प्रेम ( दोहा )

प्रेम | Prem Ke Dohe

प्रेम 

( Prem )

 

१)
प्रेम की बंसी सुमधुर,मंत्रमुग्ध करी जाए।
सुध-बुध का न पता चले,एकांत समय बिताए।।

 

२)
जीवन में प्रेम महान, कुछ न इसके समान।
मान सम्मान जहां मिले,वही है स्वर्ग स्थान।।

 

३)
नमन से नयन मिलाओ, आंखें कर लो चार।
प्रेमरोग में जो पड़े,छुट जावे संसार ।।

 

४)
प्रेम सरीखा रोग ना,सब रोगों का बाप।
लगते कुछ सूझत नहीं, मानों हो अभिशाप।।

 

५)
मां का प्रेम है सोना,जाने जग संसार।
‘मंजूर’ सेवा करना, दुआ लेना हजार।।

 

नवाब मंजूर

लेखकमो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें :

भिखारी | Hindi Poem on Bhikhari

Similar Posts

  • मित्रता ( दोस्ती ) : Mitrata Par Dohe

    मित्रता ( दोस्ती ) उसको मित्र बनाइए ,जो ना छोड़े साथ।विपदा जब कोई पड़े, हर पल देता साथ।। स्वार्थ कोई हो नहीं, सच्चा मित्र कहाय ।विपदा में संग संग रहे, राह नई दिखलाय ।। सखा सुदामा कृष्ण की, जग में बड़ी मिसाल ।मित्र धर्म की पालना, करी बिहारी लाल।। करो उसी से मित्रता ,समझे मन…

  • दो दोहे | Aazam ke Dohe

    दो दोहे ( Do dohe )   रख दिल में  तू अहिंसा, दुश्मन से मत हार ॥ लड़ दुश्मन से  तू सदा, बनकर बिन तलवार ॥   छोड़ो नफ़रत फ़ूल बन , कर मत बातें खार ॥ कर ले सबसे दोस्त तू, दिल से अपने प्यार॥ शायर: आज़म नैय्यर (सहारनपुर ) यह भी पढ़ें : –…

  • वायदों का झांसा | दोहा

    वायदों का झांसा ( Waydon ka jhansa )   वायदों का झांसा देते नेता जुमले बाज़! जान चुकी जनता इन्हें पोल खुली है आज!! देंगे सबको कहता था पंद्रह पंद्रह लाख! सिंहासन पर बैठ गया चुरा रहा अब आंख!! सत्ता में गुंडे -मवाली बैठे नेताओं संग! भ्रष्ट्रचारी ही लड़ रहे भ्रष्ट्रचार की जंग!! मंदिर -मस्जिद…

  • भावानुवाद विधा दोहा

    भगवान शिव और पार्वती के मध्य हुए रोचक वार्तालाप का भावानुवाद प्रस्तुत है ! कवि का वक्रोक्ति-चमत्कार द्रष्टव्य है। मूल श्लोक इस प्रकार है — कस्त्वं शूली मृगय भिषजं नीलकण्ठ: प्रियेSहम् केकामेकां कुरु पशुपति: नैव दृष्टे विषाणे। स्थाणुर्मुग्धे ! न वदति तरु: जीवितेश: शिवाया: गच्छाटव्यामिति हतवचा पातु वश्चन्द्रचूड़ ।। शिव -गौरा संवाद द्वार बंद शिव…

  • योग पर रचित दोहे

    योग पर रचित दोहे मन लगाकर योग करें,जीने की है कला।मजहब से ऊपर योग,होगा सबका भला। सूरज को करना नमन,ये योगों का सार।तनाव मुक्त होंगे सब,मिला हमें उपहार।। मिट जाएगी थकावट,मिलता है आराम।दुनिया की पहचान है,बने योग से काम।। वजन घटाए आपका,रोज करेंगे योग।संकल्प सबको लेना,मेरा यह अनुरोध।। करे योग – रहे निरोग,सेहत का है…

  • स्वाध्याय | Svadhyaya par doha

    स्वाध्याय ( Svadhyaya )   स्वाध्याय जो नित्य करें, मनन करें सुविचार। चित उज्जवल पावन बने, बहे नेह रसधार। उर उजियारा हो सखे, जगे ज्ञान यशदीप। महके चमन जीवन का, मधुर बजे संगीत। पठन अरू पाठन करे, मनन करे दिन-रात। बुध्दिबल यश वैभव बढ़े, मिले सुधीजन साथ।   रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन नवलगढ़ जिला झुंझुनू ( राजस्थान…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *