रेशम की डोरी बहना का प्यार

रेशम की डोरी बहना का प्यार | Raksha bandhan par kavita

रेशम की डोरी बहना का प्यार

( Resham ki dori behna ka pyar )

 

 

रेशम की डोरी राखी, भाई बहन का प्यार।

त्यौहार सद्भावों भरा, राखी बंधवाइये।

 

कच्चे धागों में लिपटा, प्रेम सुधारस सार।

रक्षासूत्र बांधकर, संबंध निभाइये।

 

अक्षत चंदन रोली, बहना लै बांधे राखी।

रिश्तो की डोर को, पावन बनाइए।

 

खुशियां लेकर आया, शुभ राखी का त्यौहार।

सद्भाव भरी डोर से, त्योहार मनाइये।

 

बहना लाड प्यार से, कलाई बांधती  राखी।

हंसी-खुशी माहौल को, मोहक बनाइये।

 

खुशियों से भरा रहे, बहना घर संसार।

फर्ज भाई बहन का, संकट निवारिये।

 

नदी पर्वत पेड़ों को, मानव जा बांधे राखी।

कुदरत की और भी, कदम बढ़ाइये।

 

प्रेम रसधार बहे, घट घट नेह भरी।

बहती पुण्य गंगा में, डुबकी लगाइये।

 

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

लो आया राखी का त्यौहार | Geet

Similar Posts

  • Ja-Ra-Mat Bhojpuri Kavita -जरअ मत !

    जरअ मत !  ** (भोजपुरी भाषा में) ******   ना त राख हो जइब, कोयला नियर खाक हो जइब। बाॅडी मास ( Body, Mass ) सब हो जाई हवा, एकर नइखे कवनो दवा। इ प्रकृति के नियम बा- जे जरी ऊ साफ होई, जरला पर राख होई। हवा उड़िया ले जाई, अस्तित्व तोहार मिटाई। त…

  • इक हुंकार | Kavita

    इक हुंकार ( Ek hunkar )   हम संघी है….. जन संघी है, भारत जय हो, विजय सोच के रंगी है। हम संघी है.. भगवा है पहचान हमारी, शिव शक्ति मे डूबे हम अड भंगी है। हम संघी है.. खाकी रंग है माटी रंग, मातृभूमि के सेवक हम कुछ जंगी है। हम संघी है…. शेर…

  • Hindi Poetry On Life | Hindi Poem -आफर

    आफर ( Offer )   क्या  कोई  ऐसा  भी  है  जो, दुखी  हृदय  घबराए। प्रेम दिवस पर मुझे बुलाकर,पिज्जा, केक खिलाए।   इससे  पहले  भाग्य  अभागा, सिंगल  ही मर जाए। फोन  करे  हुंकार  को  पहले, आकर  आफर पाए।   आँखों  मे  आँखो  को  डाले, मन  की  बात  करेगे। पुष्प  गुलाब  का  तुम  ले आना, बालों…

  • Prem ki Holi | कविता प्रेम की होली

    प्रेम की होली ( Prem Ki Holi )   खेलेंगे हम प्रेम की होली। अरमानों की भरेगी झोली। खुशियों की बारात सजेगी, बिगड़ी सारी बात बनेगी। नोंक-झोंक कुछ हल्की-फुल्की, होगी हॅंसी-ठिठोली। खेलेंगे हम प्रेम की होली।   महुए की मदमाती गंध, फूलों की खुशबू के संग। आया है दुल्हा ऋतुराज, चढ़कर फाग की डोली। खेलेंगे…

  • न रुकी जंग तो | Na Ruki Jang to

    न रुकी जंग तो…! ( Na ruki jang to ) ( नज़्म )   बुराई बढ़ेगी, तो अच्छाई भी बढ़ेगी, ये दुनिया आज है,तो कल भी रहेगी। सदियों से एक साथ रहते हम आए, मोहब्बत की तासीर न फीकी पड़ेगी। अम्न का रास्ता बनाओ दुनियावालों, जड़ से जुड़ी कायनात,जुड़ी ये रहेगी। ऐसे तो मुक्कमल कोई…

  • वार्षिकोत्सव की पावन बेला पर | Varshik Utsav

    वार्षिकोत्सव की पावन बेला पर ( Varshik utsav ki pawan bela par )    वार्षिकोत्सव की पावन बैला पर देते आपको बधाई, साहित्यिक गतिविधियों में अद्वितीय सेवाऍं निभाई। छोटे-बड़े और नऐ कलमकारों का इसने दिल जीता, काव्य काॅर्नर फाउंडेशन की इस दिन ही नींव लगाई।। सफ़र संघर्षों का शुरु किया आपने पाॅंच साल पहले, धीरे-धीरे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *