Poem na A/C na car

मुझे ए .सी. न बंगला न कार चाहिए | Poem na A/C na car

मुझे ए .सी. न बंगला न कार चाहिए

( Mujhe A/C na bangla na car chahiye )

 

 

मुझे ए .सी. न बंगला न कार चाहिए,

 दहेज में बीवी का बस प्यार चाहिए।

 

 माता पिता सब का जो सम्मान करें

पांव पुजी में  ऐसा  संस्कार  चाहिए।

 

कोई भूखा न जाए   मेरे   द्वार  से,

कलेवा  में  ऐसा  व्यवहार  चाहिए।

 

 घर  की  मर्यादा जो न नीलाम करें

विदाई    में   ऐसा  खुद्दार  चाहिए l

 

मुझे कुछ नहीं चाहिए उनके परिवार से,

बस नम्रता से भरा प्रेम व्यौहार चाहिए।

 

जिसके  प्रेम  के  सागर में  मैं  डूबा  रहूं,

मुझे ऐसा जीवन साथी दिलदार चाहिए।

 

?

Dheerendra

कवि – धीरेंद्र सिंह नागा

(ग्राम -जवई,  पोस्ट-तिल्हापुर, जिला- कौशांबी )

उत्तर प्रदेश : Pin-212218

यह भी पढ़ें :

मुक्तक मां | Muktak Maa

 

Similar Posts

  • और कितना गिरेगा तू मानव | Mannav kavita

    और कितना गिरेगा तू मानव ? *****   और कितना गिरेगा तू मानव? दिन ब दिन बनते जा रहा है दानव। कभी राम कृष्ण ने जहां किया था दानवों का नाश! उसी भूमि के मानवबुद्धि का हो रहा विनाश। जहां बुद्ध ने दानवों को भी मानवी पाठ पढ़ाए थे, अष्टांगिक मार्ग पर चलना सिखाए थे।…

  • रंग | Kavita Rang

    रंग ( Rang )   रंगो की समझ हो तो तस्वीर बना दो। छंदो की समझ हो तो फिर गीत बना दो। जज्बात मे लहर हो तो प्यार तू कर ले, जो कुछ नही आता तो दिवाना बना दो।   दिल पे तुम्हारी चाहतो के जो निशान है। वो घाव बडे गहरे है और लाइलाज…

  • एक अजीब लड़की | Poem ek ajeeb ladki

    एक अजीब लड़की ! ( Ek ajeeb ladki ) ***** घड़ी घड़ी कपड़े है बदलती, बिना काम बाजारों में है टहलती। अभी दिखी थी साड़ी में, अब आई है गाउन में; नयी नयी लग रही है टाउन में। अधरों पर लिए अजीब मुस्कान, कुछ खास नहीं उसकी पहचान। मुखरे पर किए अतिशय श्रृंगार, युवा धड़कनें…

  • लाय बरस री | Marwadi poem

    लाय बरस री   सन सन करती लूंवां चालै आकांशा सूं अंगारा चिलचिलाती दोपारी म बिलख रहया पंछी सारा   आग उगळती सड़कां तपरी बळती लाय पून चलै झूळस ज्यायै काळजो सगळो ताती रेतां पग बळै   गरम तवा सी तपै धरती च्यारूं चोखटां लाय बळै पाणी ढूंढता फिरै पंछीड़ा भरी दोपारी दिन ढळै  …

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -बजट -2021

    बजट -2021 ( Budget -2021 )   देश की परंम्परा निभाने का दिन आया  है अपने  देश  ने  वार्षिक  बजट दिखाया है   महिला मजदूर उद्योगपतियों कृषको  सभी के लिए चुनौति बन कर आया है     सीतारमण ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है नौकरीपेशा  को  थोड़ी राहत दिलवाई है   सरकारी गैरसरकारी सब के लिए…

  • अंगदान है महादान | Angdaan hai Mahadaan

    अंगदान है महादान ( Angdaan hai mahadaan )   चलों साथियों दिलदार बनों और करों अंगों का दान, महादान का हिस्सा बनकर बन जाओ सभी महान। समझो इसकी अहमियत करों प्रोत्साहित हर इंसान, यह अमूल्य-उपहार है जो बचाता मरीज़ की जान।। जीवित चाहें मृत व्यक्ति जिसका कर सकता है दान, पहले नेत्रदान एवं रक्तदान था…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *