Poem on paras

पारस | Poem on paras

पारस

( Paras )

 

करामात होती पारस में जब लोहे को छू लेता है।
कुदरत का खेल निराला धातु स्वर्ण कर देता है।

 

छूकर मन के तारों को शब्द रसीले स्नेहिल भाव।
रसधार बहती गंगा सी रिश्तो में हो नेह जुड़ाव।

 

प्यार भरे दो बोल मीठे पारस सा असर दिखाते हैं।
कल तक थे बैरी हमारे घनिष्ठ मित्र बन जाते हैं।

 

शब्दाक्षर जब भाव भरे स्वर्णाक्षर हो दमकते हैं।
मुस्कानों के मोती बांटे दुनिया में खूब चमकते हैं।

 

कर्मों से छवि सुहानी उन्मुक्त गगन उड़ान भरो।
सेवा सत्कर्मों से प्यारे दुनिया में पहचान करो।

 

जिस पर रख दूं हाथ आनंद मगन हो जाता है।
पारस पत्थर सा जादू यारो मुझको भी आता है।

 

तराश सको प्रतिभा कोई कंकड़ को सोना कर दे।
अनुभवों भरा खजाना सत्य स्वप्न सलोना कर दे।

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

नफरत की दुनिया | Poem on world of hate in Hindi

Similar Posts

  • क्या चाहती हो सुन्दर नारी | Geet in Hindi

    क्या चाहती हो सुन्दर नारी ( Kya chahti ho sundar nari )   क्या चाहती हो सुंदर नारी विश्वास प्रेम से भरी हुई तुम राग प्रीत की मूरत हो जग को जीवन देने वाली क्यूं पीले पात सुखी आशा दामन में अपने रखती हो क्यूं जुगनू सी धीमे चलकर हर पल आगे तुम बढ़तीहो क्यूँ…

  • अब भी | Ab Bhi

    अब भी ( Ab Bhi )    ज्यादा कुछ नही बिगड़ा है अभी संभलना चाहोगे तो संभल जाओगे कौन नही गिरा है अभी यहां पर उबारना चाहोगे तो उबर जाओगे… दिखती हो बंजर भले कोई धरती बूंदों के आगमन से छा जाती हरियाली आया हो भले ये मौसम पतझड़ का ठानते ही आएगी फिर खुश…

  • अग्नि परीक्षा | Agni Pariksha

    अग्नि परीक्षा ( Agni pariksha )    सीता आज भी पूछ रही है, हे नाथ, आप तो अवतरित हुए थे, जगत के कल्याण हेतु, जगत पिता है आप, नारायण के अवतार हैं, फिर भी आपको नहीं विश्वास है, हमारी पवित्रता पर, फिर कैसे कहूं कि, आप भगवान है। आखिर क्यों, युगों युगों से, स्त्री को…

  • भूल गए सावन के झूले | Sawan ke Jhoole

    भूल गए सावन के झूले ( Bhool gaye sawan ke jhoole )    भूल गए सावन के झूले, भूल गए हर प्रीत यहां। भाईचारा प्रेम भूले, हम भूल गए हैं मीत यहां। भूल गए सावन के झूले मान सम्मान मर्यादा भूले, सभ्यता संस्कार को। रिश्ते नाते निभाना भूले, अतिथि सत्कार को। गांव की वो पगडंडी,…

  • कुछ जाने अनजाने रिश्ते | Kavita

    कुछ जाने अनजाने रिश्ते ( Kuch jaane anjaane rishte )   कुछ जाने अनजाने रिश्ते, कुछ दिल से पहचाने रिश्ते। कुछ कुदरत ने हमें दिया है, कुछ हमको निभाने रिश्ते।   रिश्तो की पावन डगर पर, संभल संभल कर चलना है। सदा लुटाना प्यार के मोती, संस्कारों में हमें ढलना है।   माता पिता गुरु…

  • आधुनिकता | Aadhunikta

    आधुनिकता ( Aadhunikta )   चाँद की हो गई, दुनिया दीवानी । तारों में बसने लगे, शहरे हमारी ।। ख्वाहिश  पूरी  हुई , इंसानो  की । दुनिया छोड़ दी,घर बनाने के लिए ।।   जल हो गई, प्रदूषित भारी । ज़हर  बन  गई, प्राणवायु ।। जिए  तो  जिए कैसे इंसान । नरक बन गई, धरती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *