Poem azadi ka amrit utsav

मुल्क के सुमन | Poem Mulk ke Suman

मुल्क के सुमन

( Mulk ke suman )

 

हम मुल्क के मासूम सुमन
हम धरती माता के धन

हम कोमल है पर सबल है
धुर्ब जैसे सदैब अटल

गगन उगलता आग हो
छिड़ा मरण का राग हो

लहू का अपना फाग हो
हम वही अनुराग है

क्या कर सकेगा दौरे जमां हमारा
मिट जायेंगें खुद ही हर वक़्त जहाँ के हाथों

जो चाहते हैं मिटाना नामोनिशान हमारा
हम फिर भी वही बाग़ हैं जहाँ से गुलशन बिखरती है

हमें सभी से ममता होगी
नै हमारी छमता होगी

🍀

कवि : आलोक रंजन
कैमूर (बिहार)

यह भी पढ़ें :-

बूँद बचाये | Poem boond bachaye

Similar Posts

  • मैं सैनिक हूँ | Sainik par kavita

    मैं सैनिक हूँ  ( Main sainik hoon )    मैं हूॅं भारतीय  सेना का वीर, आग हवा कांटे चाहें हो नीर। सर्दी गर्मी चाहे वर्षा चले घोर, रखता सदा रायफल सिर मोर।।   चाहें हो जाऍं सुबह से शाम, करता नही कभी में आराम। घुसनें न दूं दुश्मन अपनी और, हो जाऍं  रात  चाहे फिर …

  • स्नेह सुधा बरसाने वाली

    स्नेह सुधा बरसाने वाली मन मन्दिर अपना है खाली, दिल का सिंहासन भी खाली। तरुणी कहां छुपी जा बैठी स्नेह सुधा बरसाने वाली।। मन को तुम भरमाने वाली, दिल को तुम तरसाने वाली। तरुणी कहां छुपी जा बैठी, स्नेह सुधा बरसाने वाली।। चंचल चितवन से तुम अपने, अनुपम नाच नचाने वाली। तरुणी कहां छुपी जा…

  • वक़्त का पहिया | Waqt ka Pahiya

    वक़्त का पहिया ( Waqt ka pahiya )   वक्त का पहिया कभी न रूकता ये चलता ही रहता, सर्दी-गर्मी ऑंधी तूफ़ान यह बारिश में नहीं थकता। मेहनत करनें वालों को सदा मिलती यही सफ़लता, जिसमें है ये चार गुण वह हर दिल पर राज करता।। सबको आदर देता हो व विनम्रतापूर्वक बात करता, माफ़ी…

  • तेरी सीता हूँ मैं | Teri Sita hoon main

    तेरी सीता हूँ मैं!  ( Teri Sita hoon main )    सइयाँ आँखों में तेरी कहानी रहे, साथ जिऊँ, सजन जिन्दगानी रहे। तेरी सीता हूँ मैं, राम हो तुम मेरे, मेरे माथे पे तेरी निशानी रहे। मेरा जीवन बीते भले काँटों पे क्या, जग की नजरों पे तेरा वो पानी रहे। आँधियों में दीया मेरा…

  • चलो आओ | Prem ras ki kavita

    चलो आओ ( Chale aao )   इश्क महोब्बत से भरे दिल के दियों में रूह की बाती बना तुझमें ‘मैं’ जलूँ मुझमें ‘तू’ जले इक रात ही क्यों हर रात की स्याही तू भी रौशन करे मैं भी रौशन करूँ.   लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब ) यह भी पढ़ें :- https://thesahitya.com/poem-suno/…

  • आओ रुक जायें यहीं

    आओ रुक जायें यहीं   आओ रुक जाए यही कुछ सुकून तो मिले रफ्ता रफ्ता जिंदगी से कुछ निजात मिले   हम भी बहके से चले राहे उल्फत में कभी याद करते हैं तुम्हें कहाँ भूले हैं अभी   बात वो रुक सी गई बात जो कह ना सकी दिल ऐ आइने में अभी एक…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *