विचारों की शुद्धता | Poem vicharo ki shuddhta

विचारों की शुद्धता

( Vicharo ki shuddhta )

 

विचारों की शुद्धता से हर
नजरिया बदल जाता हैं।
जीवन का कठिन से कठिन
समय भी
हंसते-हंसते कट जाता हैं।
यह विचार ही तो है।
जो हमें अच्छे बुरे
सही गलत, यश अपयश
के बारे में बताते है।
एक राष्ट्र भी न जाने कितने
समूहों, समुदायों,से
मिल कर बनता है
देश पर हम मर मिटने को
सदैव तत्पर और तैयार रहते हैं।
देश से बड़ा ना कोई धर्म होता
ना कोई मजहब, होता है
विपदा की घड़ी में तो
सिर्फ मानवता का ध्यान रहता है।
क्योंकि कोई भी धर्म मानवता से
ऊपर नहीं होता है।
सब के प्रयासों को सफल करना ही
जनकल्याण होता है।
आये सब मिल जुल कर
फिर भारत को विश्व पटल
पर शांति दूत बना दे।

❣️

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

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