्डे, आँसू गोले और  गोलियों से भरी बन्दूकें  चलाने के लिए मुरझाये चेहरे वाले  नौजवानों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *