Pragati ka Rasta

प्रगति का रस्ता | Pragati ka Rasta

प्रगति का रस्ता

( Pragati ka rasta ) 

 

मैं कभी नहीं मुड़ूंगा पीछे
हमेशा चलता रहूंगा
अपने पथ पर
बिना किसी परवाह किए
मैं अपने सभी गम को भुलाते हुए
भूख प्यास को भुलाते हुए
तन पर फटे कपड़े सजाते हुए
आगे बढूंगा
और मैं इस दुनिया में
अपना नाम रोशन करूगा
जब मैं पढ़ लिखकर
एक इच्छा इंसान जाऊंगा
मैं युद्ध में सैनिक
खेतों में किसान
विद्यालय में अध्यापक
घर में पिता जी
गांव की संस्कृति
दिहाड़ीदार मजदूर
नाटक मंचन में रंगकर्मी
सिनेमा में अभिनेता
समाज में लेखक,कवि
गांव में सरपंच
ये हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं
इनकी मार्गदर्शन में चलेंगे
जीवन सफल बन जाएगा
तभी भारत देश महान कहलाएगा।

 

Manjit Singh

मनजीत सिंह
सहायक प्राध्यापक उर्दू
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ( कुरुक्षेत्र )

यह भी पढ़ें :-

दहेज में मां | Dahej mein Maa

Similar Posts

  • Holi Kavita | होली के त्यौहार पर कविता

    होली ( Holi )   रंग-बिरंगे रंगों का त्यौहार है होली फागुन का सजीला सिंगार है होली बेरंग ज़िंदगी में फिर लाई बहार है होली प्राणियों में बसा सच्चा प्यार है होली । रंग-बिरंगे रंगों का त्यौहार है होली ।।   बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है होली राधा-कृष्ण के प्रेम का अमर…

  • यह वक्त भी बीत जाएगा | Kavita Yah Waqt bhi Beet Jayega

    यह वक्त भी बीत जाएगा ( Yah waqt bhi beet jayega )    कुदरत की यह अद्भुत लीला, रात गई तब दिन आएगा। चीर अंधेरा रवि निकलेगा, यह वक्त भी बीत जाएगा।। जन्म मरण का खेल रचा है, जो आता है सो जाता है। कर्मों के अनुसार जीव सब, किया कर्म ही भुगताता है। राजा…

  • सर्दी | Sardi

    सर्दी सर्दी में होती जब कड़क ठंडी हवा ।चाय की प्याली होती सबकी प्यारी दवा।।मास दिसंबर में जब होती प्यारी सर्दी।भाई पहन लेते सब अपनी गर्म वर्दी।। सर्दी में जब-जब ठंडी हवा चलती।कपड़े भी देखो कहा हवा सुखाती।।ठंडी हवा में चाय की प्याली होती प्यारी।ठंडी हवा में चाय का मजा लें दुनिया सारी।। किट-किट बजते…

  • भगवान महावीर का 2594 वां दीक्षा कल्याणक दिवस

    भगवान महावीर का 2594 वां दीक्षा कल्याणक दिवस यह उमर हमारी बीत रहीसत् संगत में रमकरज्ञानामृत का पान कर लेमहावीर प्रभु का गुणगान कर ले ।नाशवान है काया हमारीक्यों करे मेरी मेरी ।इस तन को राख बननेलगे न इक पल की देरी ।महावीर प्रभु का गुणगान कर ले ।सबके साथ लगा है भारी ,जन्म –…

  • आवारा धूप | Awara Dhoop

    आवारा धूप ( Awara dhoop )   धूप तो धूप ही होती है इस कोहरे ठंड से ठिठुरते शहर में धूप का इंतजार रहता है सबको कहीं से थोड़ी सी धूप मिले, सूरज सो गया है कंबल में लिपटकर, धूप को सुला लेता है, आगोश में अपनी , धूप सो जाती है, सूरज की बाँहो…

  • औघड़ दानी हे वरदानी | Aughad Dani

    औघड़ दानी हे वरदानी  ( Aughad Dani hai Bardani )    महाकाल महादेव महेश्वर, भुजंग भूषण अविनाशी। शिव शंकर सदाशिव भोले, भूतनाथ शिव कैलाशी। नीलकंठ नटराज शंकर, महानिधि महेश महायोगी। हे गंगाधर हे भूतेश्वर,भगवन आदि देव हे आदियोगी। औघड़ दानी हे वरदानी,बाबा त्रिपुरारी त्रिशूल धारी। त्रिलोचन त्रिलोकी नाथ,त्रिभुवन स्वामी दया धारी। चन्द्र ललाट जटा में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *