शोहरतों का परचम
शोहरतों का परचम

शोहरतों का परचम

( Shohraton ka parcham )

 

कीर्ति पताका यशस्वी हो जीवन संवार लीजिए।
अपनापन अनमोल बांटकर सबको प्यार कीजिए।

 

शोहरतों का परचम लहरे शुभ काम हमारा हो।
मुस्कानों के मोती सबको बहती नेह की धारा हो।

 

प्रीत बगिया खिल जाए सद्भावों से जी लीजिए।
दिलों में चर्चा आपकी अहमियत सबको दीजिए।

 

प्रशंसा के पुल बांधो सराहना करो शुभ काम की।
खुलकर हंसो सबको हंसाओ कद्र करो इंसान की।

 

औरों के भी काम आए समझो जीना आ गया।
प्रेम सुधारस बांट सबको हमें गरल पीना आ गया।

 

दुनिया दीवानी उसकी जो सोचे जनहित में भला।
नभ को छू लेती कीर्ति हौसला भरकर जो चला।

 

संकटों में साथ दें जो दिल जीत वहीं पाता है।
औरों की खातिर जीये शोहरत वही नर पाता है।

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कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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