Prem ki poem

एक प्रेम कविता | Prem ki poem

एक प्रेम कविता

( Ek prem kavita ) 

 

जब जब साथ तुम्हारा मिले
यह ह्रदय मेरा प्रेम से खिले,

फूलों से महक जाए हर खुशी
भावनाओं में जैसे ये मन वहे ।।

मैं एक प्रेम कविता बन जाऊं
तू लिखे मुझे अपनी चाहत से ,

खाली समय में बस सोचे मुझे,
तेरी ही एक प्रेम कविता कहलाऊं।।

 

प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

यह भी पढ़ें :- 

Kavita | वृक्ष कहे तुमसे

Similar Posts

  • Vriksh Ki Peeda | वृक्ष की पीड़ा

    वृक्ष की पीड़ा ( Vriksh Ki Peeda )    काटकर मुझे सुखाकर धूप में लकड़ी से मेरे बनाते हैं सिंहासन वार्निश से पोतकर चमकाते हैं वोट देकर लोग उन्हें बिठाते हैं वो बैठ कुर्सी पर अपनी किस्मत चमकाते हैं, बघारते हैं शोखी, इठलाते हैं; हर सच्चाई को झुठलाते हैं। मोह बड़ा उन्हें कुर्सी का नहीं…

  • जीना मरना | Kavita Jeena Marna

    जीना मरना ( Jeena Marna )   घुट घुट कर जीने से मरना बेहत्तर घुटने टेक कर जीने से मरना बेहत्तर अकेले आये हो आज़ाद बन कर जीना ग़ुलाम बन कर जीने से मरना बेहत्तर सिर ऊंचा कर जीओ अदब एह़तराम से बेज़मीर बन कर जीने से मरना बेहत्तर पराये मह़ल से अपनी झुग्गी झौंपड़ी…

  • ये बहके बहके से कदम | Kavita ye Behke Behke se Kadam

    ये बहके बहके से कदम ये बहके बहके से कदम थाम लो तुम जरा। लड़खड़ा ना जाए कहीं संभलना तुम जरा। चकाचौध की दुनिया चमक दमक लुभाती। भटक ना जाए तरुणाई चिंता यही सताती। मधुर मधुर रसधारो में छल छद्मों का डेरा है। डगर डगर पे चालाकियां अंधकार घनेरा है। झूठा आकर्षण झूठे वादे केवल…

  • श्री राम जन्मोत्सव | Kavita Shri Ram Janmotsav

    श्री राम जन्मोत्सव ( Shri Ram Janmotsav )   सज गई अयोध्या हर्षित है जग सारा, चहुं ओर फैला राम नाम का उजियारा। जिधर देखो उधर आज श्री राम जी का नाम है, नाम सुमिरन से सब ताप हरे ऐसे उनके काम हैं। श्री राम मंदिर में होने वाली राम जन्मोत्सव की प्रतिष्ठा, पूर्ण हुई…

  • आपस में करेंगे सहकार

    आपस में करेंगे सहकार ***** आपस में करेंगे सहकार, यूं न बैठेंगे थक-हार। कमियों पर करेंगे विमर्श, खोजेंगे सर्वोत्तम निष्कर्ष। मिलजुल सब करेंगे संघर्ष, चेहरे पर होगा हर्ष ही हर्ष। देखते हैं परिस्थितियां कब तक नहीं बदलतीं? कब तक खुशियों की फुलझरिया नहीं खिलती? आंखों से आंखें,गले से गले नहीं मिलती? यकीं है शीघ्र ही…

  • कभी तुम भी | Kavita Kabhi Tum Bhi

    कभी तुम भी ( Kabhi Tum Bhi )   तौल तो लेते हो हर किसी को देखकर कभी खुद को भी तौल लिया करो बोल तो देते हो जो आये जबान पर कभी खुद के लिए भी बोल लिया करो उसके बनाई का श्रम मालूम है उसे उस जैसी मेहनत खुद भी कर लिया करो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *